भारती
चीनी दूरसंचार विक्रेताओं को प्रतिबंधित करने का यह सही समय क्यों है

इआवसस्ते और पश्चिम-तुल्य दूरसंचार उपकरणों के कारण चीनी दूरसंचार उपकरणों की वैश्विक बाज़ार में बाढ़ आ गई है। यूरोपीय, अफ्रीकी और एशियाई प्रदाताओं को चीनी विक्रेता आपूर्ति करते हैं और भारत के कई नेटवर्कों में भी उनका प्रभुत्व है।

कम मूल्य के कारण चीनी विक्रेताओं ने भारत में राज किया, राज्य-स्वामित्व वाली दूरसंचार कंपनियों ने सबसे कम बोली के कारण उन्हें ही अनुबंध दिए। चीनी दूरसंचार विक्रेताओं की शुरुआत दरिद्र तकनीक से हुई थी लेकिन जल्द ही उन्होंने पश्चिमी उत्पादों को टक्कर देने के लिए विकास किया।

विकास करना सरल भी था क्योंकि चीन के पास एक बड़ी टीम, बहुत सारा पैसा था और उसपर प्रश्न खड़े करने वाला भी कोई नहीं था। दूरसंचार उत्पाद डिज़ाइन कठिन भी नहीं है यदि आप एक बार उसे समझ जाएँ।

सफलता इसपर निर्भर करती है कि डिज़ाइन समझ पाने के बाद आप उसे सस्ते दामों पर बाज़ार में बेच पाएँ। जब विक्रेता उस देश के हों जो अनुबंध विनिर्माण के लिए जाना जाता है तो विनिर्माण और भी आसान हो जाता है।

हमने रिवर्स इंजीनियरिंग शब्द का उपयोग नहीं किया है लेकिन कई दावे हैं जो बौद्धिक संपदा की चोरी की बात करते हैं, हालाँकि अधिकांश को बल या प्रलोभन से निपटा लिया गया। जब किसी विक्रेता को राज्य का समर्थन हो, घरेलू व्यापार सुनिश्चित हो, तो राजस्व प्रवाह बना रहता है जो विकास करके विदेशी बाज़ारों में पकड़ बनाने को बल देता है।

सीखना, चुराना, बिना आज्ञा के प्रवेश करना, यह सब एक अच्छी उत्पाद सूची बनाते हैं जब राजस्व प्रवाह जारी हो, विशेषकर बत जब आप किसी शेयरहोल्डर को उत्तरदायी न हों और सरकार आपका समर्थन कर रही हो।

इसी प्रकार चीनी उत्पाद उभरे हैं। तकनीकी रूप से संदेहास्पद शुरुआत, विवादास्पद आचरण और अति-संदेहशील उद्देश्य, विशेषकर भारत को लेकर, के कारण दूरसंचार क्षेत्र में चीनी उत्पादों का प्रभुत्व चिंता का विषय होना चाहिए। लघु से मध्यम अवधि में हमारी चिंता है सुरक्षा और दीर्घ अवधि में व्यापार व अस्तित्व का संघर्ष।

भारत में चीनी उत्पादों की यात्रा अद्भुत रही है। एक समय था जब चीनी विक्रेता प्रस्ताव निवेदन में कहते थे कि वे हर तकनीकी बात का ध्यान रखेंगे और सबसे कम मूल्य की बोली लगाते थे। दुर्भाग्यवश भारतीय दूरसंचार उद्योग तकनीकी दृष्टि से उपयुक्त नहीं है और अधिकांश निर्णय लेने वाले विक्रेता बाज़ार से ही तकनीक पर मत बनाते हैं।

वहीं एटी एंड टी के पास एटी एंड टी प्रयोगशालाएँ हैं, स्प्रिंट के पास एडवांस टेकनोलॉजी लैब्स हैं, ऑरेंज के पास ऑरेंज प्रयोगशालाएँ और एनटीटी के पास एनटटी प्रयोगशालाएँ लेकिन कोई भी भारतीय प्रदाता की कोई विश्वसनीय शोध प्रयोगशाला नहीं है जो विक्रेता के दावों की जाँच कर सके।

