भारती
किसी व्यक्ति की हर योग्यता एक तरफ और प्रभावशाली भाषण की कला एक तरफ- कुरल

प्रसंग- श्रृंखला के 31वें भाग में पढ़ें प्रभावित करने की कला पर 19 जुलाई 1969 के स्वराज्य अंक में प्रकाशित तिरुवल्लुवर के चयनित कुरलों का हिंदी अनुवाद।

तिरुवल्लुवर बताते हैं कि सफल सभासद बनने के लिए अभिव्यक्ति सामर्थ्य होना चाहिए। प्रभावशाली वक्तव्य और सभासदों के विषय में जो कुरल लिखे गए हैं, वे दर्शाते हैं कि सभाओं में निर्णय वाद-विवाद के बाद लिए जाते थे।

1. किसी व्यक्ति की हर योग्यता एक तरफ और प्रभावशाली भाषण की कला एक तरफ।

2. सभासदों को अपने शब्दों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि वे राज्य की समृद्धि बढ़ा सकते हैं, अथवा घटा सकते हैं।

3. अच्छा वाचन क्या है? यह ऐसा होना चाहिए जो आपसे सहमत लोगों को आपसे बांधकर रखें और जो आपसे सहमत हैं उनके लिए भी सुखद होना चाहिए।

4. इतना सोचकर बोलें कि आपके द्वारा कहे कथन का खंडन विपक्ष न कर सके।

5. जिन्हें संबोधित कर रहे हैं यदि उन्हें समझ आने वाली बात न बोलें तो सदाचार और सांसारिक अच्छे काम उसकी पूर्ति नहीं कर सकते हैं। अपने श्रोताओं की क्षमता के अनुसार बोलें।

6. सुखदायक बात कहें और विरोधी पक्ष के भी अच्छे विचारों का स्वागत करें। यही अच्छे सभासदों का आचरण है।

7. किसी वाद-विवाद में एक सभासद को दुर्जेय बनाता है उसका समझाने का तरीका, स्मरण-शक्ति और निर्भीकता।

8. उस सभासद का अनुसरण पूरा विश्व करता है जिसकी बात में वज़न और सुसंबद्धता व भाव में मधुरता हो।

9. सिर्फ वे लोग जो कम शब्दों में सही रूप से अपनी बात रखना नहीं जानते अधिक बोलते हैं।

10. कुछ फूल होते हैं जो बहुत खिलते हैं लेकिन महकते नहीं हैं। ऐसे ही वे लोग होते हैं जो ज्ञानवान हैं लेकिन ज्ञान को अभिव्यक्त करने की कला पर पकड़ नहीं है।

अगले अंक में जारी…

पिछला भाग- गुप्तचर और अच्छे मंत्री के गुण व कौशल बताते तमिल कवि तिरुवल्लुवर के कुरल भाग- 30