भारती
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे कैसे ले रहा आकार और रक्षा गलियारे को कैसे मिलेगा इसका लाभ

पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश को चौथे एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का शिलान्यास चित्रकूट में किया। 290 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता में आने के कुछ महीनों बाद अप्रैल 2017 में ही दे दिया था।

नाम के अनुसार यह एक्सप्रेसवे प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र से गुज़रता है। यह चित्रकूट जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-35 यानी वाराणसी-बांदा रोड पर भरतकूप से शुरू होता है और इटावा जिले में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर कुदरैल गाँव के निकट समाप्त होता है।

चित्रकूट के आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ जाने से इसकी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से संयोजकता बढ़ेगी क्योंकि 302 किलेमीटर लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे पहले से ही चालू हैं।

उत्तर प्रदेश में इन दोनों एक्सप्रेसवे के कारण पहले से ही देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे नेटवर्क है और तीसरा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे भी 2020 के अंत तक वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके अलावा 91 किलोमीटर लंबे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का काम भी इसी वर्ष शुरू हो सकता है। यह पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से गोरखपुर को जोड़ेगा।

भूमि अधिग्रहण और वित्त व्यवस्था

2019 की शुरुआत में भूमि अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया था और आवश्यक 3,700 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 95 प्रतिशत अधिग्रहित की जा चुकी है और शेश भूमि का अधिग्रहण अगले कुछ माहों में पूरा कर लिया जाएगा।

किसानों के विरोध के बिना 10 महीनों के काल में 3,440 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हो गया था जिससे यह प्रदेश का सबसे तेज़ भूमि अधिग्रहित करने वाला एक्सप्रेसवे बन गया। कुशल भूमि अधिग्रहण के कारण योगी सरकार ने लागत को 12 प्रतिशत बढ़ने से रोक लिया।

रियल-टाइम ग्रौस सेटलमेंट के माध्यम से अपनी भूमि बेचने वाले किसानों को उत्तर प्रदेश सरकार ने मुआवज़ा राशि दे दी है। इस प्रक्रिया में लाल-फीताशाही को भी नियंत्रित किया गया।

एक्सप्रेसवे की अनुमानित लागत 14,850 करोड़ रुपये है और निर्माण कार्य पर 8,870 करोड़ रुपये खर्च किए जाएँगे। इस राशि में 7,000 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्रधिकरण (यूपीईडा) विभिन्न बैंकों से लिए ऋणों के माध्य से देगा।

शेष राशि राज्य सरकार देगी। 2019 के बजट में इस एक्सप्रेसवे को 1,000 करोड़ रुपये दिए गए थे और 2020 के बजट में इसे 750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

निर्माण

शुरू में एक्सप्रेसवे को चार लेनों का बनाया जाएगा जिसे बाद में बढ़ाकर 6-लेन का किया जा सकता है। निर्माण के लिए इसे छह पैकेजों में विभाजित किया गया है। सभी पैकेजों के लिए बोलियाँ फरवरी 2019 में यूपीईडा द्वारा आमंत्रित की गई थीं।

यूपीईडा को 17 कंपनियों से कुल 82 बोलियाँ प्राप्त हुई थीं। इनमें से 10 कंपनियों ने सभी छह पैकेजों के लिए बोली लगाई थी।

ये बोलियाँ अक्टूबर 2019 में खोली गईं। ऐपको इंफ्राटेक को पहला और दूसरा पैकेज मिला है, अशोक बिल्डकॉन को तीसरा पैकेज मिला है, गावर कंस्ट्रक्शन चौथे और पाँचवे पैकेज पर काम करेगा और छठा पैकेज दिलीप बिल्डकॉन को मिला है।

जो बोली सबसे कम लागत की आई, वह अनुमानित लागत से 12.72 प्रतिशत कम थी। इसके चलते यूपीईडा 1,131.74 करोड़ रुपये की बचत कर पाया है।

इस परियोजना को अभियांत्रिकी, खरीद और निर्माण (ईपीसी) मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा जिसमें ठेकेदार को ही डिज़ाइन, आवश्यक सामान की खरीद और निर्माण करना होगा।

यह पहुँच नियंत्रित एक्सप्रेसवे कुल 110 मीटर चौड़े भाग को घेरेगा। एक्सप्रेसवे के एक किनारे पर 3.75 मीटर चौड़ी सर्विस रोड भी होगी।

