भारती
बायोमेडिकल कूड़ा प्रबंधन के दिशानिर्देशों का कैसे अनुपालन कर रहे देश के विभिन्न भाग

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संकट के बीच एक चुनौती बायोमेडिकल कूड़ा प्रबंधन की भी है। बीमारी की तीव्र संक्रमणता को देखते हुए कुशल प्रबंध और भी आवश्यक हो जाता है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने कूड़ा प्रबंधन के लिए 2016 के नियमों के अतिरिक्त कोविड-19 विशिष्ट कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों को कोविड-19 से जुड़ी वर्तमान जानकारियों और वायरल व संक्रामक बीमारियों के लिए वर्तमान अभ्यास के आधार पर बनाया गया है। साथ ही कहा गया है कि आवश्यकता होने पर इनमें परिवर्तन किया जा सकता है।

इस दिशानिर्देश के पाँच उपखंड हैं- पृथक केंद्र (आइसोलेशन वार्ड), जाँच केंद्र और प्रयोगशाला, संदिग्ध रोगियों के क्वारन्टाइन शिविर या होम क्वारन्टाइन, सामान्य बायोमेडिकल कूड़ा उपचार सुविधा के दायित्व व प्रदूषण नियंत्रण निकायों के दायित्व।

संदिग्ध रोगियों के क्वारन्टाइन शिविर और घर पर ही क्वारन्टाइन में रह रहे लोगों के कूड़े का प्रबंधन 2016 के नियमों के अनुसार करने का निर्देश है और बायोमेडिकल कूड़े का निस्तारण अलग से पीले रंग के बैग या डब्बे में करना है व कूड़ा उपचार सुविधाओं व नगर निगमों को इस कूड़े के विषय में जानकारी दी जानी है।

बायोमेडिकल कूड़े के लिए निर्धारित पीले बैग

मुंबई में अतिरिक्त सावधानी

कोविड-19 का मुख्य केंद्र बन गए महाराष्ट्र जहाँ 7 अप्रैल को ही मामलों की संख्या 1,000 पार गई थी, वहाँ अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए राजधानी मुंबई में बृहन्-मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने संक्रमित क्षेत्रों के आम कूड़े से भी बायोमेडिकल कूड़े जैसा व्यवहार शुरू कर दिया है।

मुंबई में 146 ऐसे ज़ोन चिह्नित किए गए थे। इन ज़ोनों में लॉकडाउन काफी सख्त है। काले बैग में कूड़े और पीले बैग में निस्तारण किए जाने वाले बायोमेडिकल कूड़े को रक्षात्मक उपकरण (पीपीई) पहनकर ही स्वच्छता कर्मचारी उठाते हैं व इन्हें देवनार में जलाया जाता है।

कुरला के एल वार्ड के सहायक आयुक्त मनीष वलंजु ने मुंबई मिरर  को बताया, ”बायोमेडिकल कूड़ा इकट्ठा करने में विशेषज्ञता प्राप्त एसएमएस नामक कंपनी यह काम कर रही है। इस काम के लिए उनके कर्मचारी विशेष सूट पहनते हैं। इसके बाद कूड़े को जलाया जाता है।”

इसके लिए निवासियों को भी कूड़ा फेंकने के लिए विशेष बैग दिए जाते हैं जो उनके घर के बाहर ही रखे जाते हैं। एक स्वच्छता कर्मचारी इन सारे बैगों को उठाकर मोहल्ले के कचरा पात्र में डालता है जिसे बाद में एसएमएस के कर्मचारी उठाते हैं, वलंजु ने बताया।

दरअसल मोटर लोडर वाला एक छोटा वाहन उपयोग में लाया जाता है जो हर वॉर्ड से कूड़ा इकट्ठा कर उन्हें उठाकर निस्तारण के लिए ले जाता है। पीले बैगों को देवनार में जलाया जाता है और उसके अवशेषों को दफनाकर ब्लीचिंग पाउडर छिड़का जाता है।

देवनार स्थित बायमेडिकल कूड़ा उपचार संयंत्र, चित्र साभार @sandhya19910

पश्चिम बंगाल में नहीं पूर्ण व्यवस्था

एक ओर जहाँ मुंबई में हम अतिरिक्त सावधानियों को देख रहे हैं, वहीं पश्चिम बंगाल में दिशानिर्देशों का पालन न होने की बात डाउन टू अर्थ  ने उठाई है। रिपोर्ट के अनुसार कचरा उठाने वाले कर्मचारी लॉकडाउन के कारण अपने काम पर नहीं पहुँच पा रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की दो प्रमुख बायोमेडिकल कूड़ा प्रबंधन इकाइयों में से एक ग्रीनटेक एन्वायरॉन मैनेजमेंट लिमिटेड के प्रबंधन निदेशक रामाकांत बर्मन के अनुसार चुनौती बड़ी है। सफाई कर्मचारियों के स्थानीय प्रतिरोध के अलावा साउथ 24 परगना के संयंत्र में बायोमेडिकल कूड़े के उपचार को भी स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ रहा था। इस समस्या का समाधान स्थानीय विधायक और जिला पुलिस प्रमुख के हस्तक्षेप से हुआ।

