भारती
अच्छे व्यक्तियों की मित्रता अपनी नवीनता नहीं खोती व सुखदायक होती है- कुरल भाग 18

1. एक चरित्रवान व्यक्ति की मित्रता नए निकले चांद की तरह होती है जो हर गुज़रते दिन के साथ बढ़ती है। वहीं किसी मूर्ख के साथ मित्रता पूर्णिमा के चांद की तरह होती है जो गुज़रते दिनों के साथ घटती जाती है।

2. गहन अध्ययन करने से व्यक्ति को किसी पुस्तक के सौंदर्य की और अनुभूति होती है। साथ ही अधिक सुख की भी प्राप्ति होती है। वैसे ही अच्छे व्यक्तियों की मित्रता अपनी नवीनता नहीं खोती, और प्रतिदिन अधिक सुख देती है।

3.मित्रता सुखदायक हँसी-ठिठोली के लिए नहीं है, अपितु सही पथ से भटकने पर कड़वे परामर्शों के लिए है।

4. सच्ची मित्रता वह है जो संकट की घड़ी में तुरंत सहायता के लिए आए, जैसे पहने हुए वस्त्र के सरकने पर हाथ तुरंत उसे पकड़ने के लिए उठता है।

प्रेम का भाव इतना गहरा होने चाहिए कि उसकी पहुँच नसों की स्वाभाविक क्रिया तक हो।

5. भावों की समानता मित्रता का कारण है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि आप कभी-कभार ही अपने मित्र के साथ रहते हैं या दीर्घ समय से साथ रहे हैं।

6. कई लोगों को देखकर आप मुस्कुराते हैं लेकिन जिसे देखकर आपकी आत्मा प्रफुल्लित हो उठे, वही आपका मित्र है।

7. मित्रता में तीन कार्य किए जाने हैं- मित्र को गलत राह पर चलने से बचाएँ, उसे सही राह की दिशा दिखाएँ और उसके दुर्भाग्य को साझा करें।

8. विवेक के बिना मित्रता को संकुचित करने से अधिक हानिकारक कुछ नहीं है क्योंकि मित्रता का गुण यह है कि एक बार मित्रता किए जाने के बाद इसे छोड़ा नहीं जाता।

9. मित्रता को तब ही संकुचित होने दें जब आप व्यक्ति की सभी अच्छाइयों, उसके जन्म, उसकी बुराइयों व उसके संबंधों (मित्र व संबंधी) के विषय में जान जाएँ।

10. उस व्यक्ति की मित्रता के लिए थोड़ा त्याग भी कर लेना चाहिए जो अच्छे कुल में पैदा हुआ है और अपने बारे में सार्वजनिक राय के प्रति संवेदनशील है।

11. उन लोगों की खोज करें जिनमें आपकी निंदा करने का सामर्थ्य हो और आवश्यकता पड़ने पर आपको रुला भी सकें यदि आप गलत राह पर जाएँ। ऐसे ही व्यक्ति से मित्रता करें।

12. दुर्भाग्य का एक लाभ भी है, यह आपको मित्रों और संबंधियों की परख करवाता है।

13. उन विचारों को टिकने न दें जो आपका उत्साह कम करें। उनसे मित्रता न रखें जो आपको शक्ति देने की बजाय कठिन समय में आपको कमज़ोर करें।

14. यह अपने आप में ही एक लाभ होगा यदि आप मूर्खों की मित्रता से दूर जा सकें।

15. अयोग्य व्यक्तियों की मित्रता के लिए कष्ट न उठाएँ। भले ही यह शहद जैसी मधुर हो लेकिन फिर भी ऐसी मित्रता को मरने दें।

16.उन लोगों की मित्रता खोने या पाने से क्या फर्क पड़ता है जो आपसे मित्रता तब करते हैं जब उनके लिए लाभदायक हो और ऐसा न होने पर छोड़ देते हैं?

17. लाभ के लिए की गई मित्रता उसी स्तर की होती है जैसा वैश्याओं का प्रेम और चोरों की साझेदारी होती है।

18. जो लोग आपको संकट के समय छोड़ देते हैं, ऐसे लोगों की मित्रता से अच्छा मित्रविहीन रहना है, जिस प्रकार टूटे वाहन की सवारी से बेहतर पैदल चलना होता है।

19. बुद्धिमान और अच्छे व्यक्तियों का विरोध किसी मूर्ख व्यक्ति की घनिष्ठ मित्रता से बेहतर है।

20. सपने में भी उन लोगों से संबंध रखना गलत है जिनकी करनी और कथनी में अंतर हो।

अगले अंक में जारी…