भारती
जल जीवन मिशन पर राज्य क्या कर रहे हैं, हरियाणा-उप्र को कैसे मिला अतिरिक्त आवंटन

2024 तक हर घर तक जल पहुँचाने हेतु केंद्र का महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन अब अपने क्रियान्वयन के लिए राज्यों के स्तर पर पहुँच गया है। कुल 3.6 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय वाली इस योजना के लिए बजट के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 में 11,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

बजट के अतिरिक्त 12,000 करोड़ रुपये इस योजना में लगाए जाएँगे। कहा जा रहा है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्यों के लिए 29,125.42 करोड़ रुपये उपलब्ध रहेंगे। इसमें से 6,429.92 करोड़ रुपये पहले ही राज्यों को दिए जा चुके हैं।

केंद्र शासित प्रदेशों में योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, वहीं पूर्वोत्तर, हिमालयी और विधायिका वाले केंद्र शासित राज्यों में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत तो राज्य सरकार 10 प्रतिशत खर्च करेंगे। अन्य सभी राज्यों में केंद्र एवं राज्य सरकारों का लागत में बराबर का योगदान रहेगा।

इसके अलावा भौतिक और वित्तीय रूप से अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों को अतिरिक्त रााशि दिए जाने का भी प्रावधान है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश ने इसी प्रावधान के माध्यम से अतिरिक्त राशि प्राप्त की है।

हरियाणा

2020-21 में 290 करोड़ रुपये हरियाणा को आवंटित किए गए हैं जो पिछले वर्ष के आवंटन से 140 करोड़ रुपये अधिक हैं। इसके अलावा अच्छे प्रदर्शन के आधार पर केंद्रीय निधि के 380 करोड़ भी हरियाणा के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस प्रकार हरियाणा के पास 2020-21 में योजना पर व्यय करने के लिए कुल 760 करोड़ रुपये हैं।

12 मई को हरियाणा सरकार ने जल शक्ति मंत्रालय के समक्ष जल जीवन मिशन को लेकर अपना वार्षिक एक्शन प्लान प्रस्तुत किया था जिसेक आधार पर यह राशि आवंटित की गई है। इस प्रस्तुति में हरियाणा ने दिसंबर 2022 तक ही हर घर तक जल पहुँचाने की बात कही।

जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने जल जीवन मिशन योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से हरियाणा को तत्काल रूप से राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि हर गाँव तक पानी की पाइप पहुँचाकर हरियाणा 71 प्रतिशत योजनाओं को क्रियाशील कर चुका है।

31 मार्च 2019 तक जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार हरियाणा के 53.47 प्रतिशत घरों को ही नल से जल मिलता है। दावा किया गया है कि 2019-20 में नलों से जल का विस्तार 1.05 लाख और घरों में किया गया। इससे हरियाणा सरकार के समक्ष 14.24 लाख घरों में नल से जल पहुँचाने का कार्य अभी शेष है।

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन मे सहायता करने वाली एजेंसियों की नियुक्ति शुरू कर दी है। आवेदन मंगा लिए गए हैं और जून के अंत तक उन्हें तय कर दिया जाएगा। हरियाणा की तरह ही उत्तर प्रदेश सरकार ने 2022 तक हर घर तक नल द्वारा जल पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

मार्च 2019 तक उत्तर प्रदेश के ढाई करोड़ से अधिक घर नल द्वारा जल आपूर्ति से वंचित थे। 2019-20 में 7.92 घरों को जल की पाइप से जोड़ जा सका। उत्तर प्रदेश सरकार की सराहना करते हुए शेखावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सहयोग का आश्वासन दिया और कहा, “अगले छह माहों में 12,515 गाँवों के 54 लाख घरों को जल आपूर्ति पाइप से जोड़े जाने की अपेक्षा है।”

शेखावत (बाएँ), योगी आदित्यानथ (दाएँ); चित्र- जुलाई 2019

उत्तर प्रदेश को 1,164 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे जिसे बढ़ाकर अब 2,449 करोड़ रुपये कर दिया गया है। अब राज्य सरकार के पास केंद्रीय निधि के रूप में 3,234.5 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। और जैसा योजना की लागत साझेदारी के विषय में ऊपर बताया गया है, उसके अनुसार इस वित्तीय वर्ष में उत्तर प्रदेश सरकार का योगदान मिलाकर योजना पर कुल 6,470 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं।

