भारती
भारत के सबसे गहरे बंदरगाह का निर्माण प्राकृतिक और राजनीतिक कारण से लटका

केरल में बहु-उद्देशीय गहरे समुद्री जल विज़िंजम बंदरगाह की अधिकार वाली कंपनी अडानी विज़िंजम पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (एवीपीपीएल) इस महीने में पहले चरण को पूरा करने के लिए मिली अपनी समय सीमा को पूरा करने से चूकने जा रही है।

5 दिसंबर 2015 को अडानी द्वारा शुरू किए गए निर्माण कार्य को 4 दिसंबर 2019 तक पूरा करने का अनुबंध केरल सरकार से किया गया था। आंशिक रूप से पब्लिक प्राइवेट साझेदारी पर आधारित यह परियोजना डिज़ाइन, निर्माण, फाइनेंस, क्रियान्वयन और ट्रांसफर (डीबीएफओटी) पर तय की गई है।

पहले चरण के पूरा होने में देरी का कारण एक राजनीतिक विवाद है। केरल में विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मार्क्सवादी- कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेतृत्व वाली वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) एवीपीपीएल को अपनी प्रतिबद्धता से बचने में सहायता कर रही है।

पिछले हफ्ते, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने मीडिया को बताया कि राज्य सरकार को इस परियोजना की समय सीमा पूरी होने के 120 दिनों की प्रारंभिक अवधि के समाप्त होने के बाद अडानी समूह से मुआवज़ा एकत्र करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के पास इस परियोजना की प्रगति के बारे में पूछताछ करने के लिए समय ही नहीं है। चेन्निथला ने एवीपीपीएल पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि कंपनी ने केवल सरकार के द्वारा आवंटित 5,071 करोड़ रुपये का उपयोग किया है और अपने स्वयं के पैसे खर्च नहीं किए हैं।

राज्य सरकार ने बंदरगाह के लिए 500 एकड़ जमीन भी आवंटित की है। 7,525 करोड़ रुपये की बंदरगाह परियोजना को 2015 में यूडीएफ कार्यकाल के दौरान शुरू किया गया था। पहले चरण को पूरा करने और पहले जहाज को बनाने के लिए परियोजना को 1,000 दिनों की समय सीमा मिली थी।

समझौते के प्रावधानों के अनुसार बंदरगाह के निर्माण के लिए एवीपीपीएल को परियोजना के पूरा न होने की समय सीमा पूरी होने के 120 दिनों के बाद प्रति दिन 12 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।

इससे बचने के लिए एवीपीपीएल ने राज्य सरकार को कई पत्र लिखे जिसमें से पहले तीन अनदेखे कर दिए गए थे, सूत्रों ने केरल कौमुदी  को बताया। चौथे पत्र के बाद सरकार ने मामले की सुनवाई के लिए एक समिति के गठन का निर्णय लिया है।

कोवलम, जहाँ परियोजना लाई जा रही है, के विधानसभा सदस्य एम विन्सेन्ट ने कहा कि बांध के निर्माण के लिए चट्टानों की अनुपलब्धता और 2017 में ओखी चक्रवात के कारण हुए नुकसान की आड़ में केरल सरकार एवीपीपीएल को बचाने की कोशिश कर रही है।

नवंबर 2017 में ओखी चक्रवात की तबाही से एवीपीपीएल के काम प्रभावित हुए थे और कंपनी द्वारा पूरा किए गए काम का एक बड़ा हिस्सा चक्रवात की चपेट में आने से बर्बाद हो गया था। इसके अलावा 2018 और 2019 की बाढ़ों ने भी परियोजना पर दुष्प्रभाव डाला।

दूसरी ओर एवीपीपीएल अपने हितों की रक्षा के लिए परियोजना समझौते में, “फोर्स मेज्योर”, खंड का उपयोग कर सकता है। “फोर्स मेज्योर” एक कानूनी प्रावधान है जो किसी व्यक्ति को उसके नियंत्रण से बाहर होने वाली घटना की स्थिति में संविदा के दायित्व से छूट प्रदान करता है।

उदाहरण के तौर पर, व्यापार में “फोर्स मेज्योर” का उपयोग अक्सर विक्रेताओं द्वारा किया जाता है, जब बंदरगाहों पर हड़ताल या खराब परिवहन जैसी घटनाओं के या खराब मौसम से जहाज की लदाई या भराई प्रभावित होती है।

