भारती
दिलबर नेगी की दंगों में हत्या करने वाली भीड़ ने “हिंदुओं की बेटियाँ” उठाने की बात कही

दिलबर नेगी, अनिल स्वीट्स पर काम करने वाला 20 वर्षीय युवक जिसकी क्रूर हत्या मुस्लिम भीड़ ने 24 फरवरी की रात को की थी। मिठाई की यह दुकान शिव विहार तिराहे पर स्थित है जो दिल्ली दंगों में हिंसा का एक प्रमुख केंद्र रहा था। पुलिस ने इस छोटे से क्षेत्र में दंगों से संबंधित 10 एफआईआर दर्ज की हैं।

नेगी का पूरी तरह से जला हुआ शव पुलिस को हत्या के दो दिनों बाद मिला था। उसकी पोस्टामार्टम रिपोर्ट परेशान करने वाली है। चेहरे के नैन-नक्श पहचाने जाने योग्य नहीं थे, दोनों पैर नहीं थे, सर ऐसे जल चुका था कि अंदर खोपड़ी की हड्डी दिख रही थी। उसके फेफड़े, हृदय, किडनी और लीवर कड़े हो गए थे।

अनिल स्वीट्स के मालिक अनिल कुमार जो पिछले 25 वर्षों से दुकान चला रहे हैं, ने पुलिस को बताया कि हमेशा की तरह दोपहर के भोजन के बाद नेगी आराम करने लगभग 1.30 बजे गोदाम में गया था। आधे घंटे बाद अनिल और उनके कर्मचारियों को हल्ला-गुल्ला सुनाई दिया और उन्होंने देखा कि मुस्लिम भीड़ डंडे, पत्थरों और बंदूकें लेकर इकट्ठा हो रही है।

“भीड़ में शामिल सभी लोग हिंदुओं के खिलाफ नारे लगा रहे और कह रहे कि इन काफिरों को देश से निकाल देंगे, मारेंगे और हिंदुओं की लड़कियों को उठाकर ले जाएँगे। भीड़ हिंदू मुर्दाबाद और हिंदुओं को गंदी-गंदी गालियाँ” दे रही थी, अनिल ने पुलिस को बताया।

दूसरे प्रत्यक्षदर्शी ने भी पुलिस को नारों के बारे में ऐसी ही बात बताई है। “वे ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहे थे कि वे हिंदुओं की माँओं और बेटियों को उठा लेंगे और उन्हें बाहर निकाल देंगे।”, प्रत्यक्षदर्शी ने कहा।

अनिल और उसके कर्मचारियों ने तुरंत शटर लगा दिया और दुकान के अंदर छुप गए। घंटे भर बाद जब माहौल शांत हुआ तो वे लोग सड़क के दूसरी ओर एक डेयरी दुकान पर गए जो अनिल के भाई की है। दुकान के बाहर एक बाइक और स्कूटी को दंगाई आग लगाकर चले गए थे जिसे उन लोगों ने बुझाया और अंदर फँसे अपने भाई और भतीजे को अनिल ने बाहर निकाला।

वे लोग डेयरी दुकान की छत पर गए जहाँ से अनिल के भतीजे ने अनिल की दुकान को लूट रहे, तोड़फोड़ कर रहे और छत से दूसरों पर ईंटें-पत्थर फेंक रहे दंगाइयों का वीडियो शूट किया है।

“मैंने अपने कर्मचारी महेश से पूछा कि क्या हमारा कोई आदमी गोदाम में है, उसने बताया नेगी वहाँ हो सकता है।”, अनिल ने पुलिस से कहा। अनिल ने देखा कि भीड़ उसकी संपत्तियों में आग लगा रही है। उसने पुलिस को कॉल किया लेकिन वह नहीं आई।

अनिल ने भीड़ में से कुछ चेहरों की पहचान की। शाहनवाज़ दंगाइयों में से एक था जिसकी दुकान अनिल के गोदाम के निकट ही थी। एक दंगाई अनिल के पड़ोस की दुकानवाले का बेटा था। उसने कुछ और लोगों की भी पहचान की है जिन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है।

लगभग शाम 7.30 बजे अनिल अपने घर चले गए और 9 बजे उन्हें वॉट्सैप पर एक कॉल आया और कहा गया कि शाहनवाज़ और उसके सहयोगियों ने गोदाम में आग लगा दी गई है।

पुलिस के आरोप-पत्र में अन्य लोगों के भी बयान दर्ज किए गए हैं जिनका घर या दुकान अनिल के गोदाम के पास है और जिन्होंने शाहनवाज़ व उसके मित्रों को गोदाम में आग लगाते हुए देखा।

दिलबर नेगी का फोन खोया हुआ है औ अभी तक नहीं मिला है लेकिन पुलिस ने उसकी कॉल हिस्टरी देखी है। उसकी आखिरी दो कॉल महेश यादव को थी जो मिठाई की दुकान में उसका सहकर्मी था। आखिरी कॉल रात 9.07 पर की गई थी।

महेश ने पुलिस को बताया कि दिलबर नेगी से जब उसकी आखिरी बार बात हुई थी तो उसने कहा था कि वह गोदाम के एक कमरे में छुपा हुआ है और वहाँ कई लोग हैं जो सीढ़ियों से ऊपर-नीचे आ-जा रहे हैं।

कई प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने 35 से अधिक दंगाइयों की पहचान की है जिनमें से 12 को गिरफ्तार किया जा चुका है और 25 की खोज जारी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार रात्रि 9 बजे अनिल के गोदाम पर भीड़ के साथ उपस्थित रहने वाले शाहनवाज़ ने दिलबर नेगी को मारने की बात स्वीकार की है। उसने बताया कि वह अनिल पेस्ट्री और चावला बुक डिपो में आग लगाने के बाद अनिल के गोदाम के भीतर गया था।

“रात 9-9.30 बजे हम गोदाम में घुसे जहाँ बहुत सारी सब्जियाँ और पैकिंग वाला गत्ता रखा हुआ था। हम दूसरी मंज़िल पर गए तो देखा कक्ष अंदर से बंद है। भीड़ ने दरवाज़ा तोड़ा तो देखा कि अनिल का कोई कर्मचारी वहाँ था। पूछने पर उसने बताया कि उसका नाम दिलबर नेगी है। हमने उसे पीटा और जब वह बेहोश हो गया तो उसपर गत्ते और कागज़ डालकर आग लगा दी और वहाँ से हम भाग गए।”, शाहनवाज़ ने पुलिस को दिए बयान में कहा।

आरोप-पत्र में कहा गया है कि कॉल विवरण विश्लेषण से पुलिस ने पाया है कि जितने 12 लोग गिरफ्तार हुए हैं, वे सभी घटनास्थल पर 24 फरवरी को उपस्थित थे।

इन 12 में से कुछ के नाम आलोक तिवारी, वीरभान, दिनेश तिवारी की हत्याओं, डीआरपी स्कूल में लूटपाट और आगजनी व शिव विहार तिराहे पर हिंदुओं की संपत्तियों को जलाने के आरोप-पत्रों में भी हैं।

अरिहंत स्वराज्य में वरिष्ठ संपादक हैं।