भारती
डेफ-एक्सपो-2020 में प्रदर्शित होगी तकनीकी श्रेष्ठता, रक्षा उद्योग में घोषणाओं की अपेक्षा

आगामी 5 से 9 फरवरी तक लखनऊ में होने वाली डेफ-एक्सपो-2020 प्रदर्शनी रक्षा के क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पहल को तेज़ गति प्रदान करने वाली साबित होगी। अभी तक ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत किसी बड़े औद्योगिक अभियान की घोषणा नहीं हुई है।

संभावना इस बात की है कि इस प्रदर्शनी के दौरान ही या इसके आगे-पीछे पनडुब्बी, वायुसेना और नौसेना के लिए लड़ाकू जेट विमानों, हेलिकॉप्टरों और अन्य उपकरणों के समझौते होंगे, जिनमें देश के निजी क्षेत्र की भागीदारी होगी। ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ नाम से मशहूर इस योजना में अत्याधुनिक तकनीक का हस्तांतरण होगा। 

इस दौरान देश की सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा रक्षा-अनुसंधान से जुड़ी एजेंसियों और निजी क्षेत्र के उद्योगों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी लखनऊ में उपस्थित रहेंगे। भारत की योजना रक्षा-उद्योग में न केवल आत्म-निर्भरता प्राप्त करने की है, बल्कि इसके विश्व बाज़ार में प्रवेश की भी है।

आमतौर पर छोटे हथियारों का निर्यात भारत करता रहा है, पर अब संभवतः भारत और रूस के सहयोग से बनी ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात की शुरुआत होने जा रही है। पूरी तरह स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस के निर्यात की भी संभावनाएँ देखी जा रहीं हैं। इस सिलसिले में सरकार ने प्रक्रियात्मक परिवर्तन भी शुरू कर दिए हैं।  

विशालतम रक्षा-प्रदर्शनी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 फरवरी इसका उद्घाटन करेंगे। पहली बार यह प्रदर्शनी लखनऊ में हो रही है। अपने आकार और स्वरूप में यह 11वीं डेफ-एक्सपो देश की अब तक सबसे बड़ी रक्षा-प्रदर्शनी साबित होने वाली है। इसमें भारत सहित 70 देशों की करीब 1000 कंपनियाँ भाग ले रही हैं। इनमें 165 विदेशी कंपनियाँ हैं। इनके अलावा 35 देशों के सेनाधिकारी यहाँ आएँगे। कुछ की अपने उत्पादों के प्रदर्शन में दिलचस्पी है और कुछ की भारतीय तकनीक में दिलचस्पी है।

दो साल पहले 10वीं प्रदर्शनी में कुल 702 कंपनियों ने भाग लिया था। इस प्रदर्शनी का एक पोस्टर नीचे दिया हुआ है।

इस परिघटना के आसपास देश के निजी क्षेत्र और विश्व-प्रसिद्ध कम्पनियों के बीच भी समझौते होंगे। भारत अपने पी-75(आई) कार्यक्रम के अंतर्गत छह आधुनिकतम पनडुब्बियों के निर्माण का ठेका देने वाला है। 45,000 करोड़ रुपये के इस सौदे के लिए भारतीय भागीदारों का चयन हो गया है। अब विदेशी कंपनी का चयन होगा। इस परियोजना में तकनीकी हस्तांतरण होगा, जिससे भारत का रक्षा उद्योग एक कदम आगे बढ़ जाएगा।

इसके बाद 114 लड़ाकू विमानों के लिए भारतीय और विदेशी कंपनियों के चयन की घोषणा होगी। इनके अलावा विमानवाहक पोतों पर तैनाती के लिए लड़ाकू विमान भी चाहिए। संभावना इस बात की है कि इस डेफ-एक्सपो के दौरान या आसपास 83 तेजस विमानों के निर्माण का आदेश एचएएल को दिया जाएगा। इस तरह से रक्षा-प्रौद्योगिकी में यह एक लम्बी छलाँग लगाने की घड़ी है। 