जो प्रयोगशालाएँ हैं वे आवश्यक स्तर की नहीं हैं। यह एक चुनौती है, विशेषकर तब जब प्रस्ताव निवेदन (आरएफपी) डिज़ाइन करना हो या उसका आँकलन। वर्तमान में आरएफपी पसंदीदा विक्रेताओं द्वारा डिज़ाइन किए जाते हैं और प्रतिक्रियाओं का आँकलन सिर्फ ऊपरी स्तर पर होता है। व्यापार के लिए इससे बुरा और कुछ नहीं हो सकता।

इस कारण से पिछले दशक में चीनी विक्रेताओं ने भारतीय दूरसंचार में प्रभुत्व स्थापित कर लिया। उन दुर्भाग्यवश दिनों से आज तक यही परिवर्तन हुआ है कि अब कई बार चीनी विक्रेता उच्च मूल्य पर भी आरएफपी जीत जाते हैं। हालाँकि जब आवश्यकता होती है तो वे व्यापार बनाए रखने के लिए अस्थाई हानि झेलकर भी कम बोली लगा देते हैं।

उनका विचार रहता है कि किसी नेटवर्क (प्रदाता) में घुस जाएँ और फिर वार्षिक रखरखाव अनुबंधों और अन्य ऑर्डर की उच्च मूल्य पर पुनरावृत्ति के माध्यम से कमा सकें। दूरसंचार प्रदाता के क्षेत्र में चीनी विक्रेता प्रतिस्पर्धा को दबाकर उभरकर आने में सफल हुए हैं।

4जी और 5जी तकनीकें हमारे घरों और उद्यमों में पूर्ण रूप से प्रवेश कर पाने में सक्षम हैं। वायरलेस तकनीक बड़ी संख्या के उच्च-बैंडविड्थ वाले उपभोक्ताओं को अच्छी सेवा नहीं दे सकती जब तक बेस स्टेशन आधे किलोमीटर के दायरे में न हो।

ऐसे में अल्ट्रा-ब्रॉडबैंड के कुशल क्रियान्वयन के लिए उसका घरों, कार्यालयों आदि स्थानों पर होना आवश्यक है। सुरक्षा की दृष्टि से यह एक चुनौती है। चीनी विक्रेता हैंडहेल्ड भी बेचते हैं जिसका अर्थ हुआ कि हैन्डहेल्ड, बेस स्टेशन, नेटवर्क का आईपी पुरजा, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और डाटा केंद्र सभी में चीनी उपकरण हैं, वह भी किसी एक चीनी कंपनी के ही।

इस प्रकार हम हर डाटा और मेटा-डाटा चीनियों के संमक्ष रख रहे हैं जो लज्जा की बात है। इसलिए यूएस 5जी में चीनी प्रवेश को प्रतिबंधित करने का विचार कर ठीक ही कर रहा है, यह तकनीकी श्रेष्ठता और व्यापार से बड़ी बात है, यह सुरक्षा की बात है।

तर्क दिया जा सकता है कि लेने-देन, आदि के डाटा को अनाधिकृत पहुँच से बचाया जा सकता है लेकिन हैन्डहेल्ड में पहुँच के कारण चीनी विक्रेता हमारे घर, कार्यालय आदि तक और उनके डाटा तक पहुँच सकते हैं।

चीनी ऐप के कारण समस्या और बढ़ गई है क्योंकि ये ऐप हमारे अपरिष्कृत डाटा को भी देख सकते हैं। 5जी के इंटरनेट ऑफ थिंग्स का यही नुकासन है कि चीनी विक्रेता बिना हैक किए ही हमारे घर, कार्यालय या सार्वजनिक उपकरणों को अपने अनुसार चला सकते हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स का प्रतीकात्मक चित्र

चीनी विक्रेता कहते आए हैं कि वे हमें परीक्षण के लिए उपकरण कोड दे देंगे। लेकिन चीन द्वारा तैयार कोड की करोड़ पंक्तियों का बिना सहयोग के निरीक्षण और चीनी भाषा में लिखे मैन्युअल के कारण लगभग असंभव है।

