भारती
दुर्ग की विशेषताओं और समृद्ध राष्ट्र के लिए आवश्यक बातों पर प्रकाश डालते कुरल (34)

प्रसंग- 26 जुलाई 1969 के स्वराज्य अंक में प्रकाशित कवि तिरुवल्लुवर के समृद्ध राष्ट्र और दुर्ग की विशेषताओं पर चयनित कुरलों का हिंदी अनुवाद।

एक समृद्ध राष्ट्र

1. एक समृद्ध राष्ट्र के लिए आवश्यक हैं- औद्योगिक उत्पाद, अभिजात वर्ग में अच्छे और ज्ञानवान लोग और धन के विषय में उच्च स्तर पर सोचने वाले लोग।

2. राज्य को असमाजिक और विनाशकारी तत्वों, समाज में विभाजनों एवं अपराधों से दूर रहना चाहिए जो राजा की शांति भंग करते हों।

तिरुवल्लुवर के काल में प्रायः राज्य के प्रशासन में समाज के विभाजन बाधा बन जाते थे। यहाँ कवि का संकेत जाति और पंथ विभाजनों की ओर है। एक अच्छे राज्य की आवश्कताएँ बताने के बाद कवि अच्छे प्रशासन का महत्त्व बताकर यह अध्याय समाप्त करते हैं।

3. एक राज्य के पास वह सब कुछ हो सकता है जिसका उल्लेख इस अध्याय में किया गया है लेकिन फिर भी अगर राजा सही नहीं है तो इन सबका कुछ लाभ नहीं होगा।

गढ़बंदी

4. गढ़बंदी अपनी क्षमताओं पर विश्वास करके आक्रमण करने वाले राजाओं के लिए भी उतनी ही आवश्यक है जितनी रक्षात्मक प्रवृत्ति अपनाने वाले संतुष्ट और सावधान राज्य के लिए।

5. एक अच्छे किले में हर मौसम में उपलब्ध रहने वाला जल स्रोत होता है और आसपास का मैदान पहाड़ियों और घने जंगल से भरा होता है।

6. दुर्ग की दीवार ऊँची, चौड़ी, मज़बूत और ऐसी बनी होनी चाहिए जिसपर शत्रुओं के शस्त्रों से आसानी से चढ़ाई न की जा सके।

7. जितनी लंबाई की रक्षा करनी है, वह अधिक नहीं होनी चाहिए लेकिन अंदर पर्याप्त जगह होनी चाहिए। किला ऐसा होना चाहिए जिसे देखकर ही शत्रु के हौसले पस्त हो जाएँ।

8. दुर्ग प्राकृतिक रूप से रक्षात्मक और रसद से भरपूर होना चाहिए और ऐसा हो कि बिना सामने आए अंदर से ही वार किया जा सके।

9. संरचना में गढ़ कितना ही सशक्त हो लेकिन तब तक विश्वसनीय नहीं होता जब तक इसके सैनिक अवसर का लाभ उठाकर सही तरह से लड़ना न जानते हों।

10. दुर्ग ऐसा होना चाहिए जिसपर कब्ज़ा करना मुश्किल हो, जिसपर आपदाओं का अधिक प्रभाव न पड़ता हो और जो धोखेबज़ों के धोखे को भी सह सके।

11. किले की सभी अच्छाइयाँ तब तक काम नहीं आतीं, जब तक सेनाध्यक्ष सक्षम न हो।