भारती
निजी ट्रेन प्रचालन में इच्छुक कंपनियों से प्रस्ताव मंगाने को रेलवे तैयार, ढुलाई शुल्क तय

निजी ट्रेन प्रचालन के लिए टेंडर दस्तावेज तैयार हो रहे हैं और बड़े खिलाड़ियों के बीच भारतीय रेलवे की पहली ऐसी रेल परियोजना का भागीदार बनने के लिए उत्साह है।

इस माह के अंत तक भारतीय रेलवे 22,500 करोड़ रुपये के निजी ट्रेन प्रचालन प्रस्ताव के लिए योग्यता हेतु निवेदन (आरएफक्यू) मंगवाएगी जिसके तहत 100 मार्गों पर 150 यात्री गाड़ियाँ निजी कंपनियों द्वारा चलाई जाएँगी।

बोली दस्तावेजों के अनुसार निजी कंपनियों को प्रति किलोमीटर 668 रुपये के ढुलाई शुल्क के अलावा ट्रेन परिचालन से अर्जित राजस्व का भी कुछ भाग देना होगा। राजस्व साझाकरण मॉडल के अंतर्गत टिकट बिक्री से हुई कमाई के अलावा प्रचार आदि से हुई गैर-किराया आय को भी साझा करना होगा।

राजस्व साझाकरण बिंदु प्रमुख है क्योंकि बोली लगाने वालों को सबसे कम बोली के आधार पर चुना जाएगा।

बोली से पूर्व हुई बैठक में सभी बोली लगाने वालों ने ढुलाई शुल्क पर सहमति जताई लेकिन राजस्व साझाकरण अभी भी विवाद का मुद्दा बना हुआ है।

यात्री व्यापार में 40,000 करोड़ रुपये का घाटा झेलने के बाद निजी कंपनियों को प्रवेश की अनुमति देना एक बड़ा कदम है। इससे यात्री गाड़ी क्षेत्र में भारतीय रेलवे का एकाधिकार घटेगा। अधिक ऊँच-नीच न हो, यह देखने के लिए एक नियमाक रहेगा जो शुल्क और निजी ट्रेन परिचालकों के अन्य मामलों पर नज़र रखेगा।

आरएफक्यू में यह भी उल्लेखित है कि कोई समान मार्ग वाली यात्री गाड़ी निजी क्षेत्र की गाड़ी के प्रस्थान से 15 मिनट पूर्व और प्रस्थान के 15 मिनट बाद के बीच नहीं निकलेगी।

अभी तक यात्री क्षेत्र में भारतीय रेलवे का ही एकाधिकार था और केवल सीमित रूप से कुछ पर्यटन ट्रेनें निजी रूप से चलाई जा रहीं थीं। भारतीय रेलवे की इस पहल में टाटा और अदानी समूह जैसी शीर्ष इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन क्षेत्र की कंपनियों ने रुचि दिखाई है।

इसके अलावा स्पेन, फ्रांस, जर्मनी, यूएस, जापान, कोरिया और चीन से वैश्विक खिलोड़ियों ने भी निजी ट्रेन परिचालन में रुचि दिखाई है।

“आरएफक्यू की रूपरेखा प्रसारित की जा चुकी है और कई इच्छुक कंपनियाँ परियोजना के विषय में जानकारियाँ प्राप्त करना चाहती हैं। हमने उनकी चिंताओं पर उत्तर दे दिया है और अब दस्तावेज को अंतिम रूप दिया जा रहा है व माह के अंत तक इसे जारी कर दिया जाएगा।”, रेलवे के सूत्रों ने बताया।

अपेक्षा है कि निजी कंपनियाँ 16 कोचों वाली आधुनिक ट्रेनें लेकर आएँगी जिनमें उन्नत सुविधाएँ होंगी जैसे बेहतर अभ्यंतर, आरामदायक कुर्सियाँ, मनोरंजन के साधन, स्वच्छ बायो-वैक्यूम शौचालय और अच्छा भोजन।

बायो-वैक्यूम शौचालय

150 निजी ट्रेनों को चलाने के लिए जिन 100 मार्गों को चुना गया है, उन्हें 10-12 क्लस्टरों में विभाजित किया गया है। इस योजना के अंतर्गत मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, पटना, रांची, भोपाल, वाराणसी और लखनऊ को जोड़ने वाली ट्रेनें सम्मिलित हैं।

दिल्ली-मुंबई क्षेत्र में टैलगो नामक स्पेन की रोलिंग स्टॉक कंपनी ने दो वर्षों पहले ही सफल ट्रायल किया था और आशा है कि यह कंपनी भी इस प्रतिस्पर्धा में शामिल होगी।

ऑल्सटम, बॉम्बार्डियर, साईमन्स, हुंडई, हिटाची और सीआरसीसी (चीनी) जैसी बड़ी कंपनियों ने बोली के पहले हुई बैठक में भाग लिया था और उम्मीद है कि ये भी प्रतिस्पर्धा में उतरेंगी।

भारतीय कंपनियों में से टाटा रियलटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर, मेधा, भारत फोर्ज, बीईएमएल, आईआरसीटीसी, आरके असोसिएट्स, गेटएक्स, एस्सेल समूह, अदानी पोर्ट्स और एसईज़ेड हितधारकों की बैठक में उपस्थित थे और देश में निजी ट्रेन चलाने में भी रुचि रखते हैं।

