भारती
घर समाधानों को अब तक अनदेखा किया लेकिन कोविड के बाद उन्हें स्वीकारना होगा

हर आपदा में हमारे सामने ऐसे मुद्दे खड़ी कर देती है जो पहले भी थे लेकिन रेखांकित होने योग्य नहीं थे और इसलिए संसाधनों को तुरंत आकर्षित नहीं कर पाते थे। कोविड-19 के साथ घर में जगह की समस्या उभरकर सामने आई है और अब प्राथमिकता पर इसका समाधान किया जाना चाहिए।

पहले समस्याओं को सूचीबद्ध करते हैं- कई सारे घर हैं जो बनकर तैयार हैं या निर्माणाधीन हैं लेकिन बिके नहीं हैं। कम आय वाले परिवारों या श्रमिकों (निर्माण, सेवा, फैक्ट्री और घरेलू) के लिए पर्याप्त घर नहीं हैं।

कम मूल्य वाले घर उन स्थानों पर बने जहाँ परिवहन के लिए शून्य इंफ्रास्ट्रक्चर व रोजगार के कोई अवसर न थे। और ग्रामीण आवास किसी की प्राथमिकता न थे।

कोविड के बाद ऐसे समाधान हैं जिनपर कार्य किया जा सकता है, हमारे पास जो वस्तुएँ हैं उन्हें पुनः प्रस्तावित करके वे चीज़ें प्राप्त की जा सकती हैं जिसकी हमारे पास कमी है- दो ऋणात्मकों से एक सकारात्मक परिणाम। हालाँकि यह कपोलकल्पना लग सकता है लेकिन ये मुश्किल से किए जाने वाले या महंगे विचार नहीं हैं।

किराए आवास

निर्माणकर्ताओं की समस्या को देखें- वे कर्ज़े में हैं क्योंकि घर बिके नहीं है और वे एक बेलआउट (राहत) की अपेक्षा कर रहे हैं। सरकार बिन बिकी हुई या अपूर्ण परियोजनाओं को खरीद सकती है और इसे किराया आधारित आवासीय स्थानों में परिवर्तित कर सकती है।

कर्मचारी इसमें रहें और उनके नियोक्ता घर किराए भत्ते (एचआरए) के रूप में सरकार को किराया दें, इसके कुछ अंश में शुरुआती महीनों में छूट दी जा सकती है (और बाद में नियोक्ता इसका भुगतान कर सकते हैं)।

निर्माणकर्ता को शुरुआती दो वर्षों के लिए रख-रखाव का दायित्व भी उठाना चाहिए और उनके इस प्रदर्शन के आधार पर ही उन्हें अंतिम भुगतान दिया जाएगा।

ऐसी खरीद निर्माणकर्ताओं को कर्ज़ से राहत दिलाएगी या उन्हें पुरानी परियोजनाएँ पूरा करने व नई परियोजनाएँ शुरू करने के लिए राशि प्रदान करेंगी। नियोक्ताओं को इस बात का संतोष रहेगा कि कर्मचारी उनके साथ ही रहते हैं, कर्मचारियों को रहने का स्थान मिलेगा और प्राधिकारी उनके स्वास्थ्य व कुशलता को सुनिश्चित कर पाएँगे जो कि निम्न स्तर के घरों में रहते हुए खतरे में रहती।

दूरस्थ घर

शहर से दूर स्थित घरों का अधिभोग चिंता का विषय रहने की बजाय शारीरिक दूरी की आवश्यकता होने के कारण कोविड के बाद एक अवसर बनेगा। आवश्यकता है ‘पूरा’ (ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाओं का प्रावधान) योजना पर पड़ी धूल झाड़कर वहाँ से कार्यबिंदु खोजने की।

पूरा परियोजना का चित्रात्मक विवरण

शुरू करने का एक तरीका हो सकता है कि सरकार परिवहन की व्यवस्था करे, जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) की तरह नहीं। सार्वजनिक परिवहन से यह भिन्न ऐसे होगा कि यह अधिक विशिष्ट होगा, इसका प्रबंधन समय और परिवहन भीड़ के अनुसार किया जा सकता है, साथ ही काम से आते-जाते समय कर्मचारियों की स्वास्थ्य जाँच भी की जा सकती है।

इससे यह होगी कि दूरस्थ बने घरों का उपयोग हो सकेगा और लोग रोजगार के लिए शहर की ओर आने-जाने के परिवहन में लोग स्वयं को सुरक्षित भी महसूस कर सकेंगे। ये घर सरकार के स्वामित्व पर होकर किराए पर दिए जा सकते हैं या निवासी ही घर के स्वामि हो सकते हैं यदि वित्त को उन तक पहुँचाय जाए।

घर के निकट काम

जिन स्थानों पर आवासविकसित हो चुका है लेकिन आसपास कोई इंफ्रास्ट्रक्चर या रोजगार के अवसर नहीं हैं, वहाँ सरकार को उद्योग विकसित करके रोजगार के लिए लोगों को आवागमन कम करने का प्रयास करना चाहिए।

