भारती
कैसे रेल परियोजना का विस्तार पूर्वोत्तर में संयोजकता को बल देगा

प्रसंग- पूर्वोत्तर हेतु रेल परियोजना पर एक नज़र।

प्रायः भारतीय मुख्यभूमि से अलग माने जाने वाले पूर्वोत्तर में अगले तीन वर्षों में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास देखने को मिलेगा क्योंकि केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया है कि रेल मंत्रालय 6.48 लाख करोड़ की 491 परियोजनाओं को क्रियान्वित करने की योजना बना रहा है। बहुप्रतीक्षित बोगीबील पुल के निर्माण से लेकर बजट में पूर्वोत्तर के लिए अनुदान वृद्धि तक हम इस क्षेत्र के विकास में मोदी सरकार की रुचि को समझ सकते हैं। ऐसी ही अन्य परियोजनाएँ विकासशील हैं।

योजना के प्रमुख बिंदु

  • 189 नई रेल लाइनें बिछाने के साथ ही 55 मीटर-गेज पटरियों को ब्रॉड-गेज में परिवर्तित किया जाएगा। इसके अलावा, दोहरा ट्रैक बिछाना और 2022 तक राज्य की राजधानियों को जोड़ने वाली मुख्य लाइनों का विद्युतीकरण करने लक्ष्य रखा गया है।
  • सभी परियोजनाएँ नियोजन, अनुमोदन और निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं।
  • इस वर्ष मार्च तक, नई पटरियों को बिछाने,मौजूदा लाइनों को मजबूत करने और क्षेत्र में विभिन्न रेल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर 1.43 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

तवांग रेल परियोजना

अरुणाचल प्रदेश में 378 किलोमीटर लंबी भलुकपोंग-तेंगा-तवांग, 248 किलोमीटर लंबी बामे-आलो-सिलापथर और 227 किलोमीटर लंबी पसीघाट-तेजु-परसुराम कुंड-रुपाई प्रस्तावित रेल लाइनें हैं लेकिन नीतिगत दृष्टि से आवश्यक महत्वाकांक्षी तवांग रेल लिंक को प्राथमिकता पर रखा गया है। इसकी निम्न विशेषताएँ हैं-

  • प्रस्तावित रेल मार्ग 166 किलोमीटर लंबा होगा।
  • रेल लाइन 10,000 फीट तक की ऊँचाई से गुज़रेगी।
  • लगभग 80 प्रतिशत ट्रैक सुरंगों से होकर गुज़रेंगे, जिनमें से सबसे लंबी सुरंग 29.48 किलोमीटर की होगी।
  • पर्यटन को बढ़ावा देने के अलावा, यह रेल लाइन अंतर-राष्ट्रीय सीमा पर सैनिकों और सैन्य गतिविधियों को तेज़ी से आवागमन की सुविधा भी प्रदान करेगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया  की रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना का सर्वे कार्य अभी चल रहा है। सर्वे खत्म होने के बाद इस पर तेज़ी से काम शुरू किया जाएगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह परियोजना छह-सात साल में पूरी हो जाएगी।

गंगटोक रेल परियोजना

अगली मुख्य परियोजना है जो सिक्किम की राजधानी गंगटोक को जोड़ेगी और अभी निर्माणाधीन है। इस परियोजना हेतु भूमि अधिग्रहण में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसकी निम्न निर्माण विशेषताएँ हैं-

  • 112 किलोमीटर का ट्रैक उत्तर बंगाल में सेवोक को गंगटोक से जोड़ेगा और खड़ी चढ़ाई वाले क्षेत्र व तीस्ता नदी घाटी से होकर गुज़रेगा।
  • रेल की पटरियाँ कई सुरंगों और 200 से अधिक पुलों से होकर गुज़रेंगी। 2024 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है।

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में रेल मंत्री गोयल ने बताया कि इस परियोजना का प्रथम चरण स्वीकृत किया जा चुका है। इसमें पहले चरण में सिक्किम के सेवोक से रंगोप्पो तक रेल लाइन बिछाई जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि प्रथम चरण 2020 तक पूरा हो जाएगा। सिक्किम की इस परियोजना के मसौदे को पर्यावरण मंत्रालय में मंजूरी के लिए भेजा गया है।

मणिपुर रेल परियोजना

जिरीबाम-तुपुल- इंफाल के बीच बनने वाली इस परियोजना से उत्तर-पूर्व के पाँच राज्यों से रेलवे को जोड़ा जाएगा। इस रेल परियोजना में सर्वाधिक रेल सुरंगें है, जिसमें 65 प्रतिशत पर कार्य पूरा हो चुका है। 111 किलोमीटर लंबे मार्ग में 52 सुरंगें और 149 पुल होंगे और यह मार्ग 10 स्टेशनों से होकर गुज़रेगा। जिरीबाम से वैंगैचुंगपाव तक 10 किलोमीटर का भाग बनकर तैयार भी हो चुका है।

