भारती
शराब, जुए और काम-वासना के प्रति सजग करते, उपचार की विधि बताते कुरल- भाग 20

तिरुकुरल में 30 दोहे व्यक्ति को काम-वासना, शराब और जुए के प्रति सजग करने के लिए हैं। सी राजगोपालाचारी द्वारा कुछ चुने हुए दोहे प्रस्तुत हैं-

1. किसी स्त्री का झूठा आलिंगन जो पैसों के लिए अपना शरीर बेचती है, वह एक अनजान व्यक्ति के मृत शरीर को किसी अंधेरे कमरे में गले लगाकर सुख खोजने जैसा है।

पहले के समय में शराब राजस्व का आय का साधन नहीं थी। यह केवल उन लोगों के लिए थी जो अपना जीवन बर्बाद करना चाहते थे लेकिन इसे बेचने में किसी की रुचि नहीं थी। शराब पीने के बाद सुख की अनुभूति करने वालों की कुरल में सहानुभूतिपूर्ण निंदा की गई है।

2. किसी पियक्कड़ व्यक्ति को कारण बताना, किसी गहरे पानी में डूबे हुए व्यक्ति को ढूंढने के लिए प्रकाश को उपयोग करने जैसा है।

कारण का प्रकाश किसी पियक्कड़ के मस्तिष्क के अंधेरे को दूर नहीं कर सकता है, उसी प्रकार जैसे गहरे पानी तक रोशनी नहीं पहुँच सकती है। शराब के ज़हर ने उसे किसी भी कारण पर प्रतिक्रिया देने लायक नहीं छोड़ा है।

3. क्या कोई व्यक्ति अपने खाली समय में किसी पीये हुए व्यक्ति को देखकर समझेगा कि शराब कितना उन्माद करती है?

4. जो व्यक्ति छुपकर भी शराब पीता है, वह भी जल्द ही हँसी का पात्र बन जाता है क्योंकि पीने के प्रभाव अदिक दिन तक छुपे नहीं रह सकते।

5. जुए में यदि आप जीतते भी हैं तो भी इससे बचना चाहिए। जीतना दाने के लालच में मछली का जाल में फँसने के जैसा है।

6. जुए में हारने पर भी जुआ आपको अपनी पकड़ में रखता है जैसे कष्ट झेलने पर भी आपका जीवन के प्रति मोह रहता है।

उपचार की कला

7. ध्यानपूर्वक रोग का निरीक्षण करें, रोग की जड़ को पहचानें, सही उपचार पर विचार करें और फिर इसे कुशलतापूर्वक प्रयोग में लाएँ।

8. दवा बताने से पहले एक अच्छा चिकित्सक रोगी की शक्ति, उसकी बीमारी का फैलाव और मौसम पर विचार करता है।

9. अच्छे उपचार में चार चीज़ों का महत्त्व होता है- रोगी, चिकित्सक, इलाज और परिचारक।

मरीज़ व परिचारक के बीच समन्वय का महत्त्व उस समय भी चिकित्सक और दवा जितना ही था और ऐसा ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भी है।