भारती
बीएमटीसी ले सकती है बेस्ट से सीख, शहर विकास के साथ सार्वजनिक परिहवन भी बदले

पिछले कई वर्षों से ट्रैफिक की समस्या से जूझ रहे बेंगलुरु के लिए बैंगलोर मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (बीएमटीसी) की भूमिका अहम हो जाती है। 6,603 बसों के साथ प्रति दिन 67,000 फेरे लगाकर बीएमटीसी प्रतिदिन 11.96 लाख किलोमीटर की यात्रा करता है। लेकिन यात्री संख्या 2014-15 में 51.3 लाख से घटकर 2018-19 तक 35.8 लाख ही रह गई थी।

शुरुआत से एकाधिकार जमाए हुए इस निगम को नम्मा मेट्रो और राइड-शेयरिंग व ऐप-आधारित गाड़ियों के आगमन से झटका लगा। कैब का डाटा हमारे पास उपलब्ध नहीं है लेकिन उनकी संख्या भी घटी है और वहीं मेट्रो की यात्री संख्या बढ़कर 4 लाख प्रतिदिन पहुँच गई है।

वहीं मुंबई का बृहन्-मुंबई बिजली आपूर्ति और परिहन (बेस्ट) मात्र 3,500 बसों के साथ प्रतिदिन 34 लाख यात्रियों को सेवा दे रहा है। बीएमटीसी की तरह बेस्ट का मुंबई के सार्वजनिक परिवहन पर कभी भी एकाधिकार नहीं रहा बल्कि यह उप-नगरीय रेल सेवा और अब मेट्रो के सहायक के रूप में संचालित होता रहा।

हालाँकि दोनों शहरों की तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि मुंबई रेखाकार है और बेंगलुरु गोलाकार लेकिन फिर भी इतना अवश्य कहा जा सकता है कि बीएमटीसी कुछ गलत कर रही है।

बीएमटीसी के मार्ग

पिछले कई दशकों से बीएमटीसी के मार्ग लगभग समान ही रहे हैं। 10 मुख्य सड़कों के माध्यम से बसें केंद्रीय व्यापारिक जिले (सीबीडी) से बाहरी क्षेत्रों की ओर जाती हैं, घड़ी की सुई की तरह।

इसके अलावा इनर रिंग रोड, कॉर्ड रोड और आउटर रिंग रोड पर भी इसकी कुछ सेवाएँ दक्षिणावर्त और वामावर्त दिशाओं में चलाई जाती हैं। पिछले दशक में बिग10 श्रृंखला और मेट्रो के लिए फीर सेवा जोड़ी गई लेकिन मुख्य संरचना अब भी वैसी ही है।

बसों की औसत यात्रा दूरी लंबी और एक दिशा में 10 किलोमीटर से अधिक होती है। तीन केंद्रों की ओर अधिकांश बस सेवाएँ होती हैं- कम्पेगौड़ा हस स्टैंड (केबीएस), केआर मार्केट और शिवाजीनगर।

लेकिन शहर का विकास तीन नए केंद्रों पर हुआ है- दक्षिण की ओर इलेक्ट्रॉनिक सिटी , पूर्व में वाइटफील्ड और आउटर रिंग रोड के 23 किलोमीटर लंबे पूर्वी भाग पर जहाँ ट्रैफिक जाम लगा रहता है।

इलेक्ट्रॉनिक सिटी को जोड़ती हुई नाइस पेरिफेरल रिंग रोड (पीआरआर) के बन जाने से इसके आसपास आवासीय क्षेत्रों का विकास देखा गया है और ऐसा ही अन्य आईटी क्षेत्रों के साथ हुआ है।

इस विकास को देखते हुए बीएमटीसी को इन क्षेत्रों को जोड़ती हुई छोटी दूरी की बसें चलानी चाहिए लेकिन ऐसा हनहीं होता। इन क्षेत्रों के लिए वोल्वो बस भी केबीएस से शुरू होकर सीबीडी से होती हुई ही इन क्षेत्रों तक पहुँचती है जो संसाधनों का सदुपयोग तो नहीं है।

पहला कदम- डाटा प्राप्ति

पहली चीज़ जो बीएमटीसी को करनी चाहिए, वह है ट्रैफिक और सवारी पैटर्न का डाटा इकट्ठा करना। इसे देखने का सबसे आसान तरीका इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन (ईटीएम) से डाटा इकट्ठा करना है। ईटीएम से हाल का डाटा मिल सकता है कि किस रूट पर किस समय कितनी दूरी के लिए अधिकांश लोग यात्रा करते हैं।

उदाहरण के लिए केबीएस और इलेक्ट्रॉनिक सिटी के बीच चलने वाली सामान्य और वातानुकूलित वॉल्वो बस को देखते हैं। किराए में अंतर के कारण सामान्य बसों में सामान्य समय पर शहरी क्षेत्रों में अधिक भीड़ देखने को मिलती है, वहीं आईटी उद्योग के समय पर इलेक्ट्रॉनिक सिटी की ओर वॉल्वो को प्राथमिकता दी जाती है।

हालाँकि इसमें समस्या यह है कि हम सिर्फ बस उपयोगकर्ताओं का डाटा प्राप्त कर पाएँगे और अन्य माध्यमों का नहीं। दूसरा कदम होगा सीसीटीवी कैमरे की सहायता से ट्रैफिक पुलिस से डाटा प्राप्त करना। इससे पता चलेगा कि किस मार्ग पर किस समय किस दिशा में अधिक भीड़ होती है।

हालाँकि इससे सामान्य डाटा मिलेगा, विशिष्ट डाटा नहीं लेकिन फिर भी टिकट डाटा से इसे जोड़कर देखने से हमारे समक्ष स्थिति स्पष्ट होगी।

