भारती
ओमिड्यार सर्वेक्षण बताता है क्यों आधार के आलोचक अधिकांश रूप से गलत हैं

प्रसंग- सर्वेक्षण का संदेश सरल है- “माननीय, समावेशन के लिए धन्यवाद। लेकिन कृपया त्रुटियों को ठीक करें, और डाटा की सुरक्षा की गारंटी देने के लिए एक कानून लाकर हमें आश्वासन दें कि इसका दुरुपयोग कभी नहीं होगा।”

हाल ही में आधार की स्थिति पर ओमिड्यार नेटवर्क भारत द्वारा वित्त पोषित, दलबर्ग द्वारा संचालित सर्वेक्षण हमें दो निष्कर्षों तक ले जाता है। सबसे पहले तो कुलीन वर्ग द्वारा डराने-भड़काने के बावजूद गरीब एवं आम औरत आधार से मिलने वाले लाभों की सरहाना करने से  नहीं रुके। देश भर में 1,67,000 प्रतिभागियों वाले इस सर्वेक्षण ने स्पष्ट कर दिया है कि आधार ने समावेशन को काफी बढ़ा दिया है।

ओमिड्यार सर्वेक्षण का दूसरा निष्कर्ष यह है कि आधार की सर्वव्यापकता के बावजूद आधार प्रणाली में अभी भी कई मुद्दों को संबोधित करने की ज़रूरत है जैसे कि भौगोलिक कारकों के कारण अपवर्जित लोग, मोबाइल नंबर एवं पते में परिवर्तन और त्रुटियों को सुधारने में आने वाली कठिनाइयाँ और इस प्रणाली से जुड़ने के बावजुद कई कारणों से कुछ लाभार्थियों को प्रमाणित न कर पाना।

अवश्य ही मज़बूत कानूनों के माध्यम से गोपनीयता की चिंताओं को दूर किया जाना चाहिए लेकिन ओमिड्यार सर्वेक्षण से पूरी तरह स्पष्ट है कि आधार न केवल एक वस्तु है, बल्कि संभवत: भारतीय राज्य द्वारा राज्य क्षमता का निर्माण करने और सरकार द्वारा दिए गए लाभों को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की क्षमता का विस्तार करने के लिए किया गया सबसे बड़ा नवाचार है।

ओमिड्यार सर्वेक्षण से जुड़े प्रमुख पहलू मेरी टिप्पणियों के साथ निम्नलिखित हैं-

1. आधार अब सर्वव्यापी है, जिसमें 95 प्रतिशत वयस्क और 75 प्रतिशत बच्चों के पास आधार है। कुल मिलाकर आधार से जुड़े लोगों की संख्या 90 प्रतिशत से अधिक है। जिन 10.2 करोड़ लोगों के पास आधार नहीं है उनमें से ज्यादातर असम और मेघालय में रहते हैं, जबकि कुछ बेघर हैं। लेकिन यदि हम मान लें कि इन 10.2 करोड़ में से 7.5 करोड़ बच्चे हैं तो समझेंगे कि बहुत कम लोग अपवर्जित हैं और उन्गें जल्द ही समावेशित किया जा सकता है।

टिप्पणी- स्पष्ट रूप से, इस तथ्य के बावजूद कि आधार कई चीजों के लिए आवश्यक नहीं है परंतु राज्यों ने इसे पहचान और पता प्रमाण हेतु आवश्यक बना दिया है और अब यह सभी एजेंसियों में ​​मान्य है। आम आदमी के लिए यह सबसे आसान पहचान दस्तावेज है जिसका वह आसानी से उपयोग कर सकता है।

बच्चों को पंजीकृत करने के लिए प्रोत्साहन, जिन्हें वैसे भी एक बार फिर से पंजीकरण कराना ही पड़ता है जब उनके फिंगर-प्रिंट बेहतर तरह से परिभाषित होते हैं, वयस्कों की तुलना में स्पष्ट रूप से कम होता है।

आधार के लिए किसी बच्चे के लिए जा रहे फिंगर-प्रिंट

आधार से अधिकांश लोग असम (90 प्रतिशत) और मेघालय (61 प्रतिशत) से छूटे हैं, और असम में स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया के कारण ऐसा हुआ है जो अभी अधूरी है। चौंकाने वाली बात यह नहीं है कि 30 प्रतिशत बेघर लोगों के पास आधार नहीं है बल्कि चौंकाने वाली बात यह है कि 70 प्रतिशत बेघर लोगों के पास आधार है। यह एक बड़ी सफलता है।

2. आधार का सबसे कठिन भाग रिकॉर्ड अद्यतन (अपडेट) करना प्रतीत होता है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि आधार पर अपनी जानकारी अद्यतन करने का प्रयास करने वाले 33 प्रतिशत लोगों को ऐसा करने में कठिनाई हुई जबकि 4 प्रतिशत लोगों के पास अभी भी त्रुटियों के साथ आधार है। कुछ 15 प्रतिशत के पास सही पते के साथ आधार है लेकिन मोबाइल नंबर गलत है। एक बड़ी संख्या (39 प्रतिशत) का आधार मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ नहीं है।

टिप्पणी- नामांकन के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करने के बाद आधार पंजीकरण के इंफ्रास्ट्रक्चर को आसान बनाना एक कठिन पहलू है। इस प्रक्रिया को बैंकों और अन्य बिचौलियों पर स्थानांतरित करने, जो इस अतिरिक्त प्रयास से अधिक आय प्राप्त नहीं करते हैं, का अर्थ है कि दूर स्थानों पर रहने वाले लोगों के लिए कम ही पंजीकरण स्थान बचते हैं।

