भारती
कुरल भाग 9- करुणा विहीन व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलने में असमर्थ होता है

भाष्यकारों के अनुसार कुरल के 25 से 38 तक के अध्याय, जहाँ से ये कुरल लिए गए हैं, तपस्वी और मठवासी जीवन के लिए विशेष महत्त्व की बात करते हैं। जब कुरल लिखे गए थे, तब दक्षिण में जैन व बौद्ध धर्म का पालन करने वाले अधिकांश लोग वैराग का संकल्प लिया करते थे व मठों में रहा करते थे। इसलिए कुरल को समग्र पुस्तक बनाने के लिए मठवासी जीवन के लिए विशेष अध्याय दिए जाने वैध थे।

लेकिन हम इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते हैं कि ये अध्याय सिर्फ इसी उद्देश्य से दिए गए थे। इन अध्यायों में कही गई बातें गृहस्थों पर भी लागू होती हैं। भगवत गीता की तरह ही तिरुवल्लुवर भी मानते हैं कि व्यवहार में विरक्ति ही वैराग्य का तत्व है और मोक्ष प्राप्ति के लिए सन्यास लेना आवश्यक नहीं है, अगर वह जानता है कि सामान्य जीवन में कर्तव्यों का निर्वहन कैसे करना है, विरक्ति और समभाव के साथ।

करुणा

संसार के अलग-अलग धर्म अलग-अलग पाठ पढ़ाते हैं लेकिन हर धर्म में आप पाएँगे कि करुणा ही वह माध्यम है जो व्यक्ति को अध्यात्म से जोड़ती है। इसका पालन करें।

तमिल शब्द अरुल  का अर्थ है सभी प्राणियों से वैसा ही प्रेम जैसा आप अपने संबंधियों से करते हैं।

आत्मा को हानि पहुँचाने वाले दोष उस मनुष्य को छोड़ देते हैं जो हर प्राणि को प्रेम भाव से देखता है।

इस संसार में प्रसन्नता भी भौतिक वस्तुओं पर निर्भर करती है लेकिन करुणा ही वह भाव है जिसपर इस संसार के बाद आपकी प्रसन्नता निर्भर करती है।

जो भौतिक वस्तुओं को खो चुके हैं, वे उन्हें फिर से प्राप्त कर सकते हैं लेकिन उनके लिए कोई आशा नहीं बचती जो करुणा भाव को खो चुके हैं।

धन को खोकर पुनः पाया जा सकता है लेकिन अच्छाई को खोना एक अपूरणीय क्षति है।

क्या जिसके हृदय में करुणा नहीं है, वह अन्य साधनों से धर्म के मार्ग पर चल सकता है? ये उसी प्रकार असंभव है जैसे किसी नासमझ द्वारा अध्यापन।

ज्ञान प्राप्ति के लिए समझ का होना आवश्यक है, उसी प्रकार अच्छाई के मार्ग पर चलने के लिए करुणा का होना आवश्यक है।

यदि कोई व्यक्ति उनके प्रति क्रूर होता है जिनसे वह बलशाली है तो उसे अपने से बलशाली व्यक्ति के समक्ष गिड़गिड़ाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

हम लोगों को तब तक वह पीड़ा महसूस नहीं करा सकते जो वे दूसरों को देते हैं जब तक किसी और के द्वारा उन्हें दी गई पीड़ा का स्मरण न कराया जाए।

अगले अंक में जारी…