भारती
फ़ेसबुक और जियो की संधि के एक्स-फैक्टर, इस सहक्रिया में ग्राहकों के लिए क्या

रिलायंस जियो की मुख्य कंपनी में 43,574 करोड़ रुपये का निवेश कर 9.9 प्रतिशत भागीदारी खरीदने का फ़ेसबुक का सौदा यदि विनियामक स्वीकृतियाँ प्राप्त कर लेता है तो भारत के इतिहास में यह माध्यम और मंच की सबसे बड़ी संधि होगी।

दूरसंचार क्षेत्र में जियो का सबसे बड़ा नेटवर्क है जो भारतीय घरों में सर्वाधिक मात्रा में इंटरनेट पहुँचाता है (दिसंबर 2019 तक के डाटा के अनुसार इसके 37 करोड़ डाटा उपभोक्ता हैं), वहीं फ़ेसबुक के पास वॉट्सैप और इंस्टाग्राम को मिलाकर कुल 70 करोड़ भारतीय उपभोक्ता हैं।

औपचारिक रूप से निवेश में जियो मंचों का कुल मूल्यांकन 4.62 लाख करोड़ रुपये किया गया है जो अपने प्रतिद्वंदी भारतीय एयरटेल के बाज़ार मूल्यांकन 2.73 लाख करोड़ रुपये से कई अधिक है। वहीं वोडाफोन आइडिया मात्र 11,379 करोड़ रुपये के मूल्यांकन के साथ काफी पीछे है।

जियो मंचों में केवल दूरसंचार इकाई ही नहीं आती बल्कि जियोसावन (संगीत), जियोमार्ट, एजियो.कॉम (ई-कॉमर्स) और जियोसिनेमा (चलचित्र) जैसे ओवर द टॉप (ओटीटी) डिजिटल छोटे मंच भी हैं।

कुछ जियो ऐप

इस बड़े सौदे की सहक्रिया को जो मुख्य बात चालित कर रही है वह है दोनों साझेदारों की क्षमता। वर्तमान में सर्वव्यापी वॉट्सैप संदेशवाहक मंच (40 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ) किराना दुकानों का डिजिटल क्रियान्वयन कर छोटे और स्थानीय डिलिवरी व्यापार और संबंधित भुगतान का माध्यम बनने के रिलायंस जियो के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को बल देगा।

जियो एक दूसरी सुखद संधि की भी अभिलाषा कर रहा है जो रिलायंस रिटेल और भारत के बढ़ते ऑनलाइन खुदरा उद्योग, जिसमें अभी अमेज़ॉन, वालमार्ट-फ्लिपकार्ट, बिग बास्केट,पेटीएम मॉल आदि का प्रभुत्व है, को जोड़े।

अगर यह संधि कारगर होती है और वॉट्सैप ऑफलाइन छोटी किराना दुकानों को इन-बिल्ट मंच के माध्यम से ऑर्डर व भुगतान में सहायता करता है तो जियो-फ़ेसबुक संधि ऑनलाइन रिटेल में अमेज़ॉन और फ्लिपकार्ट व ऑफलाइन सुपरस्टोर में किशोर बियानी के फ्यूचर समूह द्वारा संचालित बिग बाज़ार को चुनौती देगी। यही कारण है कि अमेज़ॉन और फ्यूचर समूह भी ऐसी ही ऑफलाइन-ऑनलाइन सहक्रिया पर कार्य कर रहे हैं।

अमेज़ॉन और फ्यूचर समूह सौदे का समाचार

इस खुदरा खेल में सर्व-माध्यमों से बिक्री पर ध्यान है। मूल विचार है कि ग्राहक तक उसके अनुकूल किसी भी मंच से पहुँचकर उसके पसंद के मूल्य पर उसे वस्तु खरीदने का विकल्प दिया जाए। वर्तमान में भी ऐसा होता है कि ग्राहक ऑफलाइन रूप से मोबाइल फोन के फीचर देखने के बाद उसे सस्ते दाम पर ऑनलाइन ऑर्डर कर लेते हैं।

जब ऑफलाइन और ऑनलाइन की संधि फलदायक और बाधारहित हो जाएगी तो ग्राहक न सिर्फ मूल्यों की तुलना कर सकेगा बल्कि अपने अनुसार डिलिवरी माध्यम भी चुन सकेगा। उदाहरण स्वरूप, कोई ग्राहक अमेज़ॉन पर सामान ऑर्डर कर उसे अपने निकटतम बिग बाज़ार से जाकर प्राप्त कर सकेगा या राशन का भुगतान वॉट्सैप पर करके अपने निकटतम किराना दुकान से उसे घर तक पहुँचाने के लिए कह सकेगा।

हालाँकि इस सहक्रिया का सामर्थ्य प्रत्यक्ष है लेकिन दो विशेष कारक (एक्स फैक्टर) हैं जिनके कारण जियो मंचों में मात्र 9.9 प्रतिशत की भागीदारी के लिए फ़ेसबुक को इतना उच्च मूल्य चुकाना पड़ा।

दो प्रश्न जो पूछे जाने योग्य हैं, वे हैं- इतनी बड़ी डिजिटल कंपनी को मुकेश अंबानी ने अपने क्षेत्र में आने क्यों दिया? अंबानी ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो अन्य बड़े व्यक्तियों को अपने खेल के बीच आने दें। दूसरा प्रश्न है कि फ़ेसबुक ने ऐसा क्या मूल्यवान देखा जो इतनी कम हिस्सेदारी के लिए इतना बड़ा मूल्य चुकाया?