शेखावत ने पत्र में यह भी लिखा कि यदि उत्तर प्रदेश 2022 तक योजना को पूरा करना चाहता है तो “मार्च 2021 तक उसके 40 प्रतिशत घरों में नल के द्वारा जल” पहुँचाना होगा। जल जीवन मिशन के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के पास 2.31 लाख ग्रामीण बस्तियों को जल आपूर्ति पाइप से जोड़ने का सबसे बड़ा कार्य है।

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश सरकार ने 9 जून को राष्ट्रीय कमिटी के समक्ष जल जीवन मिशन पर अपनी कार्य योजना की प्रस्तुति दी थी जिसके अगले ही दिन इसे वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 1,280 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए गए हैं।

इस योजना के तहत जून तक 1.8 लाख घरों को जल आपूर्ति पाइप से जोड़ा जाएगा और आने वाली तिमाहियों में क्रमशः 3.6 लाख, 7.2 लाख और 14.5 लाख घरों में पाइप से जल आपूर्ति की जाएगी, सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने बताया।

राज्य के पास बिना खर्च किए हुए 245 करोड़ रुपये बचे हैं व केंद्र के अनुदान एवं राज्य के योगदान को मिलाकर मध्य प्रदेश में इस योजना के लिए कुल 3,093 करोड़ रुपये उपलब्ध हो जाएँगे। अधिकारी के अनुसार वर्तमान में मध्य प्रदेश के 13.52 लाख घरों में नल से पानी आता है व वित्तीय वर्ष 2020-21 के अंत तक 26.27 लाख और घरों को इससे जोड़ने का लक्ष्य है।

केरल

केरल सरकार जल जीवन मिशन के कुशल क्रियान्वयन के लिए राज्य जल और स्वच्छता मिशन (एस.डब्ल्यू.एस.एम.) एवं जिला जल और स्वच्छता मिशन के गठन का निर्देश जारी किया है, द हिंदू  ने रिपोर्ट किया।

8 जून को जारी आदेश के अनुसार 15 सदस्यों की शीर्ष कमिटी के साथ एस.डब्ल्यू.एस.एम. की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे। इस पैनल में ग्रामीण जल आपूर्ति और सार्वजनिक सेवा जैसे क्षेत्रों के तीन विशेषज्ञों को भी रखा जाएगा।

1 जून को पदभार ग्रहण करते केरल के मुख्य सचिव डॉ विश्वास मेहता

इन उप-मिशनों के गठन की बात जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन दिशानिर्देशों में ही कही गई थी। वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए केरल में 880 करोड़ रुपये पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं।

घरों में नल द्वारा जल प्राप्त करने के परिप्रेक्ष्य में केरल काफी पिछड़ा हुआ है, जहाँ मार्च 2019 तक इसके सिर्फ 16.75 प्रतिशत घर ही कनेक्शन से जुड़े थे। अब सरकार को अपेक्षा है कि 2024 तक वह 52.85 लाख ग्रामीण घरों को कनेक्शन से जोड़ पाएगी।

इस वर्ष के जल जीवन मिशन के लिए राज्य सरकार उन पंचायतों को प्राथमिकता देगी जो लागत का 10-15 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए तैयार होंगे। कुल मिलाकर इस परियोजना पर 22,720 करोड़ रुपये खर्च किए जाएँगे।

जल संसाधन सचिव बी अशोक की अध्यक्षता में मई में एक पैनल गठित किया गया था जो जल जीवन मिशन के लिए रोडमैप तैयार कर सके। संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार इसी माह से योजना पर कार्य शुरू कर दे।

उपरोक्त राज्यों के अलावा और भी कई राज्य हैं जहाँ कार्य शुरू हो चुका है। बिहार और गुजरात ने तो इसी वित्तीय वर्ष में लक्ष्य को पूरा करने का दावा किया है। ध्यान देने योग्य एक और बात है कि कोविड-19 के कारण अपने गृह स्थान पर लौटे श्रमिकों को इस योजना के अंतर्गत रोजगार देने का सुझाव भी जल शक्ति मंत्रालय ने कई राज्यों को दिया है। स्वराज्य भी पहले ऐसा सुझाव दे चुका है।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।