भारती
मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क परियोजना नहीं, विकास को राह से जोड़ने का साधन

सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला राज्य महाराष्ट्र इस दिशा में इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायता से और आगे बढ़ना चाहता है। यही कारण है कि महाराष्ट्र में कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं। एक ऐसी ही परियोजना है मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे जिसकी परिकल्पना समृद्धि महामार्ग के नाम से की गई थी।

शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार आजकल इन इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा और उनपर पुनर्विचार करती नज़र आ रही है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में मंत्री एकनाथ शिंदे के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे का नाम शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के नाम पर करने का निर्णय 11 दिसंबर को लिया।

संयोगवश देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली पिछली भाजपा-शिवसेना सरकार इस एक्सप्रेसवे का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने का विचार कर रही थी। हालाँकि उस समय भी शिवसेना ने बालासाहेब के नाम पर परियोजना की मांग की थी जो अस्वीकृत कर दी गई थी।

इस कैबिनेट बैठक में मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे परियोजना को राज्य की ओर से 3,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी देने के निर्णय के साथ-साथ परियोजनाओं पर काम कर रही एजेंसियों को स्टाम्प शुल्क से भी छूट दी गई। पुनर्विचार के बहाने हमें भी इस परियोजना की जानकारियाँ पाठकों के समक्ष रखने का अवसर मिला।

मुंबई को नागपुर से जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसेव 701 किलोमीटर लंबा और 8 लेन वाला होगा। यह 10 जिलों के 380 गाँवों को जोड़ेगा और इसका उद्देश्य केवल संयोजकता नहीं बल्कि मार्ग में आने वाले क्षेत्रों का विकास भी है जो परियोजना के दूसरे चरण का हिस्सा है। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच यात्रा में लगने वाले 15 घंटे के समय को यह महामार्ग घटाकर 8 घंटे कर देगा।

55,335 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना 24,500 करोड़ रुपये ऋण से प्राप्त करेगी व शेष राशि सरकार से। सरकारी सहायता के रूप में हाल ही में घोषित महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से मिलने वाले 3,500 करोड़ रुपये के अलावा 5,500 करोड़ रुपये सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से मिलने हैं। खनिजों के खनन पर 2,414 करोड़ रुपये की छूट, निर्माण काल के दौरान ऋण पर ब्याज में 6,396 करोड़ रुपये की छूट और 9,525 करोड़ रुपये की भूमि भी सरकारी सहायता में सम्मिलित है।

2021 तक पूरा करने के लक्ष्य के साथ इस परियोजना को 16 भागों में बाँटा गया है। जनवरी 2019 में सभी 16 भागों के लिए कुल 31,590 करोड़ रुपये के अनुबंध सौंप दिए गए थे। ये अनुबंध नियुक्त कंपनी को इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) का दायित्व सौंपते हैं।

मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स को पहले और नौवें भाग का दायित्व मिला है। पहला भाग नागपुर जिले में स्थित और 31 किलोमीटर लंबा है। नौवाँ भाग नागपुर के सड़क उद्गम स्थल से 390 किलोमीटर दूर औरंगाबाद जिले में स्थित है। यह भाग एक 85 मीटर के पुल के साथ 54.4 किलोमीटर लंबा होगा।

मुंबई आधारिक एफकॉन इंफ्रास्ट्रक्चर को दूसरा और 14वाँ भाग मिला है। 13.1 किलोमीटर लंबा 14वाँ भाग नाशिक और ठाणे के बीच एक छोटा सा भाग है लेकिन वर्धा जिले में स्थित 58.4 किलोमीटर लंबे भाग के कारण एफकॉन विवादों में आ गई है।

दरअसल कंपनी पर आरोप है कि मात्र 6 किलोमीटर के सड़क निर्माण के लिए एफकॉन ने 100 करोड़ रुपये की मूरम का अवैध खनन किया जबकि 3,220 करोड़ रुपये के अनुबंध के अनुसार सरकार मूरम के लिए भी पैसे देती है।

एक आरटीआई में पता चला कि इससे 37,917 वृक्ष भी नष्ट हुए व कई किसानों की भूमि प्रभावित हुई। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एफकॉन को आरोपियों की सूची में शामिल कर लिया है व जिला पुलिस अधीक्षक को 24 जनवरी तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

