भारती
गेहूँ कटाई के लिए कोरोनावायरस लॉकडाउन चुनौती, श्रमिकों की हो सकती है कमी

कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण 24 मार्च से 14 अप्रैल के बीच चल रहा देशव्यापी लॉकडाउन गेहूँ उगाने वाले क्षेत्रों के किसानों के लिए चिंता का कारण बन रहा है।

हालाँकि, चिंता केवल पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों की रहेगी जहाँ अगले पाँच से 21 दिनों के बीच फसल कटाई के लिए तैयार हो जाएगी। “मध्य प्रदेश और गुजरात में कोई समस्या नहीं है जहाँ फरवरी के अंत से ही गेहूँ की कटाई शुरू हो गई थी। अधिकांश ने गेहूँ कटाई पूरी कर ली है।”, दिल्ली में आटा चक्की चलाने वाले राज नारायण गुप्ता ने बताया।

मध्य प्रदेश के देवास में रबड़िया गाँव के सुनील मुखाटी ने कहा, “मैंने अपनी गेहूँ की कटाई पूरी कर ली है। इस वर्ष हमारी फसल अच्छी हुई है। समस्या सिर्फ यह है कि मंडियाँ बंद हैं।” अभी तक मध्य प्रदेश के इस किसान ने अपने घर में ही गेहूँ को संचित करके रखा है ताकी फसल वर्षा या अन्य मौसम-संबंधी समस्याओं से प्रभावित न हो।

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के उठने के बाद मुखाटी मंडियों के खुलने की प्रतीक्षा में हैं लेकिन उनकी समस्या यह है कि मध्य प्रदेश के 85 प्रतिशत कोविड-19 मामले अकेले इंदौर से हैं जो उनके गाँव से मात्र 50 किलोमीटर दूर है।

गुप्ता ने अपनी बात बात में आगे कहा, “पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में समस्या हो सकती है। कटाई के लिए किसानों को मजदूरों की आवश्यकता होती है। अधिकांश मजदूर बिहार से आते हैं जो अब वापस लौट चुके हैं।”

उत्तर प्रदेश इस समस्या से निपट सकता है क्योंकि बिहार उसके निकट ही है लेकिन पंजाब और हरियाणा के लिए समस्या बड़ी हो सकती है। हालाँकि पंजाब और हरियाणा के लिए एक आशा की किरण हो सकती है। इन दोनों राज्यों में 14 अप्रैल के बाद से ही कटाई होनी है।

“14 अप्रैल के बाद कटाई होगी। हमें नहीं पता कि लॉकडाउन हटाया जाएगा या सरकार की क्या योजना है। किसानों को कटाई के लिए अतिरिक्त श्रमिकों की आवश्यकता होगी और उसकी कमी हो सकती है।”, गुप्ता ने बताया।

इसके फलस्वरूप किसानों को श्रमिकों के लिए अधिक खर्च करना पड़ सकता है। “समस्या है कि लोग जब घर जाते हैं तो काम पर वापस जल्दी नहीं लौटते। जो मजदूर बिहार में अपने घरों को लौट गए हैं, उन्हें वापस लाना आसान नहीं है।”, दक्षिण भारत में आधारित एक आटा चक्की मालिक ने बताया।

“वर्षा के कारण इस वर्ष पंजाब के कुछ भागों में फसल में कुछ सप्ताहों की देरी हो गई है। अब अप्रैल के अंत तक कटाई हो सकती है।”, पंजाब के कृषि विशेषज्ञ डॉ सुमेश चोपड़ा ने कहा।

“इस वर्ष मेरी फसल में मौसम के कारण देरी हुई है। लेकिन फसल अच्छी हुई है और मैं अगले पाँच दिनों में कटाई की अपेक्षा कर रहा हूँ।”, उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में मसोई गाँव के जय किशोर सिंह ने बताया।

गुप्ता का मानना है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने परिस्थिति को अच्छे से संभाला है लेकिन अब देखना यह होगा कि लॉकडाउन के बाद प्रबंधन कैसा होगा। पिछले सप्ताह केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन से कृषि कार्यों को छूट दी थी। इसी प्रकार कृषि श्रमिकों, खरीद एजेंसियों और कर्मचारियों को भी छूट दी गई है। लेकिन समस्या बरकरार है।

