भारती
कई व्यवधानों से उभरकर आया नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा अब निर्माण के लिए तैयार

मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (सीएसएमआईए) की प्रति वर्ष यात्री संभालने की क्षमता सैद्धांतिक रूप से 5.5 करोड़ है, जो प्रभावी रूप से 4.8 करोड़ तक यात्रियों का ही प्रबंधन कर सकता है। यह सीमा पिछले वित्तीय वर्ष में ही पार हो चुकी है। 2018-19 में मुंबई हवाई अड्डे ने 4.88 करोड़ यात्रियों को संभाला था जिसमें 3.41 करोड़ घरेलू व 1.47 करोड़ अंतर्राष्ट्रीय यात्री थे।

इसी के चलते दो दशक से भी पहले नवी मुंबई में एक नए हवाई अड्डे की परिकल्पना की गई थी। और 2010 में इसकी संभाव्यता रिपोर्ट तैयार कर दी गई थी लेकिन किसी न किसी कारण से यह टलता रहा। कभी सरकारी इच्छाशक्ति में कमी, कभी पर्यावरण व्यवधान तो कभी भूमि अधिग्रहण में बाधा के कारण इसमें विलंब हुआ।

जुलाई के अंतिम सप्ताह में नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में लिखित बयान द्वारा बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने 1,160 हेक्टेयर के मुख्य हवाई अड्डा क्षेत्र की भूमि का अधिग्रहण कर उसे नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (एनएमआईएएल) को सौंप दिया है।

साथ ही 31 अगस्त को प्रतिष्ठित कंपनी एल एंड टी को हवाई अड्डे के लिए ईपीसी अनुबंध सौंप दिया गया है जिसके तहत कंपनी को अभियांत्रिकी, खरीद और निर्माण का कार्य करना होगा। इसके कार्यक्षेत्र में भूमि कटाव और भराव, आगमन व प्रस्थान हेतु टर्मिनल भवन, रनवे व टैक्सीवे समेत उड्डयन क्षेत्र का विकास, बहुस्तरीय कार पार्किंग और उपयोग व सहायक सुविधाओं का निर्माण होगा।

मुंबई हवाई अड्डे का संचालन करने वाले जीवीके समूह को ही 2017 में नवी मुंबई हवाई अड्डे के निर्माण के लिए चुना गया था और जनवरी 2018 में रियायती समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बाद पिछले वर्ष अगस्त में ईपीसी ठेकेदार के लिए टेंडर निकाला गया था जो अब एल एंड टी के खाते में जा चुका है।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और महाराष्ट्र सरकार मिलकर जीवीके के साथ पब्लिक प्राइवेट साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत इस हवाई अड्डे का निर्माण कर रहे हैं जिसमें जीवीके के पास इस परियोजना की 74 प्रतिशत इक्विटी है।

कुल 14,000 करोड़ रुपये की लागत वाले परियोजना के पहले चरण में लगभग 10,300 करोड़ रुपये दीर्घावधि ऋण द्वारा प्राप्त किए जाएँगे। एल एंड टी को दिए गए ठेके का मूल्य सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार यह लगभग 6,000 करोड़ रुपये का होगा।

विकास पूर्व कार्यों का दायित्व 26 प्रतिशत इक्विटी रखने वाले सिडको (नगर औद्योगिक विकास निगम) का था। जून 2017 से शुरू कर सिडको ने भूमि को निर्माण हेतु तैयार करने पर कार्य किया है। इसके तहत एक छोटी पहाड़ी को काटकर भूमि को समतल, दलदली भूमि को उपयुक्त और उलवे नदी का मार्ग परिवर्तन किया गया है।

सिडको के उपाध्यक्ष व प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्रा ने बताया कि इस मानसून से पूर्व 96 मीटर ऊँची पहाड़ी को काटा गया और उलवे नदी के लिए 3.2 किलोमीटर लंबा मार्ग परिवर्तन चैनल बनाने के साथ हाई टेंशन केबलों को भी भूमिगत किया गया।

केंद्रीय जल और ऊर्जा शोध केंद्र ने आसापास के गाँवों को बाढ़ से बचाने के लिए नदी मार्ग परिवर्तन का सुझाव दिया था। नदी के मार्ग को हवाई अड्डे के परिसर के बाहर से गुज़ारने के साथ-साथ इसके 60 मीटर अधिक चौड़ा भी कर दिया है ताकि जल स्तर तय सीमा से ऊपर न उठे।

