भारती
बेंगलुरु सब-अर्बन रेल के लिए बढ़ रही राजनीतिक इच्छाशक्ति, जानिए क्या है परियोजना

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु 8,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला एक विशाल महानगर है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ लगभग 1.16 करोड़ लोगों का निवास है। तो इतने सारे लोगों को इधर-उधर जाने के लिए एक परिवहन प्रणाली की आवश्यकता होती है। विशेषकर बेंगलुरु जैसे शहर में जो देश में सबसे बड़े तकनीकी अधिष्ठानों का गृह है।

बेंगलुरु का ट्रैफिक अभिशाप

शहर में परिवहन की स्थिति इतनी खराब है कि जिन व्यक्तियों ने कभी शहर में पाँव भी नहीं रखा, वे भी शहर में खतरनाक ट्रैफिक जामों के बारे में जानते हैं। उबर द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, ट्रैफिक की भीड़ के कारण बेंगलुरु प्रति वर्ष 38,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाता है।

शिखर ट्रैफिक के दौरान यानी ऑफिस आने-जाने वाले घंटों में सामान्य की तुलना में 162 प्रतिशत अधिक समय लगता है। स्थिति केवल बदतर ही हो सकती है क्योंकि शहर की जनसंख्या के 2031 तक बढ़कर 1.81 करोड़ होने का अनुमान है।

कई समस्याओं का सामना करना

परिवहन तंत्र में विषमता बेंगलुरु की एक अनोखी समस्या है। बेंगलुरु के लिए तैयार किए गए एक व्यापक यातायात और परिवहन योजना [पीडीएफ] के अनुसार, शहर की परिवहन आवश्यकताओं का केवल 30 प्रतिशत सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से पूरा किया जाता है। इसके विपरीत न्यूयॉर्क में सार्वजनिक परिवहन की भागीदारी 55 प्रतिशत है।

सार्वजनिक परिवहन की बदतर स्थिति

स्पष्ट रूप से सार्वजनिक परिवहन संयोजकता वर्तमान परिदृश्य में दोषपूर्ण है और इसे ठीक करने की आवश्यकता है लेकिन इस संबंध में भी कई चिंताजनक पहलू हैं।

2012 की राइट्स (आरआईटीईएस) रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो सहित रेल परिवहन का हिस्सा वाहन परिवहन प्रणालियों के बीच 1.5 प्रतिशत था, जबकि बसें 40 प्रतिशत से अधिक भागीदारी के साथ अग्रणी थीं।

उप-नगरीय (सब-अर्बन) रेल परिवहन प्रणालियों पर पूर्ण रूप से ध्यान केंद्रित करते हुए दक्षिण-पश्चिम रेलवे (एसडब्ल्यूआर) वर्तमान में बेंगलुरु में 30 मेमू और 44 डेमू सेवाओं सहित 100 ट्रेन सेवाओं का संचालन कर रहा है, जो प्रतिदिन 2 लाख छोटी दूरी के यात्रियों को सेवा प्रदान करता है।

वहीं दूसरी ओर चेन्नई उप-नगरीय रेल में प्रतिदिन 14 लाख लोग यात्रा करते हैं और मुंबई की उप-नगरीय रेल का उपयोग प्रति दिन 75 लाख से अधिक यात्रियों द्वारा किया जाता है। बेंगलुरु में चलने वाली 100 सवारी ट्रेन सेवाओं की तुलना में मुंबई प्रति दिन 2,342 ट्रेनें चलाता है।

कुल मिलाकर, बेंगलुरु की उप-नगरीय सेवा व रेलवे नेटवर्क वर्तमान में दैनिक 6 लाख यात्रियों को सेवा देता है। इसके विपरीत [पीडीएफ] न्यूयॉर्क मेट्रो में प्रतिदिन 54 लाख और लंदन ट्यूब में प्रतिदिन 1.02 करोड़ लोग सवार होते हैं।

मज़बूत रेल-जाल की आवश्यकता

बेंगलुरु मेट्रो के दूसरे चरण के लिए काम अपनी गति से जारी है (काम 2024 से पहले पूरा होने की उम्मीद नहीं है)। दूसरी ओर कई लोग मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ समेकित करके एक व्यापक उप-नगरीय रेल नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दे रहे हैं।

एक सकारात्मक संकेत है कि चीज़ें सही दिशा में आगे बढ़ने लगी हैं। कर्नाटक कैबिनेट ने जनवरी में बेंगलुरु उप-नगरीय रेल के दीर्घावधि से लंबित चार गलियारों को मंजूरी दे दी थी।

  • केंग्री से व्हाइटफिल्ड तक
  • केएसआर बेंगलुरु से राजनाकुंटे तक
  • नेलमंगला से बैयप्पनहल्ली तक
  • बैयप्पनहल्ली से हिल्लगेरे तक

जुलाई में राइट्स ने एक संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) प्रस्तुत की थी जो इस परियोजना पर अधिक स्पष्टता प्रदान करती है और इस योजना के संशोधित संस्करण को कर्नाटक कैबिनेट ने मंजूरी दी थी।

राइट्स का डीपीआर क्या प्रस्तावित करता है

राइट्स डीपीआर के अनुसार, 148 किमी में फैले उप-नगरीय रेल नेटवर्क में  57 रेलवे स्टेशन होंगे। नवंबर 2018 में प्रस्तुत योजना से इसमें 29 स्टेशन और 13 किलोमीटर की दूरी कम है।

कथित तौर पर यह संशोधन इसलिए किया गया है ताकि उप-नगरीय नेटवर्क सवारियों में बेंगलुरु मेट्रो के आकर्षण को कम न करे। पूर्व जेडी(एस)-कांग्रेस सरकार द्वारा स्वीकृत चार मार्गों में से एक ही बरकरार रखा गया। इस डीपीआर में चार गलियारे प्रस्तावित हैं-

