भारती
मेट्रो रेल परियोजना लक्ष्य कर रही है इन आठ टियर-2 शहरों पर

कोलकाता और दिल्ली के बाद भारत के मेट्रो मानचित्र पर 11 और शहर आए हैं- चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, लखनऊ, जयपुर, गुरुग्राम, मुंबई, नोएडा, अहमदाबाद, नागपुर और कोच्चि।

पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने मेट्रो नेटवर्क के विस्तार हेतु प्रयास दोगुने कर दिए हैं। 2015-18 के काल में मेट्रो परियोजनाओं के लिए आवंटित 42,696 करोड़ रुपये, 2012-15 के काल में आवंटित 16,565 करोड़ रुपये से ढाई गुना हैं।

इसके फलस्वरूप, भारत में क्रियान्वित मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई 700 किलोमीटर हो गई है। मेट्रोपॉलिटन शहरों के मेट्रो मानचित्र पर उतर जाने के बाद अब केंद्र और राज्य सरकारें टियर-2 शहरों की ओर रुख कर रही हैं।

इन शहरों में जनसंख्या बढ़ने से पहले रैपिड ट्रांसपोर्ट आज कम लागत पर बन सकता है क्योंकि एक बार शहर के फैलाव के बाद इस प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना कठिन हो जाता है। निम्न टियर-2 शहरों में जल्द ही मेट्रो क्रियान्वित होगी-

गोरखपुर मेट्रो

प्रस्तावित मेट्रो परियोजनाओं की सूची में हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ गोरखपुर जुड़ा है। इस परियोजना हेतु विवरणात्मक रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है।

लाइट रेल परिवहन प्रणाली के तहत बनाई जाने वाली इस परियोजना की लागत 4,100 करोड़ रुपये होगी। नियोजन 2041 की अनुमानित जनसंख्या के आधार पर किया गया है। जनसंख्या वर्तमान में 14 लाख से बढ़कर 23 लाख हो जाएगी।

इसका क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल निगम करेगा और इसमें दो गलियारों- उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व और उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम- व 27 स्टेशनों के होने की संभावना है।

कानपुर मेट्रो

केंद्र सरकार ने फरवरी 2019 में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र कानपुर हेतु मेट्रो की स्वीकृति दी थी। इसे क्रिन्वित करने वाली लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने निर्माण कार्य के लिए अनुबंध देना शुरू कर दिया है।

अभी तक कानपुर मेट्रो में तीन गलियारों का विचार किया गया है। 24 किलोमीटर लंबा पहला गलियारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान को राष्ट्रीय राजमार्ग 34 स्थित नौबस्ता से जोड़ेगा। इस गलियारे का 15.1 किलोमीटर भाग जहाँ भूमि से ऊपरी स्तर पर होगा, वहीं 8.6 किलोमीटर लंबा भाग शहर के व्यस्त क्षेत्रों को ट्रैफिक से बचाने के लिए भूमिगत होगा।

मवइया स्थित कानपुर हवाई अड्डे के नए टर्मिनल को सेंट्रल रेलवे स्टेशन और शहर के अन्य स्थानों से जोड़ने के लिए भी एक नई लाइन पर विचार किया जा रहा है। इस लाइन पर भी भूमिगत और भूमि से ऊपरी स्तर के भाग होंगे।

इस माह की शुरुआत में ऐफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने पहले चरण में नौ मेट्रो स्टेशनों के निर्माण का 700 करोड़ रुपये का अनुबंध जीता। अक्टूबर 2019 से इस परियोजना पर संभवतः कार्य शुरू हो जाएगा।

आगरा मेट्रो

शहर की बढ़ती जनसंख्या के साथ आगरा मेट्रो की आवश्यकता महसूस हुई। वर्तमान में शहर की जनसंख्या 24 लाख है। यूनेस्को के तीन विश्व विरासत स्थलों- ताज महल, आगरा का किला और फतेहपुर सीकरी- के होने के कारण यह पर्यटन का केंद्र भी रहा है।

