भारती
काठमांडू के साथ संबंध सुधारने की प्रतिबद्धता को कैसे पूरा करेंगे भारतीय राजदूत क्वात्रा

काठमांडू के साथ नई दिल्ली अपने बिगड़े हुए संबंधों को फिर से बेहतर करना चाहता है और इसी दिशा में वरिष्ठ विदेश सेवा अधिकारी (आईएफएस) विनय मोहन क्वात्रा को अपने राजदूत के रूप में इस हिमालयी देश में नियुक्त किया गया है।

वहाँ पहुँचते ही क्वात्रा ने अपना कार्य भी शुरू कर दिया है। 5 मार्च को पहुँचकर उन्होंने सर्वप्रथम नेपाल की राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी के साथ परिचय स्थापित किया। इसके बाद अगले ही 24 घंटों में वे आधा दर्जन वरिष्ठ नेपाली राजनेताओं से मिले। काठमांडू के राजनीतिक समीक्षकों के अनुसार यह अभूतपूर्व है।

नेपाल की राष्ट्रपति से क्वात्रा की 5 मार्च को भेंट

नेपाली राजनेताओं में से भारतीय राजदूत उप-राष्ट्रपति नंदा बहादुर पन, राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष गणेश तिमिलसिना, उप-प्रधानमंत्री ईश्वर पोखरेल, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्षशेर बहादुर देउबा, विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली, ऊर्जा मंत्री बर्षा मन पन और नेपाल कम्युनिस पार्टी के नेता माधाव कुमार नेपाल। इसके बाद सप्ताह भर क्वात्रा ने कई नेपाली राजनेताओं और जनपद समाज के नेताओं से संबंध स्थापित किए।

काम करने के लिए क्वात्रा के पास बहुत कुछ है लेकिन जिन मामलों पर तुरंत कुछ होना चाहिए वे हैं- कालापानी क्षेत्रीय विवाद को सुलझाना और कई ऊर्जा व संयोजकता परियोजनाएँ जो भारत नेपाल में क्रियान्वित कर रहा है, उन्हें समय पर पूरा करवाना।

राजदूत के रूप में क्वात्रा की नियुक्ति बहुत महत्त्वपूर्ण है। 1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी क्वात्रा का आखिरी काम फ्रांस के राजदूत के रूप में था।

साउथ ब्लॉक (जहाँ विदेश मंत्रालय का कार्यालय है) के अधिकारियों ने स्वराज्य  को बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएन एससी) में हाल के समय में फ्रांस का समर्थन प्राप्त करने में क्वात्रा की अहम भूमिका रही है। साथ ही कई मुद्दों पर दोनों देशों के सहयोग से संबंधों को भी सुधारा गया।

“किसी राजदूत के करियर में यह आसाधारण है कि किसी महत्त्वपूर्ण यूरोपीय देश से नेपाल जैसे देश में स्थानांतरण कर दिया जाए। उनकी यह नियुक्ति वर्तमान सरकार की ‘पड़ोसी पहले’ नीति का महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है।”, एक वरिष्ठ विदेश मंत्रालय अधिकारी ने बताया।

क्वात्रा को काफी अनुभव है। उन्होंने कई यूएन एजेंसियों में सेवा दी है। वे अफ्रीका में भारतीय मिशनों पर रहे हैं, बीजिंग में एक मिशन के उपाध्यक्ष रहे हैं और बाद में वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में वाणिज्य मंत्री भी रहे हैं।

जुलाई 2013 और अक्टूबर 2015 के बीच क्वात्रा विदेश मंत्रालय के नीति नियोजन और शोध खंड के प्रमुख रहे थे और इसके बाद विदेश मंत्रालय में अमेरिकी विभाग के प्रमुख भी रहे थे जहाँ उन्होंने कैनडा और यूनाइटेड स्टेट्स से भारत के संंबंधों पर काम किया था।

नेपाली नेता उन्हें 2006 से 2010 के बीच उनके पाँच साल के कार्यकाल के लिए याद करते हैं जब वे काठमांडू स्थित सार्क सचिवालय में व्यापार, अर्थव्यवस्था और वित्त ब्यूरो के प्रमुख थे।

काठमांडू स्थित सार्क सचिवालय

नेपाली कांग्रेस नेता उदया शमशेर राणा ने काठमांडू से स्वराज्य  को बताया कि हमने कई बार क्वात्रा से बात की है और “उनमें अकादमिक समझ है, उन्हें नेपाल संबंधी विषयों का भरपूर ज्ञान है।”

फ्रांस में नेपाली राजदूत दीपक अधिकारी, जो पैरिस में क्वात्रा से संपर्क में रहे थे, ने द काठमांडू पोस्ट  से कहा कि क्वात्रा को भारत-नेपाल संबंधों और नेपाल की चिंताओं के जटिल विषयों की गहरी समझ है।

लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में संयुक्त सचिव के पद पर अक्टूबर 2015 से अगस्त 2017 के बीच का उनका कार्यकाल भारत-नेपाल संबंधों की त्वरित और आवश्यक पुनर्स्थापना के लिए आशा की किरण है। पीएमओ में कार्य के दौरान कहा जाता है प्रधानमंत्री से भीउनके संबंध थे और वे विदेश मंत्री एस जयशंकर के भी करीबी माने जाते हैं।

नेपाल से संबंध खराब होना 2015 में शुरू हुए थे जिसे नेपाली नेपाल ब्लॉकेड कहते हैं। इन्हें सुधारने का काफी प्रयास क्वात्रा के पूर्ववर्ती मंजीव सिंह पुरी ने किया था। पुरी ने नेपाल में कई ऊर्जा और संयोजकता परियोजनाएँ चालू की थीं और ज़मीनी स्तर पर काम किया था।

“क्वात्रा को अब इन प्रयासों को बड़ा और ठोस बनाना होगा। कालापानी मुद्दे को जल्दी सुलझाने के लिए उन्हें काम करना होगा और कुछ और मुद्दों को भी सुलझाना होगा जो द्विपक्षीय संबंधों में कड़वाहट का कारण बन गए हैं।”, विदेश मंत्रालय के अधिकारी पुरी ने कहा।

भारतीय राजदूत के सामने भारत के हितों को नेपाल में प्रोत्साहित करने की भी चुनौती रहेगी और वह भी ऐसे समय में जब इस हिमालयी देश में चीन का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। “नेपाल से संबंध सुधारने के लिए भारत पोषित परियोजनाओं जैसे पेट्रोलियम पाइरलाइन, पोस्टल रोड, बिजली तार और एकीकृत सीमा चेकपोस्ट को जल्द पूरा करना होगा।”, भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत दुर्गेश सिंह मान ने कहा।

“अंततः लोग वही वस्तु देखते हैं जो ज़मीनी स्तर पर उन्हें लाभ पहुँचाती है इसलिए इन परियोजनाओं को पूरा करना द्विपक्षीय संबंधों में उत्साह का संचार करेगा।”, सिंह ने बताया। उन्होंने आगे कहा कि कालापानी मुद्दे को सुलझाकर क्वात्रा ख्याति प्राप्त कर सकते हैं और साथ ही वे नेपाल के लोगों का हृदय भी जीत लेंगे।

क्वात्रा के सामने दूसरी चुनौती प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के साथ अच्छा कारगर संबंध स्थापित करने की भी है। माना जाता है कि प्रधानमंत्री बीजिंग के पक्षधर हैं। “ओली का विश्वास जीतना और उन्हें चीन की बाहों से दूर करना क्वात्रा का प्राथमिक कार्य होगा।”, विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा।

नेपाल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के अंतर्राष्ट्रीय विभाग के उप-प्रमुख विष्णु रीजल का कहना है कि अनसीपी नेताओं और मंत्रियों के साथ क्वात्रा की भेंट सकारात्मक रही है। “वे नेपाल को जानते हैं और हम आशा करते हैं कि हम द्विपक्षीय संबंधों को सुधार पाएँ।”, रीजल ने कहा।

बीबीआईएन प्रयास को लागू करने में नेपाल इच्छुक है और पीएमओ से अपने संबंधों का लाभ उठाकर क्वात्रा इस कार्य की गति बढ़वा सकते हैं। नेपाली नेताओं के अनुसार नए भारतीय राजदूत के लिए यह भी एक आवश्यक काम है।

विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यहाँ बहुत कुछ दाँव पर है। “भारत-नेपाल संबंधों में खट्टास आने के कई कारण हैं और स्थिति कुछ बेहतर हुईहै लेकिन फिर भी बहुत कुछ किया जाना शेष है जिससे ये पुनः 2015 से पहले के संबंधों की तरह दुरुस्त हो सकें।”, काठमांडू में रह चुके विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा।

उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि नेपाल एक महत्त्वपूर्ण पड़ोसी देश है और दक्षिण एशिया पर बीज़िंग के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश लगाने के लिए भारत के लिए इसका महत्त्व और भी बढ़ जाता है। कई स्तरों पर हमें नेपाल से संबंधों को बेहतर करना होगा।, उन्होंने आगे कहा।

भारतीय मिशन के लिए काठमांडू में क्वात्रा की नियुक्ति इन सभी बातों को ध्यान में रखकर की गई है। और इस नियुक्ति के साथ भारतीय राजदूत के पास एक महत्त्वपूर्ण कार्य आ जाता है जिसे पूरा करना आवश्यक है।

जयदीप मज़ूमदार स्वराज्य में सहायक संपादक हैं।