पंजाब और हरियाणा के किसानों की मुख्य समस्या 4 लाख मजदूरों की है जो गाज़िबाद में या उसके आसपास रहते थे और अब बिहार लौट गए हैं। “इन श्रमिकों को घर लौटने के लिए विवश किया गया। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर व्यवस्था नहीं की गई तो वे लौट जाएँगे। सरकार के हाथ बंधे हुए थे।”, अनाम रहने की शर्त पर एक उद्योगपति ने कहा।

आशा की जा रही है कि लॉकडाउन के बाद ये लोगो लौटेंगे। एक ओर तो इस बात की स्पष्टता नहीं है कि लॉकडाउन कब उठेगा और दूसरी ओर मजदूरों के लौटने का समय भी अनिश्चित है। “संभवतः उत्तर प्रदेश बेहतर परिस्थिति में है क्योंकि बिहार निकट है और जितनी जल्दी हो सके यहाँ श्रमिक वापस लौट सकते हैं।”, उद्योगपति का कहना है।

विशेषज्ञ चोपड़ा कहते हैं कि कटाई प्रक्रिया अच्छे से हो यह सुनिश्चित करने के लिए पंजाब सरकार हर संभव प्रयास करेगी। “हम बिहार या उत्तर प्रदेश के मजदूरों पर आश्रित नहीं रह सकते। राज्य सरकार ने कम्बाइन हारवेस्टर चलाने का निर्णय लिया है और राज्य में पर्याप्त मशीनें हैं।”, चोपड़ा ने कहा।

“मुझे कटाई में कोई समस्या नहीं लगती क्योंकि हमारे गाँव में तीन-चार मशीनीकृत हारवेस्टर हैं।”, मसोई गाँव के सिंह ने बताया। उनके लिए लाभदायक यह है कि वे गेहूँ उगाने वाले किसानों के समूह का भाग हैं जो आईटीसी लिमिटेड के विकास कार्यक्रम के अधीन आता है।

आईटीसी किसान कार्यक्रम का एक चित्र

“हम कटाई या बेचने की समस्या के लिए डर नहीं रहे हैं। हमारे पास अपना गेहूँ बेचने के लिए कम से कम तीन विकल्प हैं, जिनमें से एक आईटीसी भी है।”, सिंह ने कहा।

मुखाटा ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक अपने खरीद कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है। “हमें आशा है कि लॉकडाउन के उठने पर यह घोषणा की जाएगी।”, उन्होंने कहा।

इस वर्ष आशंका है कि कई वस्तुओं का मूल्य कम रहेगा क्योंकि कोरोनावायरस के कारण आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। इस कारण से हो सकता है कि किसानों को कम मूल्यों और तनाव से बचाने के लिए केंद्र को न्यूनतम समर्थन कार्यक्रम के तहत अधिक गेहूँ की खरीद करनी पड़े।

पिछले वर्ष भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने देशभर के किसानों से 34.13 मिलियन टन (एमटी) गेहूँ खरीदा था। इस वर्ष आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए आश्चर्य नहीं होगा यदि सरकार 40 एमटी तक भी गेहूँ खरीदे।

कृषि मंत्रालय के अनुसार रबी मौसम (नवंबर से जनवरी) में 3.361 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूँ उगाया गया था। पिछले वर्ष 102.19 एमटी का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था। इस वर्ष अनुमान है कि यह आँकड़ा 110 एमटी के पार जा सकता है।

“अच्छी वर्षा के कारण इस वर्ष गेहूँ की उत्पादकता बढ़ी है।”, मुखाटी ने बताया। पिछले वर्ष उनके क्षेत्र के कई किसानों ने चना उगाया था। इसके अलावा गेहूँ भंडारण भी पर्याप्त और तय मात्रा से काफी अधिक है जैसा पिछले लेख में बताया गया था।

बड़े भंडार और होने वाले रिकॉर्ड उत्पादन से देश में बड़ी मात्रा में गेहूँ रहेगा। लेकिन किसानों, विशेषकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के किसानों की चिंता अगले कुछ सप्ताहों में होने वाली कटाई है।

कई किसान इसे लेकर आशावान हैं लेकिन जब तक ज़मीनी स्तर पर काम शुरू नहीं होता है, निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।

स्वराज्य के कार्यकारी संपादक एमआर सुब्रमणि  @mrsubramani के माध्यम से ट्वीट करते हैं।