14 किलोमीटर लंबा पहला गलियारा सिकंदरा से ताज के पूर्वी द्वार तक जाएगा। इस गलियारे का 6.3 किलोमीटर लंबा भाग भूमि से ऊपर व 7.6 किलोमीटर लंबा भाग भूमिगत होगा। दूसरा गलियारा आगरा कैंटोनमेंट से कालिंदी विहार जाता हुआ 15.4 किलोमीटर लंबा होगा।

जहाँ पहले गलियारे के 13 स्टेशनों में से छह भूमि से ऊपरी स्तर और सात भूमिगत स्तर पर होंगे, वहीं दूसरे गलियारे के सभी 14 स्टेशन भूमि से ऊपरी स्तर पर ही होंगे। दोनों गलियारे मिलकर ताज महल, आगरा का किला, हींग की मंडी और जामा मस्जिद जैसे पर्यटन स्थलों को जोड़ने में सक्षम होंगे।

आगरा मेट्रो परियोजना की लागत 8,415 करोड़ रुपये होगी। वर्तमान योजनानुसार केंद्र और राज्य दोनों की 20-20 प्रतिशत की इक्विटी होगी व शेष राशि ऋण द्वारा प्राप्त की जाएगी। प्राथमिक कार्यों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने बजट में इस परियोजना हेतु 175 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।

सूरत मेट्रो

गुजरात सरकार द्वारा 2017 और केंद्र द्वारा 2019 में स्वीकृत यह परियोजना शहर के बाहरी क्षेत्रों के साथ सूरत नगर निगम क्षेत्र में आने वाले 40 लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभ पहुँचाएगी।

पहले चरण में दो गलियारे होंगे। सार्थना से ड्रीम सिटी जाने वाले 21.6 किलोमीटर लंबे गलियारे पर सार्थना, नेचर पार्क, कपोदरा, लभेश्वर चौक और केंद्रीय गोदाम सहित 20 स्टेशन होंगे। 14 स्टेशनों के साथ 15.1 किलोमीटर भाग भूमि से ऊपर और छह स्टेशनों के साथ 6.7 किलोमीटर लंबा भाग भूमिगत स्तर पर होगा।

दूसरा गलियारा बेसन से सरोली को जोड़ता हुआ 18.7 किलोमीटर लंबा होगा। पूरी लंबाई पर स्थित 18 स्टेशन भूमि से ऊपरी स्तर पर होंगे। उगट वारीग्रुह, पालनपुर रोड, एलपी सावनी स्कूल, अदाजान गम, मछलीघर और मजूरागेट इस मार्ग के प्रमुख स्टेशन होंगे।

इस परियोजना का क्रियान्वयन गुजरात मेट्रो रेल निगम करेगा। परियोजना के प्रथम चरण की लागत का अनुमान 12,114 करोड़ रुपये लगाया गया है।

पटना मेट्रो

2014 में बिहार सरकार द्वारा स्वीकृत पटना मेट्रो रेल परियोजना राज्य की पहली रैपिड परिवहन प्रणाली होगी। 2018 में गठित पटना मेट्रो रेल निगम लिमिटेड इस परियोजना को क्रियान्वित करेगी। 2019 में केंद्र द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद अगले पाँच वर्षों में प्रथम चरण पूरा किया जाएगा।

पहले चरण में दो गलियारे होंगे। 16.9 किलोमीटर लंबा पहला गलियारा सगुना मोड़, बेली रोड और पटना जंक्शन से होता हुआ दानापुर को मीठापुर बस स्टैंड से जोड़ेगा। इस भाग में राजा बाज़ार, गोल्फ क्लब, पटना चिड़ियाघर, विश्वेश्वरैया भवन और विद्युत भवन समेत 12 स्टेशन होंगे। ट्रैफिक जाम से बचने के लिए 11.2 किलोमीटर लंबे भाग को भूमिगत बनाया जाएगा।

दूसरा गलियारा अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल को राजेंद्र नगर से होते हुए गांधी मैदान से जोड़ेगा। यह 14.4 किलोमीटर लंबा होगा व इसमें 12 स्टेशन होंगे। उत्तर से दक्षिण दिशा में चलने वाला 9.9 किलोमीटर लंबा भाग भूमिगत होगा।

परियोजना के पहले चरण में 13,300 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केंद्र व राज्य 20-20 प्रतिशत वित्त देंगे व शेष 60 प्रतिशत की पूर्ति जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी करेगी। अगले छह माह में निर्माण कार्य के शुरू होने की अपेक्षा है।