अमरावती जिले में स्थित परियोजना का तीसरा भाग 73.4 किलोमीटर लंबा है जिसका दायित्व एनसीसी लिमिटेड को मिला है। इस भाग पर एक रेलवे पुल और एक फ्लाइओवर के अलावा चार बड़े पुल भी होंगे।

चौथा भाग वाशिम जिले में स्थित है 54.4 किलोमीटर लंबा है। इसका अनुबंध पीएनसी इंफ्राटेक को मिला है। कुल 237.5 किलोमीटर लंबाई के कुल छह फ्लाइओवर और एक रेलवे पुल इस भाग पर होगा।

महाराष्ट्र की अन्य परियोजनाओं पर भी कार्यरत सद्भाव इंजीनियरिंग को 1,620 करोड़ रुपये का अनुबंध मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे के पाँचवे भाग के लिए मिला है। 42.9 किलोमीटर लंबे इस भाग में कुल 3.264 किलोमीटर लंबे 12 फ्लाइओवर व वायाडक्ट होंगे।

बुलढाणा जिले में स्थित 36.1 किलोमीटर लंबे छठे भाग का अनुबंध ऐपको इंफ्राटेक को मिला है। इस भाग में आधा किलोमीटर लंबा सिर्फ एक बड़ा पुल है। सातवें भाग पर रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कार्यरत है। 51.2 किलोमीटर लंबे इस भाग पर एक बड़ा पुल 245 मीटर लंबा होगा।

जालना में चल रहा वायाडक्ट का काम, साभार ट्विटर @sahil11p

42.7 किलोमीटर लंबे जालना जिले में स्थित आठवें भाग का अनुबंध आइरन टिंगल की झोली में गया है। इसपर दो फ्लाइओवर और दो बड़े पुल होंगे। औरंगाबाद जिले में स्थित 10वाँ भाग 57.9 किलोमीटर लंबा है जिसपर लार्सेन एंड टूब्रो काम कर रही है। 2,095 करोड़ रुपये के इस अनुबंध में चार बड़े पुल और एक रेलवे पुल शामिल होगा।

10वें भाग में सड़क निर्माण के लिए तैयार की गई भूमि

29.4 किलोमीटर लंबे 11वें भाग पर गायत्री प्रोजेक्ट्स काम अहमनगर जिले में काम करेगी। कुल 1.1 किलोमीटर लंबाई के चार बड़े पुल इस मार्ग में होंगे। दिलीप बिल्डकॉन को काम करने के लिए जो 45.6 किलोमीटर लंबा 12वाँ भाग मिला है, वह नाशिक जिले में है। यहाँ 1.26 किलोमीटर कुल लंबाई वाले सात बड़े पुल होंगे।

13वाँ भाग भी नाशिक में ही होगा जिसपर जीवीपीआर काम कर रहा है। 45.6 किलोमीटर लंबे इस भाग पर आधा किलोमीटर लंबा एक बड़ा पुल होगा। ठाणे जिले में स्थित 15वें और 16वें भाग क्रमशः 28 और 37 किलोमीटर लंबे हैं। इन दोनों भागों का दायित्व नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी को मिला है।

भूमि अधिग्रहण का कार्य जून 2019 में ही पूरा हो गया था जिसके बाद इन सभी कंपनियों ने निर्माण कार्य तेज़ी से शुरू कर दिया था। हालाँकि दिसंबर की शुरुआत में कुछ खबरें आई थीं कि नव-निर्वाचित महाराष्ट्र सरकार ने समीक्षा तक निजी कंपनियों को दी जाने वाली राशि रोक दी थी जो कार्य की प्रगति को धीमा करेगी।

हालाँकि कई जानकारों का मानना है कि मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं पर इस समीक्षा का कोई खास प्रभाव नहीं होगा व जैसे कार्य चल रहा है वैसे ही चलने दिया जाएगा।

सड़क निर्माण पूरा होने के बाद परियोजना का दूसरा चरण विकास की दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण होगा जिसमें 20 से अधिक कृषि समृद्धि केंद्र इस मार्ग पर विकसित किए जाएँगे। यहाँ कृषि आधारित उद्योगों और व्यवसायिक क्षेत्रों को फलन-फूलने का अवसर मिलेगा। लगभग 30-30 किलोमीटर की दूरी पर बसे इन केंद्रों में आधी भूमि रिहायशी इलाके के लिए होगी।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।