भारती
राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन क्या है जिसकी रूपरेखा मोदी सरकार ने तैयार की है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 2019 के स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा की थी जिसमें अगले पाँच वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 लाख करोड़ रुपये के निवेश की बात कही गई थी।

यह अप्रैल और मई 2019 में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घोषणापत्र में किए गए वादों में से एक भी था।

प्रधानमंत्री द्वारा घोषणा के बाद, इस निवेश की एक रूपरेखा तैयार करने के लिए वित्त मंत्रालय के भीतर एक कार्य बल का गठन किया गया था। वित्त मंत्रालय और नीति आयोग में आर्थिक मामलों और व्यय विभागों के अधिकारी इस कार्य बल का हिस्सा थे।

इस निकाय की रिपोर्ट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 31 दिसंबर 2019 को पेश की थी। नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) नामक यह रिपोर्ट, क्षेत्रीय निवेश योजनाओं को सारभूत करती है और इस निवेश के माध्यम से प्राप्त करने के लिए एक विशिष्ट मिशन की रूपरेखा प्रस्तुत करती है।

विवरणों को रेखांकित करने के अनिवार्य प्रयास के अलावा, रिपोर्ट वैश्विक मानकों को राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर में प्राथमिकता देते हुए सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के डिजाइन, विकास और रखरखाव को सुगम बनाने के तरीके भी प्रस्तुत करती है।

रिपोर्ट में एनआईपी महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिए विनियामक और प्रशासनिक सुधारों को सक्षम करने की आवश्यकता भी बताई गई है।

इस रिपोर्ट के तीन महत्वपूर्ण भाग हैं।

सबसे पहले, रिपोर्ट में पाँच विशिष्ट कारणों की पहचान की गई है कि क्यों भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर को एक बड़े बदलाव की आवश्यकता है। इन कारणों में शहरीकरण (2030 में शहरी क्षेत्रों में रहने वाली 42 प्रतिशत आबादी शामिल है, जो वर्तमान 31 प्रतिशत है), बढ़ती कार्य-आयु की जनसंख्या (2030 में अनुमानित 1.03 अरब कार्यबल), रोजगार में शहरी योगदान (पूरे का 41 प्रतिशत 2030 तक), सेवाओं पर आधारित अर्थव्यवस्था में बदलाव (वर्तमान 15 प्रतिशत से 8 प्रतिशत नीचे जाने के लिए कृषि का हिस्सा) और जलवायु परिवर्तन और आपदा लचीलापन।

बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता को पूरा करने वाले कारकों की विशिष्टता को अच्छी तरह से बताया गया है।

दूसरी  बात, एनआईपी का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में सम्मिलित बातों पर एक व्यापक दृष्टिकोण है। उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, खेल और पर्यटन जैसे सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों पर भी विशेष रूप से बात की गई है।

तीसरी  बात, प्रत्येक क्षेत्र के लिए वर्ष 2025 के लिए एक सामान्य दृष्टिकोण चित्रित किया गया है। इस दृष्टिकोण में न सिर्फ एनआईपी की अंतिम स्थिति बताई गई है, बल्कि यह भी बताया गया है कि इस क्षेत्र का शासन और प्रशासन कैसा होगा।

इन बिंदुओं को अब और 2025 के बीच आवश्यक नियामक सुधारों के लिए आधार बनाया जा सकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एनआईपी का पूर्ण लाभ मिले।

निम्नलिखित चार्ट एनआईपी का विभिन्न क्षेत्रों में ब्रेक-अप दर्शाता है। निवेश के पाँच क्षेत्रों- सड़क, शहरी आवास, रेलवे, बिजली और सिंचाई का निवेश योजना में 80 प्रतिशत से अधिक भाग है।

एनआईपी यह स्पष्ट करता है कि इस योजना में केवल केंद्र सरकार के नहीं, बल्कि राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र द्वारा किए गए निवेश भी शामिल है

राज्य सरकारों के निवेश और निजी क्षेत्र के निवेश को शामिल करने का मतलब यह नहीं है कि केंद्र सरकार अपने हिस्से को नहीं बढ़ाएगा।

वित्तीय वर्ष 2019 में भारत में इंफ्रस्ट्रक्चर पर कुल निवेश लगभग 10 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें से केंद्र सरकार ने 3.8 लाख करोड़ रुपये, राज्य सरकारों ने 3.7 लाख करोड़ रुपये और निजी क्षेत्र ने 2.5 लाख करोड़ रुपये निवेश किए।