(सफाई कर्मचारियों के अलावा कोलकाता में कोरोनावायरस के विरुद्ध लड़ाई में जुटे और इससे संबंधित लोग भेदभाव, बहिष्कार और आलोचनाओं का कैसे शिकार हो रहे हैं, यह हमने पहले एक वीडियो के माध्यम से उजागर किया था।)

उक्त कंपनी कोलकाता के बेलियाघटा इन्फेक्शियस डिज़ीज़ अस्पताल समेत कुल 3,500 अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से कूड़ा एकत्रित करती है। हालाँकि 29 मार्च तक किसी भी नगर निगम ने इस कंपनी से बायोमेडिकल कूड़े के निस्तारण के लिए संपर्क नहीं किया था।

पश्चिम बंगाल में अस्पतालों के बायोमेडिकल कूड़ा का एकत्रीकरण और निपटान स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाता है तथा नगर निगमों पर इसका दायित्व नहीं है, इसलिए भी संभवतः नगर प्रबंधन निकायों की ओर से कोई पहल नहीं की गई होगी। साथ ही दिशानिर्देशों में भी नगर निगमों के दायित्व स्पष्ट रूप से नहीं लिखे गए हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को ही पहल करके अन्य निकायों की सहायता से कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना होगा।

देश के अन्य स्थान

बीएमसी की तरह ही हिमाचल प्रदेश में शिमला नगर निगम  ही क्वारन्टाइन घरों से कूड़ा एकत्रित कर रहा है। घर के द्वारों से कूड़ा इकट्ठा करने के लिए विशेष कार्य बल तैयार किया है जिन्हें एन-95 मास्क समेत अन्य सुरक्षा उपकरण दिए गए हैं। पीले बैग में कूड़ा एकत्रित कर उसे सीलबंद करने के बाद निस्तारित किया जाता है।

कोविड-19 के कारण एक रोचक घटना भी हुई कि बायोमेडिकल कूड़ा 25 प्रतिशत तक कम हो गया। ईको-फ्रेंडली भारतीय मेडिकल संघ (इमेज) के अनुसार लॉकडाउन के कारण कोविड-19 उपचार का केंद्र न बनने वाले अस्पतालों में ऐसा देखा गया है।

साथ ही यह संस्था कोविड-19 उपचार केंद्रों तक पहुँचकर उन्हें बायोमेडिकल कूड़े के निस्तारण की सलाह दे रही है। इमेज वाहनों को सरकार की अनुमति मिल गई है और यह प्रतिदिन केरल के 63 कोविड-19 उपचार केंद्रों से 42-43 टन कूड़ा एकत्रित कर रही है।

तमिलनाडु के आठ केंद्रीय जिलों के बायोमेडिकल कूड़े का उपचार तंजावुर स्थित व्यवस्था पर होता है। वहाँ से भी इस कूड़े में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रिपोर्ट की गई है। कोविड-19 संबंधी कूड़े को अन्य बायोमेडिकल कूड़े से अलग रखा जाता है और प्राथमिकता पर जलाया जाता है।

अन्य अस्पतालों के अलावा कोयंबतूर स्थित कोविड-19 के लिए चयनित ईएसआई अस्पताल के बायोमेडिकल कूड़े में भी 50 प्रतिशत की गिरावट हुई है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कूड़ा एकत्रित करने के बाद पीले बैग को पहले डिसिनफेक्टेन्ट में डुबाया जाता है और दूसरे पीले बैग में डालकर ही कूड़ा प्रबंधन संस्था टेक्नोथर्म के कर्मचारी को दिया जाता है।

इसके अलावा दिशानिर्देशों में बायोमेडिकल कूड़े के लिए पृथक वाहन के उपयोग की भी बात कही गई है। साथ ही हर फेरे के बाद इस वाहन को सोडियम हाइपोक्लोराइट से स्वच्छ भी किया जाना चाहिए।

कूड़ा उपचार सुविधाओं का दायित्व है कि कोविड-19 कूड़े का तुरंत निस्तारण किया जाए, भले ही उन्हें संयंत्र अतिरिक्त समय के लिए चलाने पड़ें। प्रदूषण नियंत्रण इकाइयाँ इसकी अनुमति इन सुविधाओं को दे सकती हैं।