भारती
क्या केरल की ईसाई महिलाएँ हैं आईएस गतिविधियों के लिए ‘लव जिहाद’ के निशाने पर?

बुधवार (25 सितंबर) को केरल पुलिस ने 19 वर्षीय छात्र को कथित रूप से 18 वर्षीय लड़की को नशा देकर उससे दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया। यह घटना कोझिकोड के सरोवरम बायोपार्क में 25 जुलाई को हुई थी।

इस गिरफ्तारी से केरल में दो कारणों से हो-हल्ला मचा है। एक यह कि वह छात्र मुस्लिम समुदाय का है जबकि लड़की ईसाई है। दूसरा यहा कि उन दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और छात्र उसपर कुछ समय से धर्मांतरण करने के लिए दबाव बना रहा था।

यह मामला तब ही सामने आया जब राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन ने इस विषय को गृहमंत्री अमित शाह तक पहुँचाया। कुरियन ने शाह द्वारा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) से ईसाई लड़कियों के इस्लाम में धर्मांतरण की जाँच की मांग की।

“दुष्कर्म करने के बाद छात्र ने कुछ सप्ताह पूर्व लड़की के अपहरण का भी प्रयास किया था। परिजनों की शिकायत के बावजूद पुलिस ने इसपर कुछ नहीं किया।”, कुरियन ने स्वराज्य  को बताया। “पुलिस ने छात्र को तब ही गिरफ्तार किया जब मैंने लड़की के मामले पर केंद्र को लिखा।”, उन्होंने कहा।

कोझिकोड के इस दुष्कर्म कांड के बाद फिर से ‘लव जिहाद’ पर विवाद छिड़ गया है। प्रायः प्रेम पाश में फँसाकर मुस्लिम युवकों द्वारा गैर-मुस्लिम युवतियों को इस्लाम कबूल करवाने को लव जिहाद कहा जाता है। अधिकांश मामलों में हिंदू युवतियों को निशाना बनाया जाता है।

“ईसाइयों को इस्लाम कबुलवाने के दो मामले मेरे सामने आए हैं। कोझिकोड ऐसा दूसरा मामला है।”, कुरियन ने बताया। पहला मामला उन्हें दिल्ली में एक महिला के माता-पिता से पता चला था जो अचानक से गायब हो गई थी।

“कोई अनुमान नहीं था कि वह किसी प्रेम संबंध में है। जब हमें शिकायत मिली तब वह दिल्ली से अबु धाबी के लिए विमान में चढ़ने वाली थी। संभवतः वह अबु धाबी पहुँच गई है।”, कुरियन ने कहते हुए बताया कि उससे अब संपर्क का कोई माध्यम नहीं बचा है।

शाह को लिखे पत्र में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ने ऐसे विधान की मांग की है जिससे इन धर्मांतरणों पर रोक लगाई जा सके और धर्मांतरित लोगों का आतंकी गतिविधियों के लिए प्रयोग न किया जाए।

कुरियन ने बताया कि ये धर्मांतरण “सोच-समझकर” किए गए हैं और पीड़ितों को ‘लव जिहाद’ से फँसाया जाता है। इस मामले से लगता है कि ईसाई समुदाय इस्लामी कट्टरपंथियों का आसान शिकार हैं और वे उनका उपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए भी करते हैं।

अपनी बात को सिद्ध करने के लिए वे केरल कैथोलिक बिशप परिषद द्वारा नियुक्त सांप्रदायिक एकता आयोग की रिपोर्ट की बात कहते हैं जहाँ बताया गया है कि 2006-09 तक 2,600 ईसाई लड़कियों ने इस्लाम कबूला है।

कुरियन ने बताया कि उनके पास हाल का कोई डाटा नहीं है लेकिन कोझिकोड में एक महिला ने उनसे शिकायत की है कि पिछले दो वर्षों में कम से कम 47 ईसाई लड़कियों का धर्मांतरण हुआ है। “केरल सरकार ने धर्मांतरण का डाटा इकट्ठा करना बंद कर दिया है।”, उन्होंने कहा।