अगले छह वित्तीय वर्षों में 100 लाख करोड़ रुपये खर्च का मतलब अभी भी अतिरिक्त 40 लाख करोड़ रुपये को जोड़ना है। संचयी छह साल का आँकड़ा वित्तीय वर्ष 2019 की रन रेट के आधार पर 60 लाख करोड़ रुपये का है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के लिए अतिरिक्त है।

निम्नलिखित आँकड़ा बताता है कि एनआईपी को किस तरह से वित्तपोषित किया जाएगा और भविष्य में तीन प्रकार के निवेशकों का अपेक्षित योगदान क्या होगा।

सेक्टर-विशिष्ट विवरण दिलचस्प हैं। शीर्ष पाँच क्षेत्रों में विधायी सुधारों और कार्यकारी निर्णयों के लिए स्पष्ट रूप से उल्लेखित आवश्यकता के साथ सभी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

ऊर्जा- भारत का उद्देश्य एनआईपी अवधि में 356 गीगावाट की वर्तमान स्थापित बिजली क्षमता को 619 गीगावाट तक ले जाना है। थर्मल प्रतिष्ठानों की हिस्सेदारी 66 फीसदी से घटकर 50 फीसदी रह जाने की उम्मीद है।

परमाणु ऊर्जा के लिए बताए गए निवेश दिलचस्प हैं। परमाणु ऊर्जा के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की योजना से भारत 15 गीगावाट तक की क्षमता को आसानी से जोड़ सकता है।

एनआईपी स्पष्ट रूप से वितरण में खुली पहुँच, नियमित शुल्क संशधन और स्मार्ट मीटर के उपयोग की बात करता है। ऊर्जा क्षेत्र को कुल निवेश का लगभग 24 प्रतिशत मिलेगा।

सड़कें- 19 फीसदी का निवेश इस क्षेत्र के लिए किया जाएगा। मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई में 50 प्रतिशत जोड़ने का लक्ष्य है और इसके साथ ही 12 गुना अधिक एक्सप्रेसवे के निर्माण का भी लक्ष्य है।

यह देखते हुए कि भारतमाला परियोजना ने पहले ही कुछ महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की पहचान कर ली है, ये लक्ष्य प्राप्य दिखता है।

इसके अतिरिक्त, सड़कों का स्वामित्व आज सार्वजनिक प्राधिकरणों की बजाय संपत्ति समूहकों और वित्तीय निवेशकों के पास अधिक रहेगा।

शहरी और आवास- यह प्रदर्शन परियोजनाओं के लिए एक बड़ा ध्यान देने वाला क्षेत्र है क्योंकि बढ़ता शहरीकरण ही एनआईपी का प्राथमिक चालक है। एनआईपी निवेश का लगभग 16 प्रतिशत शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और आवास कार्यक्रमों को चलाने की दिशा में जाएगा।

100 प्रतिशत शहरी और ग्रामीण घरों में पाइप द्वारा जलापूर्ति करना सरकार का लक्ष्य है। 100 प्रतिशत नगरीय कचरे के उपचारित होने की अपेक्षा है। 25 से अधिक शहरों को परिचालन मेट्रो परियोजनाएँ मिलेंगी। किफायती आवास परियोजनाएँ आकर्षण का केंद्र बनी रहेंगी।

रेलवे- रेलवे के लिए निजी क्षेत्र के बढ़ावे का दृष्टिकोण है। 30 प्रतिशत शुद्ध खेप खंड के साथ निजी क्षेत्र की मजबूत भागीदारी, 500 निजी यात्री रेलगाड़ियों और 750 स्टेशनों में से 30 प्रतिशत के निजीकरण का लक्ष्य है।

रेलवे निजी क्षेत्र से रेल के डिब्बे और इंजन भी लेगा। दो समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) पूरी तरह से चालू होंगे, जबकि पूर्व-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण, पूर्वी तट और दक्षिण-पश्चिम डीएफसी का निर्माण एनआईपी योजनाओं के तहत किया जाएगा।

रेलवे को भी उम्मीद है कि वह अपने नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण कर लेगा। कुल निवेश का 14 प्रतिशत रेलवे के लिए रखा गया है।

सिंचाई- इस क्षेत्र को कुल निवेश परिव्यय का लगभग 8 प्रतिशत मिलेगा। वर्तमान में सिंचाई से जुड़ी भारत की खेती योग्य भूमि 49 प्रतिशत है जिसे 61 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है।

