भारती
चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे पर सरकार के विशेष ध्यान संग आएगा औद्योगिक विकास

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने द्वितीय केंद्रीय बजट में बहु-विलंबित चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे परियोजना की शुरुआत की घोषणा की।

“राजमार्गों का त्वरित विकास किया जाएगा। इसके अंतर्गत 2,500 किलोमीटर लंबे पहुँच नियंत्रित एक्सप्रेसवे, 9,000 किलोमीटर के आर्थिक गलियारे, 2,000 किलोमीटर लंबे तटीय राजमार्ग और 2,000 किलोमीटर के नीतिगत राजमार्गों को विकसित किया जाएगा।”, वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने बजट वक्तव्य में कहा।

सीतारमण ने आगे कहा कि 2023 तक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तैयार हो जाएगा और चेन्नई-बेंगलुरु गलियारे पर कार्य जल्द ही शुरू होगा। “दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और दो अन्य पैकेजों का काम 2023 तक पूरा हो जाएगा। चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे पर कार्य भी शुरू किया जाएगा।”, उन्होंने कहा।

चेन्नई-बेंगलुरु परियेजना संभवतः अगले तीन माहों में शुरू हो जाएगी। भूमि अधिग्रहण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, केवल तमिलनाडु के कुछ भागों में यह शेष है।

मार्ग, मार्गरेखा और इसके लाभ

कर्नाटक के होसकोटे से शुरू होने वाले चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे का 75.64 किलोमीटर लंबा भाग कर्नाटक में पड़ेगा और 88.3 किलोमीटर आंध्र प्रदेश में। तमिलनाडु में श्रीपेरंबदुर पर समाप्त होने से पहले यह तिरवल्लुर, कांचीपुरम और वेल्लोर जिलों से गुज़रते हुए 98.32 किलोमीटर की दूरी तय करेगा।

चेन्नई को बेंगलुरु से जोड़ने के लिए वर्तमान में दो मार्ग हैं- एक होसकोटे, कोलार, चित्तूर, रानीपेट और कांचीपुरम से गुज़रता हुआ 335 किलोमीटर लंबा मार्ग और दूसरा मार्ग 372 किलोमीटर लंबा है जो इलेक्ट्रॉनिक सिटी और होसुर से गुज़रकर जाता है।

गूगल मैप्स द्वारा दिखाए जा रहे दो मार्ग विकल्प

चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे की प्रस्तावित मार्गरेखा इन दोनों मार्गों के बीच से होकर गुज़रती है। कुल 22 किलोमीटर की लंबाई वाले दो प्रस्तावित एलिवेटेड (भूमि से ऊपरी स्तर पर) एक्सप्रेसवे चेन्नई तक अंतिम मील की संयोजकता देंगे।

इस परियोजना के बनने से बेंगलुरु और चेन्नई के बीच की वर्तमान सड़कों पर से वाहन भार कम होगा। प्रतिदिन लगभग 9,500 कार इकाइयाँ दोनों शहरों के बीच यात्रा करतीं हैं।

यह परियोजना दोनों शहरों की दूरी को लगभग 80 किलोमीटर से कम करेगी। वर्तमान में तमिलनाडु के कृष्णगिरी से होते हुए बेंगलुरु और चेन्नई के बीच की दूरी 345 किलोमीटर है।

262 किलोमीटर लंबी इस एक्सप्रेसवे परियोजना को पाँच चरणों में पूरा किया जाएगा- बेंगलुरु से कोलार, कोलार से पलमनेर, पलमनेर से चित्तूर, चित्तूर से कांचीपुरम और कांचीपुरम से श्रीपेरंबदुर।

8-लेन वाले इस एक्सप्रेसवे पर गाड़ियाँ 120 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम सुझावित गति से चल सकेंगी। दोनों शहरों के बीच की यात्रा को वर्तमान छह घंटे की बजाय आठ घंटों में पूरा किया जा सकेगा।

भूमि अधिग्रहण

भूमि अधिग्रहण अंतिम चरणों में पहुँच चुका है। दिसंबर 2018 तक केंद्र निर्माण-पूर्व गतिविधियों पर 1,370 करोड़ रुपये खर्च कर चुका था। इसके अलावा 600 करोड़ रुपये का भुगतान भूमि के लिए भी किया जा चुका है।

परियोजना से जुड़े अधिकारी का कहना है कि जब सरकार ने त्वरित गति से काम को आगे बढ़ाने का निर्णय ले लिया है तो भूमि के स्वामियों को भूमि का मुआवज़ा अगले तीन माहों में दे दिया जाएगा।

इस परियोजना की अनुमानित लागत 17,900 करोड़ रुपये है और इसके लिए 2,650 हेक्टेयर का भूमि अधिग्रहण आवश्यक है।

