भारती
इंदौर के मलजल प्रबंधन की कहानी: कैसे बचेंगी सरस्वती-काह्न नदियाँ प्रदूषित होने से

प्रसंग- स्वच्छ शहर इंदौर की नदियों को प्रदूषण से बचाने की एक पहल।

स्वच्छ भारत सर्वेक्षण में लगातार तीसरे वर्ष अव्वल आने वाले इंदौर के विषय में यह जान लेना आवश्यक है कि इस सर्वेक्षण के पैमानों से अलग भी इंदौर नगर निगम स्वच्छता के लिए प्रयासरत है। 2019 के सर्वेक्षण में कुल 5000 अंकों में से मलजल उपचार संयंत्रों का भाग 48 अंकों का था, यानी कि 1 प्रतिशत से भी कम। बावजूद इसके इंदौर नगर निगम मलजल प्रबंधन के लिए एक परियोजना पर कार्य कर रहा है।

अमृत एवं स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत छह मलजल उपचार संयंत्र (एसटीपी) बनाने के साथ-साथ शहर के नए हिस्सों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने का कार्य भी प्रगति पर है। इस योजना के प्रथम चरण की समय सीमा दिसंबर 2019 रखी गई है और इस योजना के पूर्ण होने के साथ ही इंदौर की दो प्रमुख नदियाँ- काह्न और सरस्वती व शहर के मध्य बहने वाले छह महत्त्वपूर्ण नाले- पीलिया खाल, भमोरी, पलासिया, आज़ाद नगर, तुलसी नगर और नरवल नाला अपशिष्ट जल से पूर्णतः मुक्त हो जाएँगे।

इस परियोजना के शुरू होने से पूर्व इन दोनों नदियों पर 433 व इन नालों पर 1313 सीवर आउटफॉल थे जो इन जलाशयों को दूषित कर रहे थे। प्रतिदिन 8 से 9 करोड़ लीटर अपशिष्ट जल इन नदियों में बहाया जा रहा था। जल स्रोतों को दूषित होने से रोकने के लिए सबसे आवश्यक था इन आउटफॉलों को टैप किया जाना और टैप करने के बाद इस दूषित जल का उपचार करना।

वर्तमान में इंदौर में तीन मलजल संयंत्र हैं- 2006 में स्थापित 12 और 78 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले व 2016 में 245 एमएलडी की क्षमता वाला संयंत्र स्थापित हुआ था। 2006 में स्थापित संयंत्र अपनी पूरी क्षमता भर कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें सुधार की आवश्यकता है। साथ ही 2020 तक उपचार संयंत्र आवश्यक क्षमता से 10.37 एमएलडी कम उपचार कर पाएँगे और यह कमी वर्ष दर वर्ष बढ़ती जाएगी जिस कारण कुल 77 एमएलडी क्षमता वाले छह संयंत्र निर्माणाधीन हैं।

निर्माणाधीन नहर भंडारा एसटीपी

निर्माणाधीन ज़ू एसटीपी

2035 की माँग के अनुसार आज़ाद नगर-ज़ू एसटीपी 35 एमएलडी, राधास्वामी एसटीपी 6 एमएलडी, हुक्मांखेड़ी-बीजलपुर एसटीपी 7 एमएलडी, प्रतीक सेतु एसटीपी 8 एमएलडी, नहर भंडारा एसटीपी 11 एमएलडी और स्मार्ट सिटी सीपी शेखर नगर एसटीपी 10 एमएलडी क्षमता के साथ निर्माणाधीन हैं। साथ ही इनके निर्माण स्थलों के निकट पर्याप्त खाली स्थान रखे गए हैं जहाँ 2050 की माँग के अनुसार इन संयंत्रों का विस्तार किया जा सकेगा।

निर्माणाधीन प्रतीक सेतु एसटीपी

2014 में इंदौर नगर निगम के कार्यक्षेत्र में 29 गाँवों को भी जोड़ा गया था जिस कारण उन्होंने भी सीवेज नेटवर्क से जोड़ना आवश्यक हो गया है। राधास्वामी एसटीपी कुछ ऐसा ही है जो शहर के नए स्थानों को कवर करेगा जैसे कि पलादा, निंबोड़ी, मुंदला नायत आदि। सीवेज नेटवर्क के विस्तार का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि नए क्षेत्रों को मलजल प्रबंधन से जोड़ने के लिए इस परियोजना का लक्ष्य 380 किलोमीटर की सीवेज पाइपलाइन का निर्माण है।

सीवर पाइपलाइन के निर्माण के बाद उन्हें मुख्य नेटवर्क से जोड़कर एसटीपी तक पहुँचाना या विभिन्न स्थानों पर निर्मित अंकेंद्रित एसटीपी पर पहुँचाना आवश्यक है। यूएडीडी भोपाल के अनुसार सीवरेज के बीच में पंपिंग स्टेशन नहीं होना चाहिए इसलिए दो विकल्प बचते हैं कि सीवेज को प्राथमिक सीवर नेटवर्क में पंप किया जाए या अंकेंद्रित एसटीपी बनाए जाएँ। इसलिए हम देख सकते हैं कि कम क्षमता वाले एसटीपी विभिन्न स्थानों पर बनाए जा रहे हैं।