एवीपीपीएल ने केरल सरकार को यह भी बताया कि ब्रेकवॉटर निर्माण के लिए लाइम्स्टोन की कमी के कारण वे अक्टूबर 2020 तक ही बंदरगाह को क्रियाशील कर पाएँगे।

ओखी चक्रवात के अलावा, कंपनी नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के एक निर्णय के कारण बांध निर्माण के लिए चट्टानों की कमी के लिए भी “फोर्स मेज्योर” प्रावधान का उपयोग करेगी।

पिछले साल दिसंबर में, एनजीटी ने पर्यावरण मंजूरी देने के लिए जिला विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (डीईएसी) की शक्तियों को छीन लिया था। दरअसल डीईएसी से एवीपीपीएल ने ब्रेकवॉटर के बांध निर्माण के लिए खदानों से पत्थर लेने की स्वीकृति ले ली थी।

इसके कारण एवीपीपीएल को अनुमति के लिए राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की और जाना पड़ा जिसमें समय लगा। फलस्वरूप, कोल्लम की खदान जो दिसंबर 2018 में चालू होनी चाहिए थी, इस साल जून से ही काम करना शुरू कर पाई।

एवीपीपीएल ने 21 खानों के लिए अनुमति मांगी थी। कोल्लम से खदान की चट्टानों को अनुमति मिलने में हुई देरी ने अन्य खदानों को मिलने वाली अनुमति में भी देरी की। अभी तक उन्हें मात्र तीन खदानों की अनुमति मिल पाई है।

निर्माण के लिए आवश्यक 60 लाख टन ग्रेनाइट की आपूर्ति में हुई समस्या की जानकारी एवीपीपीएल अधिकारियों ने बंदरगाह मंत्री कडन्नपल्ली रामचंद्रन को भी उनके अक्टूबर दौरे के दौरान दी थी।

बंदरगाह में बांध का निर्माण करना था जो लहरों की तीव्रता को कम करे। ये बांध 3.1 किलोमीटर लंबा होगा लेकिन अभी तक आधा भी पूरा नहीं हुआ है। बंदरगाह का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हुआ है और कंपनी के अधिकारियों को अगले साल अक्टूबर तक इसके चालू होने की उम्मीद है।

विज़िंजम भारत का सबसे गहरा बंदरगाह होगा जिसमें प्रस्तावित खंड 72 फीट तक गहरे होंगे। जब यह कार्य करना शुरू कर देगा तो बड़े जहाज़ों को सेवा देने में कोलंबो बंदरगाह को कड़ी प्रतिस्पर्धा देगा।

समुद्र में कच्चे तेल का टैंकर

हर मौसम में क्रियान्वित रहने वाला यह पोर्ट आज की तिथि में सबसे अधिक व्यवसाय की क्षमता रखता है। यह भारत का एकमात्र बंदरगाह है जिसमें कच्चे तेल, कंटेनर, ड्राई बल्क, ब्रेक बल्क, ऑटोमोबाइल और तरल कार्गो रखने और क्रियान्वित करने की सुविधा है। यह 40 लाख 20 फीट इक्विवेलेंट इकाइयों को सेवा देने में सक्षम है।

अडानी समूह ने बंदरगाह के डिज़ाइन, निर्माण और संचालन के लिए 40 साल की रियायत अवधि प्राप्त की है। 130 एकड़ आवश्यक भूमि को समुद्री भूमि को तैयार करके प्राप्त की गई है।

इससे पहले, इस परियोजना की जाँच सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सीएन रामचंद्रन नायर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग द्वारा की जा रही थी और नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) इस जाँच का अनुसरण कर रहे थे। ऐसे में एवीपीपीएल द्वारा हस्ताक्षरित कुछ समझौतों में कुछ कमियाँ पाई गईं थीं।

आयोग के निष्कर्ष में कोई भ्रष्टाचार नहीं पाया गया था और आयोग ने पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी को क्लीन चिट दे दी थी। यह भी कहा कि चांडी या परियोजना में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का सबूत कोई भी नहीं दे पाया।

एमआर सुब्रमणि स्वराज्य के कार्यकारी संपादक हैं। वे @mrsubramani के माध्यम से ट्वीट करते हैं।