रिलायंस के लिए इस सौदे को आवश्यक बनाने वाला विशेष कारण है ऋण को कम किया जाना। रिलायंस उद्योग पर कुल 3 लाख करोड़ रुपये का ऋण है लेकिन पिछले कुछ समय से परिसंपत्ति बिक्री करके कंपनी को यह ऋण कम करते देखा जा सकता है।

अंबानी ने मार्च 2021 तक रिलायंस का कुल ऋण शून्य करने का लक्ष्य रखा है। इसका अर्थ यह हुआ कि अगले 11 माहों में उन्हें 1.5 लाख करोड़ रुपये का ऋण चुकाना है, शेष की पूर्ति नकद और तरल परिसंपत्तियों से की जा सकती है।

लेकिन परिसंपत्तियों के दो बड़े सौदे विनियमों में फँसे हैं- 25,000 करोड़ रुपये में ब्रूकफील्ड को फाइबर व टावर की बिक्री और रिलायंस तेल व रिफाइनिंग उद्योग के 20 प्रतिशत भाग का सऊदी अरमको को विक्रय। विनियमन अनुमति मिलने के बाद भी वैश्विक तेल बाज़ार में गिरावट के बाद लगता नहीं कि अरमको सौदा आसानी से पूरा हो पाएगा।

रिलायंस रिटेल को एक बड़े प्रीमियम के साथ लिस्ट करने का एक तीसरा विचार भी है जिसे कोविड-19 त्रासदी के अंत की प्रतीक्षा करनी होगी और इसमें काफी समय लग जाएगा। ऐसे में फ़ेसबुक से 43,574 करोड़ रुपये की प्राप्ति रिलायंस के ऋण खाते का उपचार करती है। यही है रिलायंस का एक्स फैक्टर जिसने इस सौदे को प्रोत्साहित किया।

लेकिन फ़ेसबुक के लिए कौन-सा एक्स फैक्टर है जिसने नकद समृद्ध वैश्विक तकनीकी कंपनी को जियो मंचों में इतने कम भाग के लिए निवेश हेतु प्रोत्साहित किया?

वर्तमान शेयर बाज़ार के मूल्यांकन के अनुसार फ़ेसबुक को इसी राशि में एयरटेल में कई बड़ा हिस्सा मिल सकता था, यहाँ तक कि वह 6,000 करोड़ रुपये में वोडाफोन-आइडिया का 51 प्रतिशत भाग भी खरीद सकता था (हालाँकि यह कई हज़ार करोड़ रुपये के ऋण के साथ आता)। लेकिन इस सौदे में सरकार और बैंकों से कम विरोध झेलना पड़ता क्योंकि दोनों ही वोडाफोन आइडिया के राहत पैकेज को लेकर चिंतित हैं।

फ़ेसबुक की ओर से इस रणनीति के दो कारण हो सकते हैं।

पहला यह कि मार्क ज़ुकरबर्ग वॉट्सैप को भारत में भुगतान मंच के रूप में स्वीकृति दिलाने की दिशा में थोड़े ही आगे बढ़ पाए हैं। जिन कारणों ने इसे रोका है वह है इसकी एनक्रिप्टेड (कोई तीसरा न देख सके) प्रकृति, जो सरकार को पसंद नहीं, और डाटा स्थानीयकरण जिसपर सरकार ज़ोर देती आई है।

साथ ही कई भुगतान मंचों को वॉट्सैप का भय है क्योंकि यह लगभग हर भारतीय स्मार्टफोन पर है जो इसका उपयोग सरल बनाएगा और उपभोक्ता मुख्य रूप से इसी माध्यम का उपयोग करेंगे। जब दुकानदार और ग्राहक दोनों के फोन पर वॉट्सैप है तथा जब एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को एक मंच के माध्यम से भुगतान किया जा सकता है तो कई उपभोक्ता, उदाहरण के लिए, पेटीएम छोड़कर वॉट्सैप का ही प्रयोग करेंगे।

दूसरा यह कि फ़ेसबुक मुफ्त आधारभूत इंटरनेट सेवा देने के विचार को बढ़ा नहीं पाया था क्योंकि 2016 में दूरसंचार विनियामक ने इसे यह कहकर नकार दिया था कि यह इंटरनेट की निष्पक्षता को प्रभावित करेगा।

इससे न सिर्फ फ़ेसबुक का अपमान हुआ बल्कि इसने मात्र एक सोशल मीडिया मंच से बढ़कर भारत में सर्वव्यापी होने का अवसर खो दिया था। फ़ेसबुक की शर्तों पर आधारित मुफ्त इंटरनेट एक ऐसा सौदा था जिसे अधिकांश भारतीय स्वीकार करते।

फ़ेसबुक की ओर से एक्स फैक्टर न सिर्फ रिलायंस जियो की अधिक घरों में पहुँच है बल्कि नीति निर्माताओं से फ़ेसबुक और वॉट्सैप को विनियामक अनुमति दिलवा पाने की अंबानी की अधिक संभावना भी है।

फ़ेसबुक और मुकेश अंबानी की महत्वाकांक्षाएँ मेल तो खाती हैं लेकिन इन दोनों को साथ लाने वाला एक्स फैक्टर है अंबानी का ऋण व फ़ेसबुक की स्वयं को संदेश भेजने से लेकर भुगतान तक में भारतीयों की पहली पसंद बनाने की इच्छा।

आर जगन्नाथन स्वराज्य के संपदकीय निदेशक हैं। वे @TheJaggi से ट्वीट करते हैं।