  • केएसआर बेंगलुरु सिटी से देवनहल्ली- इस 41.4 किलोमीटर (किमी) लंबे मार्ग में आठ भूमि से ऊपरी स्तर (एलिवेटेड) और सात ज़मीनी स्तर के स्टेशन शामिल होंगे। इससे 2025 तक 2.82 लाख दैनिक सवारियों के यात्रा करने की अपेक्षा है।
  • बैयप्पनहल्ली से चिक्काबनावारा- मार्ग 25 किमी लंबा होगा और इसमें छह एलिवेटेड और आठ ज़मीनी स्तर के स्टेशन शामिल होंगे। इसके 2.03 लाख दैनिक सवारियों को आकर्षित करने का अनुमान है।
  • केंग्री से व्हाइटफील्ड- नौ स्टेशनों में से चार को एलिवेटेड होंगे। इस मार्ग पर कुल 1.64 लाख लोगों के दैनिक यात्रा करने की उम्मीद है।
  • हिल्लगेरे से राजनाकुंटे- चारों मार्गों में सबसे लंबा यह मार्ग 46.24 किमी लंबा होगा और इसमें 19 स्टेशन होंगे। इससे 3.34 लाख यात्रियों के यात्रा करने की उम्मीद है।

148.17 किमी फैले कुल मार्ग में से 55.57 किमी लंबा भाग एलिवेटेड होगा और बाकी ज़मीनी स्तर पर होगा। इस परियोजना की लागत लगभग 16,000 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। 19,500 करोड़ रुपये के पहले के अनुमान से यह लगभग 3,500 करोड़ रुपये कम है।

डीपीआर के महत्त्वपूर्ण बिंदु

इस संशोधित डीपीआर की प्रमुख विशेषताओं में से एक बेंगलुरु मेट्रो के साथ इसका एकीकरण है। इस विशाल उप-नगरीय नेटवर्क के कम से कम 10 मेट्रो स्टेशनों से जुड़ने की उम्मीद है, जैसे – मैजेस्टिक, यशवंतपुर, केंगेरी, कैंटोनमेंट, व्हाइटफील्ड, के आर पुरम, बैयप्पनहल्ली, ज्ञानभर्थी और नंदनहल्ली।

परियोजना को अतिरिक्त पटरियों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लगभग 101 एकड़ के भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी, जो इसकी मुख्य चुनौतियों में से एक है। कार्य की विशालता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि मार्गों के विभिन्न खंडों को निजी भवनों के अधिग्रहण के अलावा लाइन दोहरीकरण और विद्युतीकरण की आवश्यकता होगी जो परियोजना के दायरे में आते हैं।

रेलवे बोर्ड और कैबिनेट द्वारा स्वीकृति की अपेक्षा में यह डीपीआर भावी छह वर्षों के लिए योजना बताती है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार होता है, तो संचालन 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है।

राजनीतिक सक्रियता

हाल ही में, बेंगलुरु उप-नगरीय रेलवे पर राजनीतिक ध्यान गया है। रेल मंत्री पीयूष गोयल व्यक्तिगत रूप से मामले में रुचि ले रहे हैं। गोयल ने हाल ही में उप-नगरीय रेल नेटवर्क की कठिनाइयों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा सहित राज्य के नेताओं के साथ बैठक करने के लिए बेंगलुरु का दौरा किया था।

फरवरी में उन्होंने परियोजना को प्रभावित करने वाले गतिरोध को तोड़ने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से भी भेंट की थी। चर्चा के तहत भारतीय रेलवे 1 रुपये की टोकन राशि पर 6,000 करोड़ रुपये की भूमि देने पर सहमति दे चुकी है।

दक्षिण बेंगलुरु के सांसद तेजस्वी सूर्या भी इस परियोजना को लागू करने पर ज़ोर दे रहे हैं। 14 अक्टूबर को उन्होंने ट्वीट किया कि केंद्रीय बेंगलुरु के सांसद पीसी मोहन के साथ उन्होंने दक्षिण पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक के साथ भेंट करके उपनगरीय सुरक्षा अनुमोदन के लिए ज़ोर दिया।

उन्होंने बताया कि परियोजना को अगस्त में राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति दे दी गई थी और यह मामला अब नीति आयोग और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति के समक्ष लंबित है।

आगे की राह

बेंगलुरु के ट्रैफिक और आवागमन की समस्याओं का कोई त्वरित समाधान नहीं है, क्योंकि उप-नगरीय रेल नेटवर्क 2026 से पहले तैयार नहीं होगा और बहुप्रतीक्षित सिल्क बोर्ड से केम्पेगौड़ा हवाई अड्डे की लाइन के लिए 2023 की समय सीमा निर्धारित है।

इस बीच, विभिन्न मार्ग के यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों से मौजूदा मार्गों पर व्यस्त घंटों के दौरान ट्रेनों की आवृत्ति बढ़ाकर हर पाँच मिनट में करने का आग्रह किया है। कई बार तो दो ट्रेनों के बीच लगभग 3 घंटे का अंतर होता है।

उनका मानना है कि उप-नगरीय परियोजना के पूरा होने की प्रतीक्षा करने की बजाय बेंगलुरु को मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुकूलन की आवश्यकता है जो कि अपने आप में बड़ा लाभ दे सकता है। बेंगलुरु का उप-नगरीय रेल नेटवर्क का सार्वजनिक परिवहन कोअधिकारियों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक होना चाहिए क्योंकि इसके बिना यह शहर पटरियों से उतर सकता है।