इस परियोजना में निर्माण से पूर्व भूमि को 8.5 मीटर ऊँचा उठाने की आवश्यकता थी जिसमें से सिडको ने 5.5 मीटर तक भूमि स्तर को ऊँचा उठाने का कार्य कर दिया है और शेष एल एंड टी को करना होगा। परियोजना से प्रभावित 10 गाँवों के 2,600 परिवारों को पुनर्स्थापित करने का कार्य भी सिडको का ही था।

एल एंड टी से प्राप्त प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 3,700 मीटर लंबा दक्षिण रनवे बनाया जाएगा। यात्रियों हेतु टर्मिनल बिल्डिंग का डिज़ाइन ज़ाहा हदीद आर्किटेक्ट्स ने किया है और इसकी शुरुआती क्षमता प्रति वर्ष 1 करोड़ यात्रियों की होगी जिसे बाद में बढ़ाकर 2 करोड़ यात्रियों के लिए उपयुक्त बनाया जाएगा।

हवाई अड्डे का अभिन्यास

रनवे के 60 मीटर चौड़ा होने के कारण यह ए-380 जैसे बड़े विमान को भी समायोजित कर पाएगा, साथ ही बोइंग 748-9 को भी। रनवे उपयोग के उपयुक्त समय 50 सेकंड को क्रियान्वित करने के लिए रनवे से रैपिड एक्ज़िट की व्यवस्था होगी जिससे विमान जल्दी रनवे खाली कर पाएँ।

निर्माण कार्य हेतु स्थानीय रूप से उपलब्ध पदार्थों के उपयोग पर बल दिया जाएगा जैसे पनवेल क्रीक से प्राप्त रेत भूमि भरण के लिए काम में ली जाएगी और पहाड़ी को काटने से प्राप्त हुए पत्थरों का भी उपयोग किया जाएगा।

जैसा कि पिछले अंक में हमने जेवार हवाई अड्डे हेतु आवश्यक अतिरिक्त संयोजकता व्यवस्था पर बात की थी, वैसा ही नवी मुंबई हवाई अड्डे के साथ भी है। इसके तहत सीएसएमआईए और नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच 33.5 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन बनाई जाएगी।

लगभग 18,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह मेट्रो लाइन सीएसएमआईए से 8 किलोमीटर तक भूमिगत होगी और इसके बाद भूमि से ऊपरी स्तर पर चलेगी। 2021 तक इसके क्रियान्वित होने की अपेक्षा है।

रिपोर्ट की शुरुआत में जो हमने कुछ व्यवधानों की बात की थी, उसमें से पर्यावरण व्यवधान मुख्य रूप से मैन्ग्रोव के संरक्षित वृक्षों के कारण थे। 161 हेक्टेयर की मैन्ग्रोव कटाई के बदले में सिडको दहानु क्षेत्र में 350 हेक्टेयर मैन्ग्रोव लगाएगा। दूसरी ओर पहाड़ी की कटाई से भूमि स्थिरता प्रभावित नहीं होगी क्योंकि यह डेक्कन क्षेत्र में आता है।

आपातकालीन परिस्थितियों के लिए संकट प्रबंधन केंद्र, आपातकाल प्रतिक्रिया और संवाद केंद्र व आपातकाल संयोजन केंद्र होंगे। इसके अलावा मोबाइल कमांड पोस्ट होगी जो घटनास्थल से थोड़ी दूरी पर रहकर दिशानिर्देश देगी।

लागत की तुलना में फल न्यूनतम 12 प्रतिशत और अधिकतम 44 प्रतिशत अधिक मिलने का आँकलन किया गया है जो इस परियोजना को वित्तीय रूप से कुशल बनाता है। इस राजस्व का 12.6 प्रतिशत सिडको के साथ साझा किया जाएगा। अपेक्षा है कि यह परियोजना प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से कुल 3.42 लाख लोगों को रोजगार दे पाएगी।

भारत की आर्थिक राजधानी को इस परियोजना के पूरे होने के बाद कुछ वर्षों में तीसरे हवाई अड्डे की भी आवश्यकता होगी। वर्तमान में इस हवाई अड्डे पर विमान कब से आवागमन करेंगे, इस विषय विभिन्न अनुमान लगाए जा रहे हैं।

कार्य का संचालन कर रही जीवीके ने परियोजना से जुड़ी किसी भी अन्य जानकारी को उजागर करने से मना कर दिया है। एल एंड टी भी इससे बाध्य है लेकिन अगले कुछ माहों में हमें इस परियोजना की कार्य प्रगति और समय-रेखा का पता चल जाएगा। तब तक के लिए आशा करते हैं कि यह परियोजना शीघ्र ही मुंबई को अपनी सेवाएँ देना शुरू कर दे।