भारती
राजा के कर्तव्य, अच्छे मंत्री का चुनाव, अभिजातता की पहचान आदि पर कुरल भाग-28

प्रसंग- तमिल कवि तिरुवल्लुवर द्वारा तिरुकुरल में राजा की विशेषताओं, अभिजातता, आदि पर लिखे गए कुरलों का जो भावार्थ सी राजगोपालाचारी ने जून 1969 के उत्तरार्ध में स्वराज्य पत्रिका में प्रकाशित किया था, उसका हिंदी अनुवाद यहाँ प्रस्तुत है।

अच्छे कुल में जन्म

1. अच्छे परिवार में जन्म होना एक अच्छी योग्यता है। विचारों, शब्दों और कृत्यों में शालीनता और किसी गलत बात के विरुद्ध प्रतिक्रिया अच्छे कुल में जन्मे लोगों के लिए स्वाभाविक होता है।

2. ऐसे परिवार निर्धनता में भी अपने आचरण का स्तर नहीं गिरने देते हैं।

3. धन न होने के बावजूद उनके पास परिवार का नाम खराब न होने देने का भय होता है जिस कारण वे छल और अनुचित व्यवहार से दूर रहते हैं।

4. उनकी छोटी से छोटी गलती भी दुनिया देखती है, उसी प्रकार जैसे चांद के दाग सबको दिखते हैं।

5. जैसे उपजे अंकुर मिट्टी की प्रवृत्ति दर्शाते हैं, वैसे ही भाषा में मृदुता अच्छा परिवार परिवार दर्शाता है।

6. दुष्टता से विराग सुखद और पुण्यदायक जीवन की पूंजी है।

अभिजातता

7. सांसारिक कार्यों में लिप्त पुरुषों के लिए सबसे आवश्यक सामाजिक गुण है दूसरों की बुराई पर बोलने से बचना।

8. विनम्रता से व्यक्ति सफल बनता है। यही वह शस्त्र है जो व्यक्ति को उसके प्रतिरोधी पर विजय प्राप्त करने में सहायता करता है।

9. अभिजात वही है जो अपने से निम्न व्यक्ति से हुई हार को भी शालीनता से स्वीकार करता है।

10. जो व्यक्ति हँस नहीं सकता, उसके लिए दिन के उजाले में भी यह संसार अंधकारमय होता है।

सुशासन

11. शिक्षकों द्वारा सिखाया गया आचार और धर्म का पालन राजा के सुशासन पर निर्भर करता है।

12. जो राजा प्रजा के हित को ध्यान में रखकर शासन करता है, संसार उसके पैरों में झुक जाता है।

13. शस्त्रबल से राजा की शक्ति नहीं बढ़ती बल्कि उसके शासन और शुचिता से बढ़ती है।

14. राजा का कर्तव्य है कि वह अपनी प्रजा को बाहरी खतरों से बचाकर उनके कल्याण का कार्य करे और जो कानून के विरुद्ध जाएँ उनपर कड़ी कार्रवाई करे।

अच्छे मंत्री

15. राजा के मंत्री उसकी आँख होते हैं इसलिए उनका चुनाव बहुदर्शिता से करना चाहिए।

16. जिस राजा के पास वे सलाहकार नहीं हैं जो उसके गलत होने पर उसे बताने का साहस रखते हैं, ऐसे राजा का नाश बिना शत्रु के ही हो जाता है।

अगले अंक में जारी…

पिछला भाग- तिरुवल्लुवर बताते हैं कार्यकारी का चयन करने में क्या योग्यताएँ देखें- कुरल भाग 27