भारती
कोच्चि जल मेट्रो कैसे शहर को परिवहन संकट से छुटकारा दिला सकती है

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले माह 819 करोड़ रुपये की लागत वाली कोच्चि जल मेट्रो को मंजूरी दी है जो देश में इस प्रकार की पहली परिवहन परियोजना होगी। ग्रीन पैनल के परामर्श पर इस परियोजना को पर्यावरण की दृष्टि से हरी झंडी मिली है।

जल मेट्रो परियोजना का उद्देश्य कोच्चि के आसपास के द्वीपों को मुख्य भूमि से जोड़ना है। इस परियोजना को कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (केएमआरएल) द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा।

5 दिसंबर को केरल सरकार की केएमआरएल और जर्मनी की फंडिंग एजेंसी केएफडब्ल्यू के बीच एख अनुबंध पर हस्ताक्षर हुए जिसके तहत जल मेट्रो परियोजना को 740 करोड़ रुपये (18 करोड़ यूरो) का अनुदान मिलेगा। इस अनुदान का उपयोग प्रशिक्षण व क्रियान्वयन एवं रखरखाव के साधन विकसित करने हेतु किया जाएगा।

जल मेट्रो परियोजना तेज़ी से आगे बढ़ रही है। केएमआरएल ने हॉलैंड के एंटेआ नीदरलैंड बीवी तथा यूनीहोर्न को अवधारणा डिज़ाइन व विवरणात्मक डिज़ाइन और एकीकृत शहरी पुनर्विकास एवं जल परिवहन प्रणाली (आईयूआरडब्लयूटीएस) परियोजना की सलाहकार सेवाएँ ली जाएँगी। ये कंपनियाँ कोच्चि शहर की नहरों के पुनरोद्धार में भी भूमिका निभाएँगी।

पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन की बढ़ती समस्याओं ने जलमार्ग में निवेश करने और क्षेत्र में संयोजकता बढ़ाने के लिए फिर से रुचि बढ़ाई है।

अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर भारतीय अनुसंधान परिषद (आईसीआरआईईआर) की रिपोर्ट के अनुसार कोच्चि शहर की विशेषता यह है कि कोच्चि में नदियाँ और नहरें बैकवॉटर (पश्च जल) से जुड़ी हुई हैं।

कोच्चि शहर नदी के एक जटिल मुहाने में स्थित है जिसमें वेम्बनाड झील और पेरियार व मुवत्तुपुझा जैसी झील में बहने वाली नदियाँ शामिल हैं। शहर की भूमि का एक बड़ा हिस्सा बांध, नदियों और बैकवॉटर की पानी रूपी चादर से ढका हुआ है।

कोच्चि का मानचित्र

इस प्रकार, एक जल परिवहन प्रणाली बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल कई लाभ प्रदान कर सकती है, बल्कि यातायात का एक ऐसा संसाधन बनेगी जिसका विकास, प्रबंधन और रखरखाव कम लागत से पूरा किया जा सकता है।

आईसीआरआईईआर का कहना है कि अंतर्देशीय जलमार्ग बनाने की लागत चार-लेन हाईवे बनाने के खर्च का केवल 5-10 प्रतिशत है। रखरखाव लागत भी एक राजमार्ग की तुलना में का पाँचवाँ हिस्सा है।

केरल की वित्तीय राजधानी अनियोजित विकास की समस्याओं का सामना कर रही है और 1981 में जल परिवहन का हिस्सा 23.4 प्रतिशत था जो अब घटकर काफी कम हो गया है।

जीडीपी में सबसे अधिका भागीदारी रकने वाली कोच्चि में सबसे अधिक औद्योगिक इकाइयाँ भी हैं जिस कारण प्रतिदिन कोच्चि जाने वाले लोगों में से कम से कम 50 प्रतिशत लोग रोज़गार के लिए जाते हैं। इनमें से कुछ कम से कम 25 किलोमीटर दूर से आते हैं।

जबकि बसें परिवहन का सबसे पसंदीदा साधन है, संकीर्ण सड़कें और भीड़भाड़ के परिणामस्वरूप औसत यात्रा के लिए एक घंटे से अधिक का समय लग जाता है। इसी संदर्भ में कोच्चि का जलमार्ग परिवहन एक वैकल्पिक साधन प्रस्तुत करते हैं। इसकी मदद से सड़कों पर भीड़ को कम किया जा सकता है और यह यात्रा के समय को भी काफी कम कर सकता है।

वर्तमान में केरल राज्य जल परिवहन विभाग कुछ निजी चालकों के साथ पश्चिमी तटीय क्षेत्रों को शहर से जोड़ने वाले मार्ग पर कुछ फेरों को संचालित करता है। लेकिन यह मुश्किल से शहर की 3 प्रतिशत यातायात आवश्यकता को ही पूरा कर पाता है।

