भारती
मलेशिया के परिष्कृत ताड़ के तेल पर भारत के प्रतिबंध का मूल कारण सीएए विरोध नहीं

बुधवार (8 जनवरी) को भारत ने परिष्कृत, प्रक्षालित और गंधित (आरबीडी) ताड़ के तेल और आरबीडी पामोलिन के आयात को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया।

जो आयात नीति प्रतिबंधित सूची में इन वस्तुओं के मुफ्त आयात की अनुमति देती थी, उसमें संशोधन करके प्रतिबंध लागू किया गया है।

इसका मतलब है कि इनका आयात केवल तभी किया जाएगा जब कोई आयातक उत्पादों को देश में लाने की अनुमति के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय में आवेदन करे।

मुख्यधारा मीडिया ने इस प्रतिबंध को मलेशिया द्वारा भारत पर हालिया हमलों के साथ जोड़कर देखा है, खासकर मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर मोहमद द्वारा।

मलेशियाई प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के उन्मूलन पर भारत पर हमला किया था। पिछले महीने, उन्होंने भारत के नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) 2019 को मुसलमानों के साथ भेदभाव करने वाले कदम के रूप में इसकी आलोचना की।

मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर मोहमद

अक्टूबर में रिपोर्टों में कहा गया था कि कैसे भारत ने महाथिर मोहमद के प्रधानमंत्री बनने के बाद मलेशिया से ताड़ तेलों की खरीद कम कर दी थी। मोहमद जिसका परिवार चार पीढ़ियों पहले केरल से मलेशिया चला गया था, उसने कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में भारत पर हमला किया।

प्रतिबंध की घोषणा उस समय की गई है जब भारत के आंतरिक नीतियों और मामलों के विरुद्ध मलेशिया सरकार ने दखल दिया। लेकिन क्या भारत ने आयातों को विनियमित करने के इस निर्णय के माध्यम से मलेशिया को लक्षित किया है?

ज्यादा से ज्यादा यह हो सकता है कि मलेशियाई सरकार के रुख ने भारत को ताड़ समूह के तेलों के आयात पर प्रतिबंध लगाने की गति तेज़ किया हो।

नरेंद्र मोदी सरकार जनवरी से देश में आयात की जाँच करने के लिए वनस्पति तेल शोधन इकाइयों के दबाव में थी।

ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत ने मलेशिया (एमआईसीईसीए) के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किया था जो जनवरी 2019 से लागू हुआ था।

एमआईसीईसीए यानी मलेशिया-भारत व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के तहत, ताड़ समूह के तेलों पर आयात शुल्क कच्चे ताड़ के तेल के लिए अधिकतम 40 प्रतिशत और आरबीडी पामोलीन एवं परिष्कृत ताड़ के तेल के लिए 45 प्रतिशत होना चाहिए। इसके परिणामस्वरूप ताड़ समूह के तेलों की कीमत कम हो गई।

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह हुई कि कच्चे ताड़ के तेल और आरबीडी ताड़ के तेल और पामोलिन के बीच शुल्क का अंतर पहले के मुकाबले 10 प्रतिशत से घटकर 7.5 प्रतिशत हो गया।

इसके अलावा, ताड़ के तेल के प्रमुख निर्यातक देश मलेशिया और इंडोनेशिया ने अपने शोधन उद्योगों की रक्षा के लिए ताड़ तेल के समूह पर निर्यात शुल्क लगाया।

वास्तव में, दोनों देश अपनी सीमाओं के भीतर मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित करने के लिए परिष्कृत उत्पादों की तुलना में कच्चे ताड़ के तेल के निर्यात पर अधिक कर लगाया।

मलेशिया ने कच्चे ताड़ के तेल पर 31 डॉलर प्रति टन का निर्यात शुल्क लगाया है, जबकि परिष्कृत ताड़ के उत्पादों पर निर्यात शुल्क शून्य है। इंडोनेशिया ने कच्चे ताड़ के तेल के निर्यात पर 50 डॉलर प्रति टन और परिष्कृत ताड़ के तेल पर 30 डॉलर प्रति टन शुल्क लगाया है।

ये निर्यात कर कच्चे ताड़ के तेल और परिष्कृत ताड़ के तेल के बीच की कीमत के अंतर को और कम कर देते हैं। इस प्रकार, कच्चे तेल और परिष्कृत ताड़ के तेल के बीच प्रभावी शुल्क अंतर 2.5 प्रतिशत तक सीमित रह जाता है।

परिणामस्वरूप, पिछले वर्ष काफी समय के लिए आरबीडी ताड़ के तेल और पामोलिन का आयात बढ़ा। इसके चलते रसोई तेल कंपनियों की क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा था।

दिसंबर 2018 तक परिष्कृत इकाइयों की निष्क्रिय क्षमता 40 फीसदी थी। एमआईसीईसीए के लागू होने के बाद, उद्योग की क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत निष्क्रिय होना शुरू हो गया।

प्रसंस्करण श्रमिकों के रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव डालने के अलावा यह “मेक इन इंडिया” के सिद्धांत के विरुद्ध था।