मेरठ मेट्रो

उत्तर प्रदेश सरकार ने आगरा व कानपुर रैपिड परिवहन परियोजनाओं के साथ ही 2018 में मेरठ मेट्रो की स्वीकृति भी दी थी। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल परिवहन प्रणाली (आरआरटीएस) पर ध्यान दिए जाने के कारण 2017 में इसे स्थगित कर दिया गया था। विवरणात्मक परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र को 2018 में सौंपी गई थी।

प्रस्तावित परियोजना की पहली लाइन का विलय दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस परियोजना के साथ कर दिया गया है। मोदीपुरम और मेरठ दक्षिण को जोड़ने वाले 18 किलोमीटर लंबे गलियारे पर 12 स्टेशन होंगे। आरआरटीएस इंफ्रास्ट्रक्चर पर मेट्रो बनाए जाने से 6,300 करोड़ रुपये की बचत की जा सकेगी।

ब्रह्मपुरू, मेरठ सेंट्रल, भैसली और बेगमपुल जैसी घनी आबादी वाले क्षेत्र के अलावा मेट्रो का अधिकांश भाग भूमि से ऊपरी स्तर पर ही बनाया जाएगा।

नाशिक मेट्रो

अगस्त 2019 में स्वीकृत नाशिक मेट्रो भारत की पहली रबर के टायर वाली मेट्रो होगी। 2,100 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना के पहले चरण में दो ट्रैक-विहीन गलियारे शहर में विकसित किए जाएँगे।

पहला गलियारा पश्चिम में श्रीमिक नगर को पूर्व में नाशिक रोड रेलवे स्टेशन से जोड़ेगा। 22.5 किलोमीटर लंबे इस गलियारे पर 20 स्टेशन होंगे। 10.5 किलोमीटर लंबा दूसरा गलियारा गंगापुर और मुंबई नाका को जोड़ेगा।

नाशिक मेट्रो में तीव्र गति रबर टायर वाली अर्बन ट्रैम प्रयुक्त की जाएगी। यह ऊपर से गुज़रने वाले विद्युत केबल से ऊर्जा पाएँगे। इनकी अच्छी बात यह है कि ये ट्रैम भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में 25 किलोमीटर तक बैटरी में संचित ऊर्जा से चल सकती हैं।

बैटरी खत्म होने के बाद इन ट्रैमों को पुनः निर्धारित गलियारों पर लौटना होगा। इस प्रकार के ट्रैम अन्य देशों में प्रचलित हैं। इस प्रणाली का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि नाशिक में आम मेट्रो कुशल नहीं होती।

आम मेट्रो तब लागू की जानी चाहिए, जब व्यस्त घंटे में कम से कम 20,000 यात्री सफर करने वाले हों। वहीं, नाशिक में व्यस्त घंटे की यात्री संख्या 8,000 अनुमानित की गई है।

श्रीनगर मेट्रो

2020 से श्रीनगर मेट्रो पर कार्य शुरू होने की अपेक्षा है। यह एक लाइट मेट्रो परिवहन प्रणाली होगी, जिसकी अनुमानित लागत 5,000 करोड़ रुपये है। श्रीनगर मेट्रो के पहले चरण में 12-12 स्टेशन दो लाइनों पर होंगे।

12.5 किलोमीटर लंबी पहली लाइन एचएमटी (शालतेंग) को शहर के इंद्रा नगर से जोड़ेगी, जो भारतीय सेना के 15 कॉर्प्स मुख्यालय से अधिक दूर नहीं है। इस मार्ग पर पारिमपोरा, कमरवाड़ी, गज़रज़ू, बातमालू और लाल चौक पर स्टेशन होंगे।

दूसरी लाइन भी 12.5 किलोमीटर लंबी ही है। यह भाग हज़रतबल क्रॉसिंग, सौरा, शेर-ए-कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान और नलबल पुल क्षेत्र से गुज़रते हुए ओसमानाबाद और हज़ूरी बाग को जोड़ेगा। दोनों ही गलियारे भूमि से ऊपरी स्तर पर होंगे।

मानचित्र साभार- https://themetrorailguy.com