हमें रोजगार केंद्रित पद्धति- यात्रा करें या काम के स्थान पर स्थानांतरित हो जाएँ- की बजाय व्यक्ति केंद्रित पद्धति अपनानी चाहिए- जहाँ लोग रहना चाहें, वहाँ रोजगार उत्पन्न किया जाए।

पहले बड़ी कंपनियाँ जिन स्थानों पर उपजती थीं वहाँ उन्हीं कंपनियों द्वारा आवासीय कॉलोनियाँ भी विकसित की जाती थीं। दक्षिण में दालमिया और जमशेदपुर में टाटा द्वारा बसाए गए कुछ कॉर्पोरेट शहरों के उदाहरण हैं।

जमशेदपुर

अब नियोक्ताओं के पास अपने कर्मचारियों के प्रति अतिरिक्त दायित्व नहीं हैं। और अब इसपर पुनर्विचार का समय आ गया है।

उदाहरण के लिए, क्या हम कंपनियों को मानव आपूर्ति शृंखला के लिए आवास, परिवहन और स्वास्थ्य सेवा, भोजन, शिक्षा आदि की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए कह सकते हैं?

समाधानों पर पुनर्विचार

नीति स्तर पर भी हमें समाधानों पर पुनर्विचार करना होगा। उदाहरण के लिए, आवास पर चर्चाएँ प्रायः मुख्य रूप से शहरी आवास चुनौतियों पर केंद्रित रहती हैं। लेकिन यह बढ़ते शहरीकरण और भविष्य के अनुमान के अनुसार आवश्यकता पूरी करने के लिए होता था। इसके फलस्वरूप और समस्याएँ खड़ी हुईं, अधिक पक्के घरों की कॉलनियाँ बनीं जिन्हें कम आय वाले परिवारों को ‘खरीदना’ था।

उल्टा प्रवासन जो कोविड के कारण हो रहा है, वह हमें शहरीकरण की चुनौती का सामना करने का दूसरा अवसर देगा। आवास के लिए समग्र विचार किए गए समाधानों पर काम करने की संभावना होगी क्योंकि नियंत्रित रूप से लॉकडाउन खुलेगा जो शहरी जनसंख्या की वृद्धि के बेहतर प्रबंधन का अवसर देगा।

ये सब जानकर हम यह कहने को आतुर होंगे कि लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों में ही रखना और गाँवों में आवास व्यवस्था को बेहतर करना एक बेहतर विकल्प है। लेकिन यह सोचना नासमझी होगी कि लोग गाँवों से बाहर नहीं जाना चाहेंगे। वे गाँव वापस इसके प्रति आकर्षण के कारण नहीं, बल्कि प्रवास स्थानों पर उचित व्यवस्था के अभाव में लौटे हैं।

बेहतर डिज़ाइन

छोटे स्तर पर हमें घरों के बेहतर डिज़ाइन की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, घर से काम करने का चलन शहर के लिए नया हो सकता है लेकिन कम आय वाले परिवारों के अधिकतर घरों में मवेशियों के लिए आश्रय होता है, बुनाई या कृषि प्रसंस्करण के लिए भी स्थान होता है।

भारतीय ग्रामीण घर में बुनाई करती महिला व पर्याप्त कार्यस्थल

लेकिन आजकल हम निर्माणकर्ताओं के मॉडलों को आगे बढ़ा रहे हैं जो सबके लिए एक समान होते हैं लेकिन किसी के कार्यस्थ्ल के योग्य नहीं, विशेषकर उन लोगों के लिए जो घर से ही जीविका कमाते हैं। इन डिज़ािनों पर पुनर्विचार का समय है और हम ग्रामों के जटिल मॉडल से कुछ सीख सकते हैं।

ऊँची इमारतों पर भी पुनर्विचार करें और उच्च घनत्व के कारण होने वाली समस्याओं को देखें। अगर माहामारी के समय लिफ्ट का उपयोग खतरनाक हो सकता है तो निवासियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? लॉकडाउन में अकेलापन भी एक समस्या है और ऐसे घरों ने इस संदर्भ में नुकसान ही पहुँचाया है?

फैले हुए मॉडल और भूमि से निकटतर समाधानों को भावी विकास कार्यों में विकल्प की तरह देखा जाना चाहिए, शहरों में भी।

नावाचार की भूमिका

समाधान देने में नवाचार और छोटे प्रदाता सहायता कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब सरकार किराए आधारित संपत्तियों का प्रबंध करेगी तब स्टार्टअप सेवा प्रदाता बन सकते हैं। सॉफ्टवेयर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ड्रोन, डाटा विश्लेषण समाधान और अन्य तकनीकी मंच व उत्पाद हो सकते हैं जो कम मूल्य पर निवासियों को सेवा प्रदान करें।

ये समाधान क्रियान्वयन में पारदर्शिता भी लेकर आएँगे। ऐसे ही परिवहन सेवाएँ भी राज्य चलाए ऐसा आवश्यक नहीं है, वाहनों को एमएफआई द्वारा वित्तपोषित कर छोटे खिलाड़ियों के माध्यम से चलवाया जा सकता है जो बेहतर सेवा और कार्यकुशलता के लिए नए तकनीकी साधनों को अपनाने का प्रयास करें।