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर उच्च निवेश किया जाएगा। प्रस्तावित सुधारों को लागू करने के लिए मात्रा-आधारित शुल्क के बारे में भी बात की जा रही है और यदि यह लागू हो जाता है तो वर्तमान पद्धति से एक बड़ी छलांग होगी।

इस भव्य दृष्टिकोण को साकार करने के लिए कार्य बल ने कई सामान्य सुधारों की पहचान की है।

एनआईपी यह मानता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदाी के प्रोत्साहन के लिए विधायी और नीतिगत रूपरेखा पारदर्शी होनी चाहिए। निजी क्षेत्र की निष्पादन क्षमता में भी सुधार की आवश्यकता है।

सरकार और निजी क्षेत्र के बीच कम से कम जोखिम में साझेदारी होना चाहिए, जिसके बिना सरकार कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ा सकती है। अनुबंधों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए जहाँ काफी बहस और बहुत कार्य बाकी है।

विवाद की समाधान प्रणाली को अधिक कुशल होना चाहिए। न्यायिक प्रक्रियाएँ वर्षों तक नहीं चल सकतीं हैं क्योंकि इससे निवेश हतोत्साहित होता है और संबंधित सभी पक्षों को बड़ी मौद्रिक लागत लगती है।

इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण को नुकसान न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए भारत को पुनर्जीवित अनुबंधों और क्रेडिट बाज़ार की भी आवश्यकता होगी।

नगरपालिका अनुबंध बाज़ार की कोशिश की गई थी लेकिन वह बड़े पैमाने पर नहीं चला। यह परिवर्तन आवश्यक होगा ताकि राज्यों की एनआईपी में भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

संपत्ति के मुद्रीकरण को भी पुनर्जीवित करना होगा। सड़क परिवहन मंत्रालय को अपने टोल संचालन हस्तांतरण मॉडल के साथ कुछ सफलता मिली है, लेकिन सड़क की नीलामी प्रक्रिया लंबे समय की है। इन्विट और आरईआईटी आशाजनक हैं, लेकिन अभी तक बड़े पैमाने पर काम नहीं कर पाए हैं।

एनआईपी भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण लाता है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

लेकिन इसकी सफलता प्रशासनिक सुधार, वित्तीय सफलता, न्यायिक सुधार व हस्तक्षेप और सामान्य प्रशासन सुधार सहित कई कारकों पर निर्भर करेगी।

राज्यों को एनआईपी लक्ष्यों को प्राप्त करने में केंद्र सरकार को पूरा समर्थन देना होगा और कुछ भी छुपाना नहीं चाहिए। संघीय ढाँचे के वातावरण को देखते हुए इसे अभी तक निश्चित नही माना जा सकता है।

भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी जैसे अस्पष्ट मुद्दों से राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रमुख परियोजनाओं की लागत बढ़ी है और उनमें देरी भी हुई है। इन दोनों मुद्दों को सुलझाने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा, और शीघ्र ही।

निवेश की कुछ धारणाओं पर भी पुनर्विचार करना होगा, विशेषकर बिजली क्षेत्र में। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ सुधारों को किसी पूर्ववर्ती क्षमता वृद्धि से भी अधिक होना होगा।

यदि विधायी प्रक्रिया लंबी और कठिन होगी तो राज्यों को वितरण सुधारों के माध्यम से आगे बढ़ना मुश्किल होगा। इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाए बिना एनआईपी का 24 प्रतिशत भाग अनिश्चित रहेगा।

लेकिन कुल मिलाकर एनआईपी अभी भी एक सराहनीय प्रयास है, केवल इसके वृहद दृष्टिकोण के लिए। कार्य बल भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए सतत विकास समेत जटिल और नरम इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकताओं को जोड़ पाया यही इसे विश्वसनीय बनाता है।

मुख्य मंत्रालयों को इस महत्वाकांक्षा के साथ कदम मिलाकर चलना होगा और एनआईपी को सफल बनाने के लिए व्यापक सुधार के साथ-साथ मानसिकता में भी व्यापक सुधार दर्शाना होगा।

आशीष चंदोरकर सार्वजनिक नीतियों, राजनीति और सम-सामयिक विषयों पर लिखते हैं। वे @c_aashish द्वारा ट्वीट करते हैं।