39 प्रतिशत लोगों के मोबाइल नंबर आधार से नहीं जुड़े हैं जिसकी वजह ग्रामीण क्षेत्रों में कम टेली-घनत्व (57 प्रतिशत, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के आँकड़ों के अनुसार) है। गलत नंबर होने का कारँ हाल के वर्षों में दूरसंचार उद्योग में बड़ा मंथन है जिसको फलस्वरूप 2016 के बाद से कई ग्राहकों ने कम लागत वाली जियो की सदस्यता ली।

सरकार को स्पष्ट रूप से आधार अद्यतन के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की आवश्यकता है क्योंकि एक बार जब आपके पास एक बड़ी आबादी है जो निरंतर स्थानांतरित होती है और फोन नंबर को नियमित रूप से बदलती है, अपडेशन की आवश्यकताएँ कई गुना बढ़ जाती हैं। दूर के स्थानों पर अस्थाई आधार केंद्रों के माध्यम से पहुँचा जा सकता है, जैसे हमारे पास अस्थाई अस्पताल और चिकित्सा सेवाएँ हैं।

3. आधार भारत का सबसे बड़ा समावेशन आविष्कर है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि लगभग आधे (49 प्रतिशत) लोगों ने आधार के उपयोग से पहली बार सेवाएँ प्राप्त कीं, 8 प्रतिशत के लिए आधार पहली आधिकारिक पहचान बना, 80 प्रतिशत से अधिक लोगों के लिए आधार के कारण सेवा प्राप्ति में आसानी हुई। आधार के कारण सिम कार्ड एक दिन में प्राप्त किए जा सकते हैं, जबकि अन्य पहचान पत्रों में अधिक समय लगता है।

टिप्पणी- ये आँकड़े नीति-निर्माताओं, आलोचकों और विश्लेषकों सभी लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। आधार की आलोचना केवल इसी तथ्य से काटी जा सकती है कि इसने आम लोगों तक सेवाओं की पहुँच बढ़ाकर समावेश में एक बड़ी क्रांति ला दी है।

इसके अलावा, इसकी सर्वव्यापकता को देखते हुए, आधार ने संभवतः उन व्यवसायों के लिए व्यवसाय करना आसान किया है, जिन्हें ग्राहक-को-जानें (केवाईसी) नियमों का पालन करने की आवश्यकता है। आधार के बिना करोड़ों ग्राहकों तक डिजिटल भुगतान सेवा का प्रसार असंभव था।

4. बहिष्करण दर छोटी है, लेकिन इसे जल्दी से संबोधित किया जाना चाहिए। सर्वेक्षण में कहा गया है कि आधार संबंधित मुद्दों के कारण 0.8 प्रतिशत लाभ से वंचित रहे और 1 प्रतिशत मनरेगा कार्ड धारकों को आधार त्रुटियों के कारण काम नहीं मिला। कुछ 0.5 प्रतिशत पेंशनभोगियों और 1.5 प्रतिशत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के उपयोगकर्ताओं को भी लाभ से वंचित रहना पड़ा। लेकिन, दूसरी तरफ, आधार के विफल होने के बावजूद कुछ 3.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं को उनके अधिकार का लाभ मिला।

टिप्पणी- बहिष्कार को कम संख्या में होने के कारण अनदेखा नहीं किया जा सकता है क्योंकि भारत में 1 प्रतिशत का अर्थ 13 लाख लोग है। स्पष्ट रूप से बाहर रखे गए लोगों को चेहरे की पहचान जैसी अतिरिक्त प्रौद्योगिकियों से सम्मिलित करने का प्रयास करना चाहिए। उम्मीद है कि प्रौद्योगिकी और बेहतर प्रणालियों के होने से आधार की त्रुटियों को दूर किया जा सकेगा।

रोचक तथ्य यह है कि 92 प्रतिशत आधार से संतुष्ट थे, यहाँ तक कि जिन 67 प्रतिशत सेवाओं से बाहर रखा गया था, उन्होंने भी कहा कि वे संतुष्ट हैं। दूसरे रूप से देखें तो वे राज्य को उसकी गलतियों के लिए माफ करने के लिए तैयार थे, शायद इसलिए क्योंकि उनका इरादा बहिष्कार नहीं था। आधार ने एक पहचान प्रदान की है, और यह छोटे मामलों में कभी-कभी विफलता से भी अधिक मायने रखता है।

5. क्या निजता आम औरत के लिए मायने नहीं रखती? ऐसा नहीं है। ओमिड्यार सर्वेक्षण में कहा गया है कि भले ही 72 प्रतिशत निवासी आधार के लाभों की सराहना करते हैं, लेकिन उनमें से आधे लोग इसे कई सेवाओं से जोड़ने के कारण चिंतित हैं। लगभग 90 प्रतिशत अपने आधार डाटा की सुरक्षा पर भरोसा करते हैं, लेकिन 8 प्रतिशत आधार के दुरुपयोग के बारे में चिंता करते हैं, और 2 प्रतिशत मानते हैं कि धोखाधड़ी के कारण आधार के बावजूद उन्हें लाभ से वंचित किया गया था।

टिप्पणी- सरकार और आधार चलाने वाले लोगों के लिए संदेश सरल है- “माननीय, समावेशन के लिए धन्यवाद। लेकिन कृपया त्रुटियों को ठीक करें, और डाटा की सुरक्षा की गारंटी देने के लिए एक कानून लाकर हमें आश्वासन दें कि इसका दुरुपयोग कभी नहीं होगा।” आधार की विफलता का सामने करने वाले लोगों की भरपाई करना अच्छी राजनीति होगी।

आर जगन्नाथन स्वराज्य के संपदकीय निदेशक हैं। वे @TheJaggi से ट्वीट करते हैं।