चीनी विक्रेता भारतीय संस्थानों के साथ मिलकर प्रयोगशाला स्थापित करने के लि एभी आगे आते हैं लेकिन उनका उद्देश्य केवल वैधता और स्वीकृति प्राप्त करना होता है। 5जी नेटवर्क में चीनी प्रवेश को स्वीकृति देकर आर्थिक दासता 2.0 को आमंत्रित करना होगा।

ईस्ट इंडिया कंपनी को राज करने के लिए भारत आना पड़ा लेकिन 5जी नेटवर्क में चीनी उपकरणों के कारण उन्हें तो भारत आने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। वे बीजिंग, शंघाई या शेनज़ेन से ही हमारा प्रबंधन करेंगे- अधिकांश अपने छद्म सर्वर के माध्यम से।

5जी अलग क्यों है?

5जी सिर्फ संचार तकनीक नहीं है, यह जीवनशैली बनने वाली है। एक गैर-लोकतांत्रिक देश जो हमारा विरोध भी करता है जिससे हम भूभाग के लिए युद्ध करके हार भी चुके हैं, की 5जी सेवा अवश्य ही हमारी जीवनशैली बदलेगी।

एक ऐसे आक्रमण की कल्पना करें जहाँ हमारे सभी डाटा को दुरुपयोग होगा, समय के साथ जो हमें चूस लेगी, बाधा उत्पन्न करेगी और यह सब बिना सीमा पार किए हुए। 5जी में सामग्री की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

उदाहरण देखें, 5जी बहु-पहुँच वाली ऐज कम्प्यूटिंग (एमईसी) पर आश्रित है जिसका अर्थ हुआ कि हैन्डहेल्ड के अलावा कोर रूटर और सर्वर भी खतरा होंगे। एमईसी मुख्य स्रोत है और यदि सभी उपकरण हमारे प्रतिद्वंद्वी देशे के हुए तो नेटवर्क से सबकुछ नियंत्रित किया जा सकता है।

ऐसे खतरे से निपटना भयावह होगा। 5जी पर काम कर रहा समूह मानता है कि उपभोक्ताओं पर विश्वसनीयता को अनायास ही स्वीकारा नहीं जा सकता है। इसलिए यही समय है कि चीनी कंपनियों को प्रतिबंधित किया जाए, अन्यथा बहुत देर हो जाएगी।

क्या किया जा सकता है?

समाधान को टुकड़ों में रखें, इलग-अलग विक्रेता अलग-अलग वस्तुएँ विकसित करे और गृह आधारित तकनीक उन टुकड़ों को एकीकृत करे। हमें एक उपयुक्त स्तर के गृह विकसित सॉफ्टवेयर की आवश्यकता है जो विभिन्न टुकड़ों को एकीकृत कर सके।

भारत में एकीकरण के अलावा यह भी आवश्यक है कि उपभोक्ता के पास जो उपकरण हैं, वे चीनी न हों- टुकड़े पहले ही चीनी हैं जिसका अर्थ हुआ कि जब तक उपभोक्ता के पास वाला उपकरण डाटा सुरक्षित करने में सक्षम न हो, ताकि अभी के लिए तो हम एक प्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।

साथ ही हमें भारत आधारित टुकड़ों को भी विकसित करने का कार्य करना होगा। पूर्ण रूप से भारतीय रूटर और पहुँच के लिए स्विच व नेटवर्क का कोर हो। अतुल्य सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता से उपयुक्त स्तर का सॉफ्टवेयर विकसित हो जो दूरसंचार उपकरणों को चालित और प्रबंधित कर सकें।

सुरक्षा और स्तर को बनाए रखने के लिए विभिन्न विक्रेताओं के उपकरण लें, उसे अपने सॉफ्टवेयर से जोड़ें और जब तक हम पूर्ण रूप से स्वदेशी न बन जाएँ, तब तक इससे काम चलाएँ। ढेर में कम से कम डाटा रखें, आदर्श रूप से केवल ऑप्टिकल और एसडीएन।