भारती
भारतमाला योजना के तहत सबसे आवश्यक मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर कार्य प्रगति रिपोर्ट

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला योजना का एक महत्त्वपूर्ण भाग है मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेसवे जिसे अगले तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा। वर्तमान में गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के तहत जो दिल्ली और मुंबई के बीच राजमार्ग है, उसपर काफी भीड़ रहती है इसलिए एक अलग मार्गरेखा पर एक नई सड़क बनाई जा रही है। माना जा रहा है कि 1,250 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे द्वारा 12 घंटों में यात्रा पूरी की जा सकेगी।

भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा करने वाला हरियाणा पहला राज्य बना जहाँ से इस एक्सप्रेसवे का लगभग 80 किलोमीटर लंबा अंश गुज़रेगा। वहीं दूसरी ओर राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है व भुगतान प्रक्रिया चल रही है। इन राज्यों से तुलनात्मक रूप से एक्सप्रेसवे का बड़ा भाग गुज़रेगा, क्रमशः 380, 120, 300 और 370 किलोमीटर लंबा।

परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार एक्सप्रेसवे की मार्गरेखा जान-बूझकर राज्यों के पिछड़े भागों से गुज़ारी गई है ताकि उन क्षेत्रों का भी विकास हो सके। हम देख सकते हैं कि एक्सप्रेसवे का मार्ग हरियाणा के मेवात, राजस्थान के दौसा और गुजरात के दाहोद से होकर गुज़रता है जो पिछड़े जिले माने जाते हैं।

इसी कारण पिछले वर्ष अनुमान लगाया गया था कि पिछड़े क्षेत्रों में भूमि मूल्य कम होने के कारण एक्सप्रेसवे हेतु भूमि अधिग्रहण में 16,000-20,000 करोड़ रुपये बचाए जा सकेंगे। जहाँ प्रति हेक्टेयर 7 करोड़ रुपये में भूमि अधिग्रहण की जाती है, वहीं गडकरी के अनुसार इस परियोजना हेतु कई स्थानों पर 80 लाख रुपये जैसे निम्न मूल्य पर भी 1 हेक्टेयर भूमि हासिल की गई है।

लेकिन वहीं दूसरी ओर हम पाते हैं कि इस कम मूल्य के कारण किसानों में असंतोष भी है। पिछले सप्ताह राजस्थान में दौसा के भंडारेज में राजमार्ग पर किसानों ने भूमि पर मिलने वाले मूल्य के विरोध में प्रदर्शन किया था और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आश्वासन के बाद ही शांत हुए।

एक्सप्रेसवे को मुख्यतः दो भागों में बाँटा गया है- दिल्ली से वडोदरा तक एक भाग और वडोदरा से मुंबई एक भाग। निर्माण को सुलभ बनाने के लिए दिल्ली से वडोदरा तक पाँच चरण होंगे और वडोदरा से मुंबई में तीन चरण। इन चरणों को भी विभिन्न पैकेजों में बाँटा गया है और पूरी परियोजना में 40 से अधिक पैकेज होंगे।

दिल्ली से शुरू होने वाले प्रथम चरण में भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है, दौसा में कार्यरत एक एनएचएआई अधिकारी ने स्वराज्य  को बताया। अभी टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है और अगले दो माहों में टेंडर वितरित कर दिए जाएँगे। राजस्थान-मध्य प्रदेश सीमा पर ताकली नदी से शुरू होने वाला 25 किलोमीटर लंबे भाग के लिए हाल ही में 650.24 करोड़ का टेंडर निकाला गया है।

वहीं दूसरी ओर वडोदरा से मुंबई वाले भाग पर निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। मई 2018 में वडोदरा से किम वाले भाग के टेंडर आवंटित किए गए थे। प्रतिष्ठित कंपनी एल एंड टी को 1,425 करोड़ रुपये में लगभग 23 किलोमीटर लंबा मार्ग बनाने का अनुबंध मिला था जिसमें छह फ्लाइओवर, दो पुल रेलवे लाइन के ऊपर, दो इंटरचेंज (मार्ग परिवर्तन विकल्प), तीन बड़े व आठ छोटे पुल एवं 1.6 किलोमीटर की संयोजक सड़क के साथ 18 अंडरपास होंगे।

एक और कंपनी आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर को वडोदरा-किम मार्ग में 355 से 378.74 की चेनेज तक 23.74 किलोमीटर का अनुबंध मिला है। इस भाग में भी दो पुल रेलवे लाइन के ऊपर, छह फ्लाइओवर, 18 अंडरपासऔर दो इंटरचेंज होंगे। इसके अलावा एक बड़ा पुल और नौ छोटे पुल भी होंगे। कंपनी की वेबसाइट पर जून 2019 तक की कार्य प्रगति के चित्र साझा किए गए हैं।