एमआईसीबीए के माध्यम से आरबीडी ताड़ के तेल और पामोलिन के आयात पर पिछले साल 4 सितंबर से 5 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाने के भारत के निर्णय ने स्थिति को कुछ हद तक सही करने में मदद की।

इसके अलावा, इस साल 1 जनवरी से केंद्र ने सभी वनस्पति तेल आयातों पर 10 प्रतिशत सामाजिक कल्याण उपकर लगाने का निर्णय लिया है।

तथ्य यह है कि भले ही यह कदम मलेशिया को लक्षित करता दिखता है, लेकिन इससे इंडोनेशिया भी प्रभावित होगा। वर्तमान में भारत लगभग 90 लाख टन ताड़ के तेल का 70 प्रतिशत आयात इंडोनेशिया से और शेष मलेशिया से 11करता है।

ताड़ के तेल समूह की भारत के कुल 1.5 करोड़ टन वनस्पति तेलों के आयात में 60 प्रतिशत भागीदारी होती है। बाकी आवश्यकताओं को सोयाबीन और सूरजमुखी का तेल पूरा करते हैं।

भारतीय द्रावक निष्कर्षक संघ ने आरबीडी ताड़ के तेल और पामोलिन के आयात पर अंकुश लगाने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह घरेलू परिष्कृत उद्योग का समर्थन करने हेतु बहुत लंबा रास्ता तय करेगा और किसानों को उनके तिलहन के लिए पारिश्रमिक मूल्य प्राप्त करने में बहुत मदद करेगा।

हालाँकि भारत ने कहा है कि आयातकों को परिष्कृत ताड़ के तेल और पामोलिन आयात करने की अनुमति लेनी होगी, तथ्य यह है कि आरबीडी ताड़ के तेल और पामोलिन का लदान शून्य तक पहुँच जाएगा।

दूसरी ओर, वैश्विक बाजार में पिछले छह से नौ महीनों में वनस्पति तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। व्यापार सूत्रों ने चिंता वनस्पति तेल की कीमतों में वृद्धि को चिंता का विषय बताया था।

विशेष रूप से, अन्य वनस्पति तेलों जैसे सोयाबीन और सूरजमुखी की तुलना में ताड़ के तेल की कीमतों में अधिक वृद्धि हुई। उदाहरण के लिए, 3 जनवरी को एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में आरबीडी पामोलीन में 45 प्रतिशत और कच्चे ताड़ के तेल को 54 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई (इंडोनेशिया और मलेशिया) है।

इसकी तुलना में सोयाबीन तेल में 27 प्रतिशत और सूरजमुखी के तेल में 23 प्रतिशत की तेज़ी आई है। ताड़ के तेल की कीमत वृद्धि के तीन कारण बताए गए हैं।

सबसे पहले, मलेशिया और इंडोनेशिया ने जैविक ईंधन के रूप में ताड़ के तेल का उपयोग बढ़ाया है। इंडोनेशिया ने कहा है कि उसके बायोडीज़ल में पहले के 20 प्रतिशत के मुकाबले अब 30 प्रतिशत ताड़ का तेल होता है, वहीं मलेशिया ने इसे 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया है।

दूसरा, ताड़ के तेल के लिए एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक सोयाबीन का उत्पादन प्रारंभिक अनुमानों की तुलना में 10 से 10.15 लाख कम है।

तीसरा, अर्जेंटीना ने सोयाबीन और सोयाबीन तेल के निर्यात पर कर 5 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 24.7 प्रतिशत से 30 प्रतिशत कर दिया। इन सभी के परिणामस्वरूप चीन द्वारा अधिक खरीद की गई, जो वृद्धि का कारण बनी।

हालाँकि 6 जनवरी की रिपोर्टों में कहा गया था कि भारत सरकार ने अनौपचारिक रूप से आयातकों को मलेशिया से ताड़ का तेल की खरीदी पर रोक लगाने के लिए कहा था, उद्योग के सूत्रों ने कहा कि आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत सरकार का कदम उद्योग की मदद करने हेतु एक “वास्तविक” कदम है।

क्या यह मलेशिया में भारतीय उत्पादों के निर्यात को प्रभावित करेगा? दक्षिण भारत में स्थित एक निर्यातक के अनुसार, मलेशिया पर निर्भर वाहक प्रभावित हो सकते हैं।

“ऐसे निर्यातक हैं जो मलेशिया को मिर्च, प्याज और मूंगफली की आपूर्ति करते हैं व उसी पर निर्भर हैं। हमें बताया गया था कि भारत द्वारा ताड़ के तेल की खरीद पर प्रतिबंध के परिणामों का हमें सामना करना पड़ सकता है। अब, यह नियम आ गया है, हमें इसका असर देखना होगा।”, अपने कुल निर्यात का 90 प्रतिशत मलेशिया को निर्यात करने वाले एक निर्यातक ने कहा।

उद्योग जगत के सूत्रों ने कहा कि शुरुआत में कुछ समस्याएँ हो सकती हैं, लेकिन हमें धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ जाएगी और हम बेहतर विकल्पों की ओर देख सकते हैं।

स्वराज्य के कार्यकारी संपादक एमआर सुब्रमणि  @mrsubramani के माध्यम से ट्वीट करते हैं।