उत्तर प्रदेश की पहल

आमतौर पर दिल्ली के प्रगति मैदान में लगने वाली यह प्रदर्शनी लखनऊ में पहली बार हो रही है। इसके पहले यह 2018 में चेन्नई और उसके पहले गोवा में लगी थी। रक्षा-उद्योग में उत्तर प्रदेश के आगमन का भी यह संकेत है, क्योंकि भारत सरकार ने उत्तर और दक्षिण भारत में जिन दो रक्षा-गलियारों की घोषणा की है, उनमें एक उत्तर प्रदेश का कॉरिडोर है। भारत सरकार उत्तर प्रदेश में रक्षा से जुड़ा मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना चाहती है। 

इस बार के डेफ-एक्सपो की थीम है ‘भारत-उभरता रक्षा विनिर्माण हब (इंडिया-द इमर्जिंग डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब।’ यह थीम 2018 की थीम जैसी ही है, जो एक प्रकार की निरंतरता को बताती है। इसीलिए इसबार की थीम के साथ एक सहायक थीम जोड़ी गई है, ‘सुरक्षा का डिजिटल रूपांतरण।’ भारत एक तरफ विनिर्माण के हब के रूप में प्रतिष्ठित होना चाहता है, वहीं तकनीक को उसके श्रेष्ठतम स्तर पर लाना चाहता है। 

उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक क्षेत्र का रक्षा-इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है। यहाँ लखनऊ, कानपुर, कोरवा और नैनी में एचएएल की चार यूनिटें पहले से काम कर रही हैं। इनके अलावा राज्य में नौ ऑर्डनेंस फैक्टरियाँ और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की गाजियाबाद इकाई काम कर रही है।

उत्तर प्रदेश रक्षा क्षेत्र में कुछ बड़े काम करना चाहता है। इसे देखते हुए 2018 में यह प्रस्ताव था कि 2019 का एयरो-इंडिया शो लखनऊ में किया जाए। कई प्रकार की व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए वह शो बेंगलूर में ही हुआ, पर लखनऊ को डेफ-एक्सपो-2020 मिल गया।

गत 1 फरवरी को तत्कालीन वित्तमंत्री ने आम बजट पेश करते हुए घोषणा की थी कि देश में दो रक्षा-कॉरिडोर बनाए जाएँगे। एक उत्तर प्रदेश में और दूसरा तमिलनाडु में। उत्तर प्रदेश का कॉरिडोर इन छह शहरों से गुजरेगा: अलीगढ़, आगरा, झाँसी, चित्रकूट, कानपुर और लखनऊ। इसी तरह तमिलनाडु का कॉरिडोर चेन्नई, कोयम्बत्तूर, होसूर, सेलम और तिरुचिरापल्ली से होकर जाएगा। 

विदेशी कंपनियाँ

लखनऊ में डेफ-एक्सपो के आयोजन की घोषणा पिछले साल की गर्मियों में ही कर दी गई थी, ताकि विदेशी कंपनियों को अपनी योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल गया। इसके पहले गोवा और चेन्नई में आयोजित प्रदर्शनियों के साथ दिक्कत यह हुई कि उनके कार्यक्रमों की घोषणा में काफी विलंब हुआ। उनके आयोजन स्थल और तारीखों का पता काफी देर से लगा।

अमेरिकी कंपनियों की प्रतिनिधि संस्था यूएस इंडिया बिज़नेस काउंसिल का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल डेफ-एक्सपो-2020 में रहा है। ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, स्वीडन, इसरायल जैसे उन्नत तकनीकी देशों का प्रतिनिधित्व इस प्रदर्शनी में होगा।

यूएस-इंडिया बिज़नेस काउंसिल की जनवरी 2020 में हुई एक बैठक

लखनऊ का प्रदर्शनी स्थल भी 2018 के चेन्नई शो के मुकाबले करीब 52 फीसदी बढ़कर 42,800 वर्ग मीटर हो गया है, जबकि चेन्नई के शो में 26,774 वर्ग मीटर स्थान था। दुनिया के 18 देशों के रक्षामंत्रियों और सेनाध्यक्षों के स्तर के अतिथियों ने अपने आगमन की पुष्टि भी कर दी है।

शो के दौरान अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर होने की आशा है। खासतौर से देश की रक्षा खरीद के संदर्भ में विदेशी और भारतीय कंपनियों के बीच उपकरणों के संयुक्त विकास और सह-निर्माण से जुड़े अनेक आशय पत्रों और समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीदें हैं। 