किसी भी एक्सप्रेसवे परियोजना को शुरू करने से पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि कम से कम भूमि अधिग्रहण का 80 प्रतिशत काम पूरा हो जाए।

एनएचएआई का एक कार्यक्रम

2,600 हेक्टेयर की आवश्यक भूमि में से 800 हेक्टेयर भूमि कर्नाटक में है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है व 80 प्रतिशत लोगों को मुआवज़ा भी दिया जा चुका है। तमिलनाडु में भी यह जल्द ही पूरा हो जाएगा।

भूमि अधिग्रहण के पूरा हो जाने के बाद एनएचएआई मिश्रित वार्षिकवृत्ति के रूप में भावी कंशेसनरों को टेंडर के लिए आमंत्रित करेगा। टेंडर निकाले जाने के नौ महीनों में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। सड़क निर्माण के लिए लगभग तीन वर्षों का समय लगेगा।

औद्योगिक गलियारा

कई आर्थिक स्थानों से गुज़रने के कारण इस परियोजना की पहचान महत्त्वपूर्ण ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेसवे के रूप में की गई है और यह चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारे (सीबीआईसी) के विकास के लिए आवश्यक है।

सीबीआईसी के निकट चयनित औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने के लिए जापान अंतर्राष्ट्रीय समन्वय एंजेंसी (जिका) ने विस्तृत योजना बनाई है। यह गलियारा चेन्नई, श्रीपेरंबदुर, पोन्नापंतंगल, रानीपेट, वेल्लोर के उप-नगरीय क्षेत्र, बंगारुपलेम, पलमनेर, बंगारपेटे, होसकोटे और बेंगलुरु में विकसित किया जाएगा।

दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे की तर्ज पर सीबीआईसी डिज़ाइन किया जा रहा है। इस गलियारे के आसपास उद्योग के लिए विश्व-स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर की योजना बनाई जा रही है।

दीर्घ अवधि में सीबीआईसी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है जो अगले 20 वर्षों में 2.2 करोड़ अतिरिक्त रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगा।

चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे से बड़े उद्योगों सहित लघु और मध्यम उद्योगों को भी लाभ पहुँचाया जाएगा। इसमें इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल, वस्त्र और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उद्योगों को प्रोत्साहित करके निर्यात बढ़ाने का प्रयास है।

केरल तक विस्तार

सीबीआईसी का विस्तार कोयंबतूर के रास्ते केरल के कोच्चि तक करने के लिए 15 जनवरी को राज्य कैबिनेट ने 1,351 एकड़ भूमि के अधिग्रहण का निर्णय लिया। पलक्कड़ में इस परियोजना को विकसित करने के लिए केरल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश फंड बोर्ड द्वारा दिए गए 1,038 करोड़ रुपये का प्रयोग किया जाएगा।

160 किलोमीटर लंबे इस आर्थिक गलियारे के लिए सरकार को विश्वास है कि 10,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 10,000 रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। इस क्षेत्र में भी खाद्य प्रसंस्करण, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के विकास का ही विचार है।

केरल तक औद्योगिक गलियारे के विस्तार से केरल के एर्नाकुलम, पलक्कड़, थ्रिसुर, कन्नूर, कोझिकोड़े और कासरगोड़ जिलों के विकास में तेज़ी आएगी। रहवासी क्षेत्र, होटल, पर्यटन केंद्र, आईटी पार्क और महाविद्यालय भी इस परियोजना का भाग होंगे।


चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे की परिकल्पना 10 वर्षों पहले की गई थी और अंततः 2018 में इसे स्वीकृति मिली। यह एनएचएआई के 3.1 लाख करोड़ रुपये की 22 ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेसवे परियोजना का भाग है। 2,250 किलोमीटर लंबे छह एक्सप्रेसवे 1.45 लाख करोड़ रुपये की लागत से और अन्य 16 एक्सप्रेसवे कुल 5,250 किलोमीटर की लंबाई के 1.65 लाख करोड़ रुपये की लागत से बनाए जाएँगे।

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेसवे पिछड़े क्षेत्रों से गुज़रते हैं और वे ब्राउनफिल्ड परियोजनाओं से बेहतर इसलिए होती हैं क्योंकि इनमें भूमि अधिग्रहण, सेवाओं के स्थानांतरण जैसी चीज़ें कम चुनौतीपूर्ण होती हैं।

अभी के लिए व्यापारी वर्ग में दक्षिण भारत के इन दो राज्यों की राजधानियों के बीच बनने वाले एक्सप्रेसवे के प्रति उत्साह है। व्यापार क्षेत्र के सक्रिय कार्यकर्ता सज्जन राज मेहता के अनुसार इससे वाणिज्य और व्यापार को बल मिलेगा।