आईआरबी के प्रगति कार्य का चित्र 1

आईआरबी के प्रगति कार्य का चित्र 2

अक्टूबर 2018 में कुछ और अनुबंध भी दिए गए जहाँ पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर को सानपा से पादरा भाग में 32 किलोमीटर एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए 1,465 करोड़ रुपये का अनुबंध मिला। वहीं दूसरी ओर अशोका बिल्डकॉन को 13 किलोमीटर के लिए 1,687 करोड़ रुपये का अनुबंध मिला है।

जुलाई 2019 में भी कुछ अनुबंध दिए गए थे जिसमें पटेल इंफ्रा, आईआरबी और अशोक बिल्डकॉन के अलावा सद्भाव इंजीनियरिंग, ऐपको इंफ्रा, केसीसी, सीडीएस, गावर कंस्ट्रक्शन और इरकॉन को परियोजनाओं के कुछ पैकेज दिए गए। इनमें से अधिकांश पैकेजों को पूरा करने के लिए दो वर्ष का समय दिया गया है।

ऐपको इंफ्रा को इस परियोजना के दो पैकेज हरियाणा में मिले हैं। सोहना-गुरुग्राम सड़क पर अलीपुर गाँव के निकट से शुरू होने वाले 11.46 किलोमीटर लंबे पैकेज के लिए 1,217.22 करोड़ रुपये का अनुबंध दिया गया है। दूसरा अनुबंध 1,094 करोड़ रुपये का है जो 28.5 किलोमीटर लंबा है। यह केएमपी एक्सप्रेसवे से पहले शुरू होकर खानपुर घाटी तक होगा।

मई 2019 में अनुबंध मिलने की घोषणा के बाद इन कंपनियों को जुलाई में समझौता पत्र प्राप्त हुआ व बारिश के चलते अभी निर्माण कार्य नहीं शुरू हो पाया है, गावर कंस्ट्रक्शन में कार्यरत अधिकारी ने स्वराज्य  को बताया। उन्हें दौसा के निकट पैकेज 7 के अंतर्गत 183 से 214 के चेनेज यानी 29 किलोमीटर के अंश पर एक्सप्रेसेव निर्माण के लिए 946 करोड़ रुपये का अनुबंध मिला है।

अनुमान है कि दिल्ली को मुंबई से जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-8/48) व अहमदाबाद को वडोदरा से जोड़ने वाला राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (एनई-1) का आधा ट्रैफिक आकर्षित करेगा। 2025 तक 1,42,760 पीसीयू (कार यूनिट) के वार्षिक औसत प्रतिदिन ट्रैफिक का अनुमान लगाया है जिस कारण से 8-लेन एक्सप्रेसवे के निर्माण के निर्णय पर पहुँचा गया है। एक्सप्रेसवे का अधिकांश भाग रिजिड पेवमेंट होगा (आम भाषा में कॉन्क्रीट सड़क कहा जा सकता है) क्योंकि यह वित्तीय रूप से अधिक प्रभावी है।

कुल 90,000 करोड़ की लागत से बनने वाला यह एक्सप्रेसवे दिल्ली और मुंबई जैसे देश के दो प्रमुख माल उपभोक्ता शहरों को जोड़ेगा और रोजगार के नए अवसरों को भी उत्पन्न करेगा। साथ ही जयपुर-दौसा के मध्य विकसित एनएच-11 के माध्याम से दिल्ली-वडोदरा एक्सप्रेसवे जयपुर को भी एक्सप्रेसवे से जोड़ने का कार्य करेगा। इसके द्वारा कोटा, भोपाल और इंदौर जैसे देश के अन्य वित्तीय केंद्रों तक दिल्ली से यात्रा अवधि का भी घटाया जा सकेगा।

संभव है कि निर्माण पूरा होने के बाद यह विश्व का सबसे लंबा एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे (जिसमें प्रवेश व निकास नियंत्रित होता है) हो। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को ऐसे परिवहन मार्गों की आवश्यकता है और इन परियोजनाओं का पूरा होना अर्थव्यवस्था को बल भी देगा। परियोजना के 60 प्रतिशत से अधिक भाग के अनुबंध दिए जा चुके हैं। अगले दो-तीन माहों में सभी टेंडर वितरित किए जा चुके होंगे और तब तीव्र गति से शुरू होगा निर्माण कार्य।