भारतीय उपकरण 

‘भारतीय पैवेलियन’ के मार्फत भारत थलसेना, वायुसेना और नौसेना से जुड़े अपने उपकरणों और सिस्टम्स के माध्यम से खुद को रक्षा निर्यातक के रूप में ब्रांड करेगा। इसके माध्यम से भारत के सार्वजनिक क्षेत्र की क्षमताओं को शोकेस किया जाएगा, साथ ही विभिन्न उपकरणों और सब-सिस्टम्स के निर्माण में देश के उभरते निजी क्षेत्र और बढ़ते सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों की भूमिका को भी रेखांकित किया जाएगा। 

भारत की इस भागीदारी में एचएएल, बीईएल, बीडीएल, बीईएमएल, एमडीएल, जीआरएसई, जीएसएल, एचएसएल, मिधानि, ऑर्डनेंस फैक्टरियों तथा ब्रह्मोस और डीआरडीओ के साथ-साथ निजी क्षेत्र के टाटा, लार्सन एंड टूब्रो, कल्याणी, महिन्द्रा तथा एमकेयू शामिल होंगे। बड़ी वैश्विक कंपनियों में लॉकहीड मार्टिन, बोइंग, साब, एयरबस, राफेल, रोसोबोरोनएक्सपोर्ट और बीएई सिस्टम्स तथा इसरायली सिबात शामिल होंगे। 

भारत का रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) करीब 500 उपकरणों और तकनीकों का लखनऊ में प्रदर्शन करेगा। एचएएल के प्लेटफॉर्मों में स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर ध्रुव, लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर, तथा डॉर्नियर नागरिक विमान डिस्प्ले पर होंगे।

भारत अपनी 155 मिमी एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन (एटीएजी) का भी प्रदर्शन करेगा। यह दूसरा मौका है जब भारत डीआरडीओ द्वारा अभिकल्पित और कल्याणी ग्रुप, टाटा पावर और ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड द्वारा निर्मित अपनी एटीजीएम का प्रदर्शन कर रहा है। 

और तकनीकी श्रेष्ठता 

भारत अपनी टैंक-निर्माण क्षमता का भी प्रदर्शन करेगा। भारत किसी न किसी रूप में अपने एसा (एईएसए) रेडार और पनडुब्बियों में लगने वाली एआईपी तकनीक की जानकारी भी देना चाहेगा, जो भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाएँगी। भारत अपनी 155 मिमी की तोप ‘धनुष’ का प्रदर्शन भी करेगा। इस प्रदर्शनी के माध्यम से भारत छोटे हथियारों के वैश्विक मानचित्र में अपने प्रवेश की घोषणा भी करेगा। 

भारत अपनी मिसाइल और रॉकेट विनिर्माण क्षमताओं को भी दुनिया के सामने रखेगा। इनमें ब्रह्मोस मिसाइलें शामिल हैं, जो सतह से आकाश, हवा से हवा और पानी से हवा में यानी हर प्लेटफॉर्म से दागे जाने की क्षमता रखती हैं। इसके अलावा आकाश मिसाइल सिस्टम है, जो डेफ-एक्सपो में आकर्षण का केंद्र होगा। पिनाक रॉकेट भी दर्शकों का ध्यान खींचेंगे। हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल भी इनमें शामिल हो सकती है। 

विदेशी कंपनियाँ खासतौर से लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनियाँ अपनी तकनीक का प्रदर्शन करेंगी। इनमें लॉकहीड मार्टिन का एफ-21 और एफ-35, बोइंग के एफ/ए-18 का सिम्युलेटर, और फ्रांसीसी राफेल का प्रदर्शन भी किसी न किसी रूप में होगा।  

इन सबके साथ भारत अब डेफ-एक्सपो के मौके का लाभ उठाते हुए रक्षा क्षेत्र में काम करने को उत्सुक नए स्टार्टअपों के लिए कार्यक्रमों की घोषणा कर सकता है। देश में रक्षा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयास चल रहे हैं। रक्षा खरीद में इनोवेशन को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों को तैयार किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय लखनऊ के शो के दौरान आईडेक्स (इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सेलेंस) के नए प्रारूप और स्टार्टअपों के लिए रक्षा नवोन्मेष हब की घोषणा कर सकता है।

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी स्वराज्य में सहयोगी लेखक हैं। वे @pjoshi23 द्वारा ट्वीट करते हैं।