एक्सप्रेसवे पर चार पुल रेलवे ट्रैक के ऊपर बनाए जाएँगे और 14 बड़े पुल होंगे। छह टोल प्लाज़ा व सात रैम्प प्लाज़ा होंगे। 266 छोटे पुल और 18 फ्लाइओवर भी बनाए जाएँगे।

निर्माण कार्य में देरी देखने को मिली है। नवंबर 2019 में यूपीईडा अधिकारियों ने संवाददाता को बताया था कि दिसंबर में ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

फिर रिपोर्ट किया गया कि जनवरी 2020 में प्रधानमंत्री मोदी जनवरी 2020 में शिलान्यास करेंगे लेकिन ऐसा फरवरी के अंत तक नहीं हो पाया।

“हम 2021 के अंत या ज्यादा से ज्यादा 2022 की शुरुआत में एक्सप्रेसवे का काम पूरा करना चाहते हैं।”, यूपीईडा अधिकारी ने नवंबर में कहा था। अब देखना होगा कि क्या इस देरी से योजना में कुछ परिवर्तन होता है।

2022 में उत्तर प्रदेश के चुनाव होने वाले हैं और योगी आदित्यनाथ चाहेंगे कि एक्सप्रेसवे का काम पूरा हो जाए या कम से कम मुख्य मार्ग को तो जनता के लिए खोल दिया जाए।

बुंदेलखंड रक्षा गलियारा

यह एक्सप्रेसवे एक और कारण से महत्त्वपूर्ण है। क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने यहाँ रक्षा गलियारा बनाने का प्रस्ताव दिया है।

यह मात्र संयोग नहीं है कि इस वर्ष का डिफेन्स एक्सपो रक्षा मंत्रालय ने लखनऊ में आयोजित किया था। उत्तर प्रदेश में पहले से तीन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की विनिर्माण इकाइयाँ, नौ ऑर्डिनेन्स फैक्ट्रियाँ, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और रक्षा क्षेत्र की अन्य राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियाँ हैं। इस प्रकार बुंदेलखंड में निवेश को आमंत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश में पर्याप्त पारिस्थितिकी तंत्र है जिसका लाभ उठाया जा सकता है।

एमकेयू नामक रक्षा विनिर्माण कंपनी का मुख्यालय कानपुर में है और यह 1980 के दशक से भारतीय सेना और अर्ध-सैन्यबलों को उपकरण प्रदान करती आई है। इसकी एक बैलिस्टिक हेल्मेट विनिर्माण इकाई उत्तर प्रदेश के पथेहपुर जिल में चित्रकूट से 130 किलोमीटर दूर है।

बुंदलेखंड रक्षा गलियारे में छह केंद्र प्रस्तावित है जिसमें से चित्रकूट एक है और अन्य पाँच हैं- अलीगढ़, आगरा, झाँसी, कानपुर और लखनऊ।

बुंदेलखंड रक्षा गलियारे के क्षेत्र

कानपुर जैसे वर्तमान औद्योगिक केंद्रों में भूमि का दाम अधिक है, इसलिए बुंदेलखंड रक्षा विनिर्माण के लिए निवेश का केंद्र बन सकता है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे क्षेत्र की संयोजकता में सुधार करेगा और रक्षा गलियारे के केंद्रों को बेहतर संयोजकता प्रदान करेगा और इस क्षेत्र में सस्ती मजदूरी और सस्ती बूमि से विकास को बल मिलेगा।

आदित्यनाथ सरकार ने क्षेत्र में लैंड बैंक बनाने का काम भी शुरू कर दिया है। रक्षा गलियारे के लिए 3,700 हेक्टेयर क्षेत्रफल की भूमि चिह्नित की जा चुकी है और 3,000 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण राज्य ने कर भी लिया है।

रक्षा गलियारे पर डिफेन्स एक्सपो के माध्यम से भी काफी ध्यान गया और कुछ रिपोर्टों का कहना है कि यह अब तक का भारत का सबसे बड़ा डिफेन्स एक्सपो था।

लखनऊ डिफेन्स एक्सपो और बुंदेलखंड रक्षा गलियारे की प्रधान एजेंसी, यूपीईडा ने रक्षा विनिर्माण में 50,000 करोड़ रुपये के 23 मसौदों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

मसौदों पर हस्ताक्षर करने वाली कंपनियों की सूची में टाइटन एविएशन एंड एयरोस्पेस लिमिटेड भी है और रिपोर्ट के अनुसार इसने परियोजना के लिए झाँसी केंद्र पर 6,000 एकड़ भूमि की माँग की है।