जिरीबाम परियोजना में निर्माणधीन सुरंग

इस परियोजना में जो पुल बनाया जा रहा है, उनमें से एक दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पुल होगा जिसकी ऊँचाई क़ुतुब मीनार से लगभग दोगुनी होगी। इस परियोजना के 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है। उसके बाद, इंफाल की लाइन को भारत-म्यांमार सीमा पर मोरेह तक विस्तारित किया जाएगा, जहाँ से फिर इसे महत्वाकांक्षी ट्रांस-एशियन रेलवे लाइन का हिस्सा बनाने के लिए म्यांमार तक बढ़ाया जाएगा।

निर्माणाधीन सबसे ऊँचा रेल पुल

संयोजकता की दृष्टि से परियोजना की महत्ता-

  • इस परियोजना के क्रियान्वित होने से बिहार के किशनगंज और पूर्वोत्तर के पाँच राज्यों की सीमा एकसाथ जुड़ जाएगी।
  • जिरीबाम मणिपुर का सबसे उभरता हुआ शहर है। इस परियोजना की पूरी होने से वहाँ व्यापार बढ़ेगा।

मिज़ोरम रेल परियोजना

भैरवी-सारंग रेल लाइन पर बनने वाली इस परियोजना को भी 2021 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 51 किमी तक पटरी बैठाने समेत 7 पुल और 23 सुरंग बनाने का काम इसी साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

भैरवी-सारंग मार्ग पर निर्माण कार्य

मिज़ोरम की राजधानी आइज़ोल को रेल से जोड़ने का लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और पहाड़ी शहर के अंत तक देश की रेल संयोजकता के 2021 तक पहुँचने की उम्मीद है।

नागालैंड रेल परियोजना

राज्य की राजधानी कोहिमा के पास दीमापुर (वर्तमान में नागालैंड का एकमात्र रेलमार्ग) से जुज़्बा तक 82.5 किलोमीटर लाइन बिछाने का 25 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। दीमापुर-जुज्बा के बीच शुरु हुई इस परियोजना को तीन चरणों में निष्पादित किया जाएगा।

नागालैंड के जुज़्बा में निर्माण कार्य

रेल मंत्री गोयल ने एनएफआर अधिकारियों से कहा है कि वे इस रेल लिंक पर प्रगति के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए नागालैंड सरकार के साथ बैठक करें। इस योजना में पहले ही बारिश और मॉनसून और भूस्खलन के कारण निर्माण में काफी देरी हो चुकी है।

वहीं, ईस्टर्न मिरर  की रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना की पहली सुरंग पिछले महीने ही तैयार हो चुकी है। 82.3 किलोमीटर की इस परियोजना में 20 सुरंगें तैयार की जाएँगी। बाकी बची 19 सुरंगों को भी बहुत जल्द ही तैयार करने की बात अधिकारियों ने कही।

मेघालय रेल परियोजना

मेघालय में ब्यरनीहाट के लिए रेल लिंक को राज्य में विभिन्न संगठनों से निरंतर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे ने इस प्रस्तावित लिंक को राज्य की राजधानी शिलॉन्ग तक विस्तारित करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन राज्य के कई संगठन इसके विरोध में उतर चुके हैं। मेघालय के आदिवासियों को डर है कि रेल लिंक से अन्य राज्यों से असंख्य लोग वहाँ आएँगे। 108.4 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर मात्र 5 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है।

इन परियोजनाओं के विषय में रेल मंत्री गोयल ने बताया कि किसी भी रेलवे परियोजना का समय पर पूरा होना विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है जैसे, राज्य सरकार द्वारा त्वरित भूमि अधिग्रहण, वन मंजूरी, उल्लंघनकारी उपयोगिताओं (दोनों भूमिगत और भूमिगत) का स्थानांतरण और विभिन्न प्राधिकरणों से वैधानिक मंजूरी।

उन्होंने कहा, “राष्ट्र के समग्र हित और परियोजनाओं को बिना किसी अतिरिक्त लागत के समय पर पूरा करने के लिए रेलवे में विभिन्न स्तरों पर बहुत सारी निगरानी की जाती है।” उन्होंने आगे कहा कि रेलवे ने प्रोत्साहन प्रदान करने की प्रणाली को अपनाया है जहाँ निजी ठेकेदारों को समय पर कार्य पूरा करने पर एक बोनस दिया जाता है।