सबसे महत्त्वपूर्ण और अंतिम कदम होगा तीसरी पार्टी जैसे गूगल मैप्स और उबर से डाटा लेना। गूगल मैप्स का डाटा अधिक सहायक होगा क्योंकि इसमें ट्रैफिक जाम दर्शाने का भी विकल्प रहता है। उबर हमें वह डाटा देगा जो हमारे पास उपलब्ध नहीं है, यानी उन लोगों का डाटा जो बस का उपयोग नहीं करते।

दूसरा कदम- डाटा समझना

उप-नगरीय बेंगलुरु में रहने वाले जानते हैं कि बीएमटीसी का विस्तार क्षेत्र कम है। मिलने वाला डाटा भी यही दर्शाएगा। जैसे दक्षिण बेंगलुरु में होसुर रोड और बनेरुघट्टा रोड के बीच पिछले दशक में कई आवासीय क्षेत्र उभरे हैं जहाँ उपरोक्त तीन आईटी केंद्रों में काम करने वाले लोग रहते हैं।

लेकिन इन क्षेत्रों में बहुत कम बस चलती है। हालाँकि इन दोनों मार्गों पर मेट्रो गलियारा निर्माणाधीन है लेकिन जब तक यह नहीं बन जाता तब तक ये क्षेत्र इस कमी को झेलते रहेंगे।

निर्माणादीन बेंगलुरु मेट्रो, चित्र साभार- @TheMetroRailGuy

इसी में डाटा हमारे काम आएगा। गूगल मैप्स आसानी से सुबह और शाम के व्यस्त घंटों के ट्रैफिक जाम बता सकते हैं। उबर एक सामान्य दिशा बताएगा जहाँ ट्रैफिक आता जाता है। ईटीएम से मिलाकर इस डाटा का उपयोग किया जा सकता है।

तीसरा कदम- बसों की संख्या को बढ़ाना

बीएमटीसी को संस्था के रूप में अपनी संरचना परिवर्तित करनी होगी। अब इसका एकाधिकार नहीं है और भविष्य में यह सोचकर ही योजनाएँ बनानी चाहिए।

जैसे नई मेट्रो लाइनों और उप-नगरीय रेल सेवा के बनने के बाद बसों को फीडर सेवाओं की भूमिक निभानी होगी। बसों को परिवहन के दूसरे साधनों से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी है बल्कि उनका सहायक बनना है।

और यही वह स्थान हैं जहाँ बीएमटीसी मुंबई के बेस्ट से कुछ सीख सकती है। मिनी बसें खरीदनी होंगी जो उप-नगरीय बेंगलुरु के संकीर्ण रास्तों से गुज़र सके। वातानुकूलित बसों का उपयोग नॉन-स्टॉप कंडक्टर-विहीन सेवाओं के रूप में किया जा सकता है जो मेट्रो स्टेशनों से अन्य स्थानों तक यात्रा करे।

मेट्रो निर्माण के तेज़ी से चल रहे कार्य को देखते हुए उनके अनुसार संयोजकता नियोजित की जानी चाहिए और वर्तमान स्टेशनों को भी सेवा देनी चाहिए। अबी मेट्रो फीडर सेवा अपना काम अच्छेसे नहीं कर रही है।

कई जगहों पर बस सेवाएँ एक ही लाइन के मेट्रो स्टेशनों से होकर गुज़रती है। एमएफ14 मार्ग मैसुरु रोड के बाहरी क्षेत्रों को केबीएस से जोड़ता है और रास्ते में नयनदहळी मेट्रो स्टेशन को भी पार करता है। बेहतर होता कि बस केबीएस पर जाकर मेट्रो से मिलने की बजाय नयनदहळी पर अपनी यात्रा समाप्त करके यात्रियों को मेट्रो सुविधा का उपयोग करने देती।

वर्तमान लाइनों के समानांतर पर ही नई लाइनों को लाने की बजाय बीएमटीसी को आसपास के क्षेत्रों से स्टेशनों तक फीडर सेवाएँ शुरू करनी चाहिए। और भविष्य में इन्हें ऐसे नियोजित किया जाना चाहिए कि दो अलग-अलग लाइनों को जोड़ा जा सके।

शहरों के साथ परिवहन भी विकसित हो

बीएमटीसी ने इसे अच्छे से समझा ही नहीं। शहर जैसे बढ़ा इसने केवल वहाँ तक सेवाएँ देना शुरू कर दिया। शहर के एक बड़े कार्यबल को अब सीबीडी तक यात्रा नहीं करनी होती, बल्कि उनका आवास और काम दोनों शहर के बाहरी क्षेत्रों में ही होता है और इस बात को समझने की आवश्यकता है।

मेट्रो और रेल संयोजकता के लिए बेंगलुरु को मुंबई से कुछ सीख लेनी चाहिए। रेलवे स्टेशनों के निकट मिनी बस स्टेशन और मेट्रो स्टेसन के नीचे बस बे बनाने चाहिए। दो मेट्रो स्टेशनों के बीच स्थित बस स्टेशन को किसी एक स्टेशन के बीच स्थानांतरित किया जानी चाहिए ताकि आधारभूत सुविधा दी जा सके।

मुंबई में वातानुकूलित मिनी बस मॉडल ने अच्छा काम किया है। मेट्रो और उप-नगरीय रेल सेवा के निकट बस सेवा बेगलुरु में भी होनी चाहिए, मिनी बस संकीर्ण गलियों में काम आ सकती है।

चार महीनों की छोटी अवधि में बेस्ट ने 60 नए मार्गों पर बस सेवा शुरू की है। बेलुरु को और बड़ा लक्ष्य रखना चाहिए क्योंकि यहाँ उप-नगरीय रेल सेवा भी नहीं है।