केएमआरएल की एक बैठक

केएमआरएल के कारण सड़क परिवहन का मात्र 30 प्रतिशत ही मेट्रो रेल के उपयोग से कम होगा पर यह घनी आबादी वाले द्वीपों तक विस्तृत नहीं है जिसके कारण बड़ी संख्या में अंतर-शहर यात्रा सड़क के माध्यम से ही होगी।

यही वह क्षेत्र है जहाँँ जल मेट्रो परियोजना क्रॉस-मॉडल संयोजकता प्रदान करने के लिए केएमआरएल के साथ मिलकर काम कर सकती है। इससे 1 लाख लोगों के लाभान्वित होने की अपेक्षा है।

जल मेट्रो को लिए 10 द्वीपों को जोड़ने के लिए 38 जहाज़ गोदाम और 16 मार्गों की पहचान की गई है। इस नेटवर्क की कुल लंबाई 76 किलोमीटर होने की संभावना है।

कुल 78 तेज़, ईंधन कुशल और वातानुकूलित नाव लाए जाएँगे। प्रस्तावित 38 जेटी (घाटों) में से 18 मुख्य नौका केंद्र होंगे और अन्य 20 को आवाजाही के लिए छोटी जेटियों के रूप में विकसित किया जाएगा।

इसके अलावा, इन्फोर्मेशन पार्क, वडूथला, नजारैकल, मुलवुकद, व्यू पॉइंट और एम्बार्केशन जेट्टी में केएमआरएल की सामाजिक पहल के तहत सात टर्मिनल विकसित किए जाएँगे। इसके लिए 9.51 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है।

परियोजना को दो चरणों में लागू करने की योजना है। दोनों चरणों में, जल मेट्रो परियोजना न केवल मौजूदा मार्गों पर बनेगी, बल्कि उनमें से कुछ मार्गों का विस्तार भी होगा।

बेहतर योजना, समन्वय और रखरखाव सेवाओं को सुनिश्चित करने के लिए केएमआरएल ने मेट्रो रेल और जल मेट्रो के लिए एक एकीकृत मेट्रो परिवहन प्राधिकरण की स्थापना का प्रस्ताव दिया था। केरल मेट्रोपॉलिटन परिवहन प्राधिकरण (केएमटीए) को विधानसभा द्वारा नवंबर अंत में स्वीकृति मिली।

कोच्चि, तिरुवनंतपुरम और कोझिकोड़े शहरों में केएमटीए का दायित्व पूरे सार्वजनिक परिवहन का होगा। इस पारित अधिनियम के कारण कोच्चि जल मेट्रो के विकास को और बल मिलेगा। एक बार जल मेट्रो के शुरू हो जाने के बाद कोच्चि में होने वाली यातायात की भीड़ से छुटकारा मिलने की संभावना है।

राष्ट्रीय परिवहन योजना और अनुसंधान केंद्र के अनुसार अंतर्देशीय जलमार्ग का निर्माण कर भीतरी इलाकों को विकसित करने से कोच्चि को प्रतिवर्ष 442 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ होगा। साथ ही कार्बन डाइ-ऑक्साइड के उत्सर्जन में वार्षिक रूप से कम से कम 7,500 टन की कमी आएगी।

जल मेट्रो पर्यटन को भी बढ़ावा देगी और कोच्चि-अलप्पुझा बांध बेल्ट के विकास ने महत्वपूर्ण योगदान देगी। इसके अलावा, यह कोच्चि को बाढ़ जैसी घटनाओं से निपटने में मदद करेगी जो शहर की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करती है।

इसका पहला चरण इस साल अप्रैल में शुरू होने वाला था, लेकिन परियोजना अप्रैल माह में शुरू नहीं हो पाई। जल परिवहन मेट्रो को अब हरी झंडी मिल रही है, यह अगले साल तक बनकर चलने के लिए तैयार हो सकती है।

केएमआरएल के प्रबंध निदेशक अल्केश शर्मा ने बताया कि आठ टर्मिनलों के लिए टेंडर पहले ही दिए जा चुके हैं व अन्य 11 की समीक्षा हो रही है। इस प्रकार अगले वर्ष के अंत तक 20 टर्मिनल तैयार होंगे।

जलमार्ग पर चलने वाली नावों के विषय में उन्होंने बताया कि ये नौकाएँ कोच्चि शिपयार्ड पर निर्माणाधीन हैं व सभी बैटरी द्वारा संचालित होंगी। नावों की पतवार के एलुमिनियम के होने के कारण मछुआरों के रोजगार पर भी असर नहीं पड़ेगा, शर्मा ने द हिंदू  को बताया।

स्वराज्य के कार्यकारी संपादक एमआर सुब्रमणि के लेख की सहायता से कल्पित लेख।