यात्री रेल में निजी क्षेत्र को लाने के सरकार के प्रयास को दोहराते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय रेलवे की बड़ी योजना बताई जहाँ चयनित मार्गों पर निजी ट्रेनें चलेंगी व पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए और तेजस एक्सप्रेस पटरी पर उतारी जाएँगी।

वर्तमान में रेलवे की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई- आईआरसीटीसी दिल्ली-लखनऊ व मुंबई-अहमदाबाद मार्गों में दो तेजस एक्सप्रेस चला रही है। हालाँकि आईआरसीटीसी द्वारा प्रचालित ट्रेनों को निजी ट्रेन नहीं कहा जा सकता है लेकिन इसे निजी क्षेत्र में उतरने से पहले एक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

तेजस एक्सप्रेस

सुरक्षा और संचालन पर रेलवे का ही नियंत्रण रहेगा क्योंकि सिग्नलिंग प्रणाली, ट्रैक, लोको पाइलट, स्टेशन और प्लैटफॉर्म पर इस सार्वजनिक उद्यम की ही पकड़ रहेगी। ट्रेन चलाने के अलावा निजी कंपनियों का दायित्व यात्रियों को भोजन, प्रचालन के लिए कर्मचारी, सुविधाएँ और टिकट उपलब्ध कराना होगा।

यात्रियों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए कुछ व्यस्त मार्ग चयनित किए जा रहे हैं। जैसे बिहार से आने-जाने वाली रेलगाड़ियों में हमेशा अधिक भीड़ रहती है इसलिए बिहार से जोड़ने वाले नौ मार्ग चिह्नित किए गए हैं।

हावड़ा से पटना, नई दिल्ली से पटना, पटना से पुणे, इंदौर से दानापुर, गया से आनंद विंहार, दरभंगा से जोगेश्वरी (मुंबई), आनंद विहार से छपरा, बरौनी से आनंद विहार, पनवेल से पटना, कटिहार से तिलक ब्रिज (नई दिल्ली) और आनंद विहार से भागलपुर के मार्ग इस योजना में सम्मिलित हैं। इसी प्रकार बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, झारखंड, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों को जो़ने वाली भी कई निजी ट्रेनें होंगी।

निजी कंपनियाँ वित्त, खरीद, संचालन और रखरखाव के लिए ज़िम्मेदार होंगी तो आशा है कि परिस्थिति बेहतर हो और यात्रियों को उन्नत सुविधाएँ व त्वरित सेवाएँ मिल सकें। माना जा रहा है कि अच्छी सेवा और समय पाबंद ट्रेनों के लिए ग्राहक अधिक राशि के भुगतान के लिए तैयार हैं। इसलिए विश्वास जताया जा रहा है कि निजी ट्रेनें समय पर चलेंगी और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बेहतर सेवाएँ प्रदान करेंगी।

ट्रैक का पुनर्विकास तेज़ी से हो रहा है। सभी निजी ट्रेनों को 160 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम गति पर चलने की अनुमति दी जाएगी।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्रैक सुधार को प्राथमिकता पर रखा है ताकी पुरानी ट्रैकों के कारण रेल पटरी से न उतरे। नई ट्रैकों के कारण जो अधिक मज़बूत होंगी, बिना किसी बाधा के ट्रेनों को तेज़ गति पर चलाया जा सकेगा।

हाल ही में रेलवे ने 1 जनवरी 2020 से नई शुल्क दरें लागू की हैं। उप-नगरीय सेवाओं का शुल्क नहीं बढ़ाया गया है लेकिन अन्य सेवाओं की दर 1 पैसा प्रति किलोमीटर से बढ़ाई गई है, वहीं वातानुकूलित श्रेणियों की दर मेल में 2 पैसा प्रति किलोमीटर और एक्सप्रेस में 4 पैसा प्रति किलोमीटर से बढ़ाई गई है।

रेलवे को आशा है कि इस किराया बढ़ोतरी से यह साल में 2,300 करोड़ रुपये अधिक कमा सकेगी लेकिन यात्री व्यापार बड़े घाटे में है। माल ढुलाई सेवा मुनाफे में है और उसकी आय से यात्री सेवा को सब्सिडी दी जाती है। सूत्रों का मानना है कि किराए में और बढ़ोतरी हो सकती है।

नए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए बजट 2020 में 12,000 करोड़ रुपये नई रेलवे लाइनों के निर्माण के लिए, 2,250 करोड़ रुपये गॉज विस्तार, 700 करोड़ रुपये ट्रैक दोहरीकरण, 5,787 करोड़ रुपये रोलिंग स्टॉक और 1,650 करोड़ रुपये सिग्नलिंग व दूरसंचार के लिए आवंटित किए गए हैं।

निजी ट्रेन परिचालन के अलावा स्टेशन सफाई, भुगतान व उपयोग शौचालय, आराम स्थल, पार्किंग व प्लैटफॉर्म रख-रखाव जैसी सेवाओं का दायित्व बाहरी उपक्रमों को दिया जा रहा है जिससे बेहतर स्वच्छता और सेवा मिले।

नेटवर्क विस्तार, लोकोमोटिव कारखानों की स्थापना, रेल डिब्बों के अधिष्ठापन और स्टेशन पुनर्विकास में भी निजी निवेश किया जाएगा। हबीबगंज, नागपुर, ग्वालियर, अमृतसर और साबरमती स्टेशनों का पुनर्विकास भी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनर्शिप के तहत किया गया है।

अरुण कुमार दास रेलवे के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार हैं। संपर्क- akdas2005@gmail.com