सीवेज पाइपलाइन से मुख्य नेटवर्क में अपशिष्ट जल भेजने हेतु पंपिंग ऊर्जा बचाने के लिए कई स्थानों पर मेड़ या बांध बनाए जा रहे हैं जो इस कार्य के लिए गुरुत्वाकर्षण के बल का प्रयोग करेंगे। शहर की निचली बस्तियों में 12 स्थानों पर बांध-वीयर का निर्माण किया जा रहा है जो नाले के अपशिष्ट जल को मोड़कर या अवरोधित कर मुख्य सीवर लाइन में भेजेंगे।

समाजवादी नाला के निकट चंदन नगर में, राणा नगर नाला के निकट चंदन नगर में, मस्जिद के समीप चंदन नगर में, भमोरी नाला पर, बाणगंगा नाला पर, सत्य साईं बाग कॉलोनी में, नीलकंठ कॉलोनी में, केसर बाग में, कुलकरनी का भट्टा में, निरंजनपुर नाला पर, जोशी कॉलोनी में और जबरन कॉलोनी में ये 12 मेड़ें निर्माणाधीन हैं। विशेष बात यह है कि इन 12 स्थानों में से केवल कुलकरनी का भट्टा क्षेत्र में ही पंप की आवश्यकता पड़ेगी।

जो हज़ार से अधिक सीवर आउटफॉल जल स्रोतों में मिलते हैं, उनमें से 232 आउटफॉल को टैप करके छह नव-निर्मित एसटीपी में भेजा जाएगा, वहीं शेष सभी 245 एमएलडी वाले एसटीपी में भेजे जाएँगे। एसटीपी के निर्माण के बाद उपचारित जल नदी में छोड़ा जाएगा जिससे नदी का प्रवाह बना रहे। साथ ही उपचारित जल के 20 प्रतिशत अंश का अग्नि शमन, बागों में सिंचाई और सड़क किनारे के सौंदर्यीकरण कार्य के लिए पुनः उपयोग किया जाएगा।

नदी में स्वच्छ जल के प्रवाह का ध्यान रखने के साथ-साथ नदियों के सौंदर्य पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यहाँ पूर्व स्थापित 11 स्टॉप डैम हैं जो हुक्मांखेड़ी, आवासा टाउनशिप के पीछे, अमितेश नगर, लाल बाग के पीछे, गणगोर घाट, शिवाजी मार्केट के पीछे, नहर भंडारा, आज़ाद नगर, बालाजी हनुमान मंदिर, जगन्नाथ धर्मशाला के पीछे और जगन्नाथ विद्यालय के पीछे स्थित हैं। इन स्टॉप डैम पर गेट लगाकर पानी को रोका जाएगा जिससे जल स्तर बना रहे।

इंदौर नगर निगम के अधिकारियों के सहायता से हमारे पास 16 जुलाई तक की कार्य प्रगति का ब्यौरा उपलब्ध है। सीवेज नेटवर्क और एसटीपी डिज़ाइन का कार्य पूरा हो चुका है। ज़ू एसटीपी और प्रतीक सेतु एसटीपी में एसबीआर राफ्ट का निर्माण पूरा हो चुका है। एसबीआर एक्टिवेटड स्लज तकनीक से मलजल का उपचार करने का एक रिएक्टर होता है। ज़ू एसटीपी में पहली वेट वेल भी बन चुकी है। वहीं नहर भंडारा और राधास्वामी एसटीपी में एसबीआर के कॉन्क्रीट का काम पूरा हो चुका है। सीपी शेखर नगर एसटीपी का 15 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है।

अपशिष्ट जल को एसटीपी तक लाने के लिए बिछाई जा रही पाइपालाइन की प्रगति देखें तो ज़ू एसटीपी के लिए 47 प्रतिशत, नहर भंडारा एसटीपी के लिए 81 प्रतिशत, प्रतीक सेतु के लिए 31 प्रतिशत, बीजलपुर के लिए 88 प्रतिशत और राधास्वामी एसटीपी के लिए 67 प्रतिशत पाइप बिछाई जा चुकी है। वहीं यदि नए क्षेत्रों में पाइप विस्तार देखें तो सांवर औद्योगिक क्षेत्र में 308.15 किलोमीटर (किमी), लक्ष्मीबाई नगर में 2.85 किमी, पोलो मैदान क्षेत्र में 6.62 किमी, सिरपुर क्षेत्र में 4.93 किमी, भमोरी नाला पर 2.85 किमी, पलासिया नाला पर 2.72 किमी और पीलियाखाल नाला पर 1.59 किमी पाइप बिछाई जा चुकी है।

27 दिसंबर 2019 की समय सीमा तक यदि नियोजित कार्य पूरे हो गए तो 2020 के नए वर्ष से हम इंदौर की इन नदियों-नालों को भी एक नया जीवन जीते देखेंगे जो अनुपचारित अपशिष्ट जल से पूर्णतः मुक्त हो जाएँगी और 5,000 से अधिक घरों को भी सीवेज नेटवर्क से जुड़ने के बाद बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी। स्वच्छता के लिए इंदौर नए उदाहरण प्रस्तुत करता रहता है और अन्य शहरों के लिए यह भी एक अनुसरणीय पहल है।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।