2009 से 2017 तक ‘लव जिहाद’ एक विवादास्पद मामला था जब तक कि एनआईए ने सर्वोच्च न्यायालय को सौंपी रिपोर्ट में यह नहीं कहा था कि इसे ‘लव जिहाद’ के आरोपों का कोई आधार नहीं मिला। ईसाई युवतियों के इस्लाम में धर्मांतरण की बात तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ कोच्चि व तिरुवनंतपुरम में ईसाई प्रतिनिधियों की बैठक में पहली बार उठी थी।

सीरियाई स्वतंत्र ऑर्थोडॉक्स चर्च के बिशॉप मैथ्यू मार ग्रेगोरियस ने एक मीडिया संस्था को कहा था कि ‘लव जिहाद’ एक वास्तविकता है और समय आ गया है कि युवा इसके विरुद्ध खड़े होकर इससे लड़ें। उन्होंने बताया कि केरल के मालाबार क्षेत्र में ईसाई लड़कियों के इस्लाम में धर्मांतरण तो तंत्रीय समर्थन मिल रहा है।

2009 में ‘लव जिहाद’ शब्द अस्तित्व में आया जब केरल उच्च न्यायालय में चार ईसाई लड़कियों के माता-पिता ने उनकी लड़कियों में इस्लाम कबूलने के बाद बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दायर की थी। परिजनों का दावा था कि उन युवतियों का अपहरण किया गया था।

केरल उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। तत्कालीन डीजीपी जेकब पुन्नूज़ ने बताया था कि मुस्लिमों से विवाहित हिंदू और ईसाई लड़कियों का धर्मांतरण हो रहा है लेकिन इसे ‘लव जिहाद’ नहीं कहा जा सकता है।

कुरियन ने कहा कि उस समय सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) ने ‘लव जिहाद’ को सीधे रूप से नकार दिया था और पुन्नूज़ ने भी अपनी मुद्रा बदल दी थी। 2012 में पूर्व डीजीपी टीपी सेनकुमार ने केरल उच्च न्यायालय को सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि ‘लव जिहाद’ वास्तविकता है। लेकिन तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व में यूडीएफ सरकार ने इसे नकार दिया था।

केरल में समुदाय की युवतियों को धर्मांतरण से बचाने वाले ईसाई हेल्पलाइन मंच ने बताया कि हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण से अधिक लाभ ईसाई लड़कियों के धर्मांतरण में है। उदाहरण के लिए धर्मांतरण के बाद पासपोर्ट में ईसाई युवतियों के नाम परिवर्तित नहीं करने पड़ते हैं। इन युवतियों को यूरोपीय देशों में भेजा जा सकता है जहाँ वे सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती हैं, हेल्पलाइन के एक कार्यकारी ने बताया।

कुरियन आगे कहते हैं कि एर्नाकुलम की एक ईसाई महिला को तदियंतविदे नज़ीर नामक आतंकवादी से संबंधों के कारण गिरफ्तार किया गया था। जाँच में पता चला कि उस लड़की ने इस्लाम कबूल लिया था। कुरियन और केरल की अन्य संस्थाओं को भय है कि ईसाई युवतियों का धर्मांतरण कर उनका प्रयोग आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाएगा।

उदाहरण के लिए कुरियन बताते हैं कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) में सम्मिलित होने के लिए जो 21 लोग सीरिया और अफगानिस्तान गए हैं उनमें से पाँच ईसाई हैं। “इन महिलाओं का धर्मांतरण कर आईएस बेसों में भेजा जाता है फिर वे गायब हो जाती हैं।”, कहते हुए कुरियन ने बताया कि उन्हें ईसाई धर्मगुरुओं और समुदाय से ऐसे धर्मांतरण रोकने के लिए समर्थन मिल रहा है।

न ही कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेत-त्व में एलडीएफ और न ही कांग्रेस के नेतृत्व में यूडीएफ सरकार इसके समाधान के लिए कुछ किया। दोनों ही पार्टियों का केरल में मुस्लिम समुदाय आधार है जो कि जनसंख्या में 26 प्रतिशत है। वहीं दूसरी ओर ईसाइयों की जनसंख्या 19 प्रतिशत से भी कम है।

एमआर सुब्रमणि स्वराज्य के कार्यकारी संपादक हैं। वे @mrsubramani द्वारा ट्वीट करते हैं।