भारती
बेंगलुरु के ट्रैफिक समाधान के लिए प्रस्तावित योजना की आलोचनाएँ और संभावनाएँ

बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) और कर्नाटक सरकार के नगरीय भूमि परिवहन निदेशालय (डल्ट) ने मिलकर बेंगलुरु विस्तृत आवागमन योजना (सीएमपी) तैयार की थी जिसपर नागरिकों के प्रतिक्रिया देने की समय सीमा 20 जनवरी (सोमवार) को समाप्त हुई।

इन प्रतिक्रियाओं में कई आलोचनाएँ सामने आईं हैं जैसे कुछ लोगों का मानना है कि बीएमआरसीएल एक योजनाकार संस्था नहीं है जिस कारण से यह योजना प्रस्तुत करने का अधिकार नहीं रखती। वहीं कुछ ने आरोप लगाया है कि इस योजना के सहारे यह अपने 92 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड (ज़मीन से ऊपरी स्तर) गलियारे के विचार को पुनः सामने रख रही है जिसे पहले अस्वीकार्य कर दिया गया था।

आलोचनाओं पर आगे चर्चा करने से पहले इस रिपोर्ट के बारे में थोड़ा-सा जान लेते हैं। 226 पन्नों की यह रिपोर्ट विभिन्न चरणों में 2031 तक 80 परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखती है जिनकी अनुमानित लागत 2.3 लाख करोड़ रुपये है। 12 पृष्ठभूमियों पर पूरी योजना आधारित है।

योजना 2031 के शहर मास्टर प्लान के पुनर्शोधन की मांग करती है। कुल 600 किलोमीटर के सार्वजनिक परिवहन गलियारे की दोनों ओर 2 किलोमीटर के दायरे में परिवहन आधारित विकास (टीओडी) का भी विचार समक्ष रखती है।

सीएमपी का दृष्टिकोण है कि शहर की कुल यातायात आवश्यकता के 70 प्रतिशत भाग को सार्वजनिक परिवहन पूरा करें। इसके लिए 700 किलोमीटर के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क की बात कही गई है। वर्तमान में क्रियाशील 42 किलोमीटर मेट्रो रेल नेटवर्क को 2031 तक बढ़ाकर 317 किलोमीटर लंबा करने की योजना है जिसकी विस्तृत जानकारी निम्न टेबल में देखें।

बिंदु 5, 6 और 7 में जिन मार्गों की बात की जा रही है, वहीं एलिवेटेड गलियारे का विरोध हुआ था। येदियुरप्पा सरकार ने सितंबर 2019 में इस परियोजना के 21 किलोमीटर लंबे भाग के लिए निकाली गई निविदा को रद्द कर दिया था। माना गया था कि आर्थिक और पर्यावरण की दृष्टि से यह परियोजना उत्कृष्ट नहीं है व अन्य विकल्पों पर भरपूर विचार नहीं किया गया था।

सिटिज़न्स फ़ॉर बेंगलुरु के सह-संस्थापक श्रीनिवास ने उस समय भी सरकार के निर्णय की सराहना की थी और अब भी वे एलिवेटेड गलियारे की बात को लेकर योजना का विरोध कर रहे हैं। आईआईएससी के सह-प्राध्यापक आशीष वर्मा के अनुसार परिवहन माध्यम के विकल्पों को सामने रखने की बजाय सीएमपी में सीधे एलिवेटेड गलियारे का प्रस्ताव रखने से इसकी आवश्यकता स्पष्ट नहीं होती।

सब-अर्बन रेलवे के लिए 2031 तक 314 किलोमीटर लंबे नेटवर्क का प्रस्ताव है जिसमें विशिष्ट व साझा दोनों ट्रैक सम्मिलित हैं। 148 किलोमीटर लंबे विशिष्ट ट्रैक का जो प्रस्ताव राइट्स की डीपीआर में दिया गया था, उसे वैसा ही रखा गया है। निम्न टेबल में विभिन्न मार्गों की जानकारी दी गई है जिसमें से शीर्ष चार राइट्स डीपीआर से मेल खाते हैं।

सड़क परिवहन के विषय में सीएमपी का प्रस्ताव है कि वर्तमान में बेंगलुरु में संचालित 6,634 बसों को 2031 तक बढ़ाकर 15,000 किया जाए। साथ ही वर्तमान के 45 डिपो में 40 डिपो और जोड़े जाएँ। बस की औसत गति को बढ़ाने के लिए बस गलियारों की पहचान भी की गई है। इनमें से कुछ गलियारे क्रियाशील हैं और कुछ को चौड़ा किया जाना है।

प्रस्तावित पेरिफेरल रिंग रोड और नाइस रोड पर मेट्रोलाइट या बस त्वरित परिवहन प्रणाली (बीआरटीएस) बनाने का भी सुझाव है। इसकी कुल लंबाई 107 किलोमीटर होगी व इसकी मार्गरेखा निम्न मानचित्र पर देखें।

एक वेबसाइट पर सह-प्राध्यापक आशीष वर्मा ने योजना की समीक्षा करते हुए लेख छापा है। इसमें उन्होंने मुद्दा उठाया है कि पैदल चलने और साइकल चलाने को सीएमपी मॉडल में सम्मिलित नहीं किया गया है जो विकल्पों के अभाव में सुझाई गई नीति को कम सटीक बनाता है।

वहीं रिपोर्ट में 548 किलोमीटर लंबे फुटपाथ और 174 किलोमीटर के साइकल ट्रैक बनाने की बात कही गई है। साथ ही दो चरणों में कुल 550 बाइसिकल साझाकरण केंद्र बनाने की भी बात है। नई सड़कों में साइकल लेन को अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है। हालाँकि वर्मा का विरोध इस बात पर हो सकता है कि इस परिवहन माध्यम का परिमाणीकरण नहीं किया गया है।

आधुनिक परिवहन विशेषज्ञों की तरह वर्मा का भी मानना है कि सड़क की क्षमता बढ़ाना सही विकल्प नहीं है जैसा कि सीएमपी में सुझाया गया है। इससे निजी वाहनों को ही प्रोत्साहन मिलेगा जो सार्वजनिक परिवहनों का विकास अवरुद्ध करेंगे। क्षमता बढ़ने के साथ मांग भी बढ़ेगी और कुछ वर्षों में भीड़ की समस्या फिर से हमारे सामने होगी।

लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए किसी मापदंड का उल्लेख न होना, सेवा मापदंडों का अवैज्ञानिक होना, सीएमपी में लघु-अवधि उपायों का उल्लेख, क्रियान्वयन भाग की अल्प जानकारी व एकीकृत परिवहन प्रणाली का अभाव जैसे अन्य मुद्दे हैं जो वर्मा ने उठाए हैं।

इस रिपोर्ट को सिटिज़न्स फ़ॉर बेंगलुरु ने भी साझा किया है लेकिन कुछ तर्कों को छोड़कर उनका पूरा विरोध इस बात पर आधारित है कि बीएमआरसीएल योजना बनाने योग्य संस्था नहीं है। उनका दावा है कि इसके विरुद्ध जागरुकता अभियान चलाए जाने से 4,000 नागरिकों ने एलिवेटेड गलियारे को हटाने की मांग के साथ पत्र लिखा है।

इस संदर्भ में जब स्वराज्य  ने मेट्रो के जनसंपर्क अधिकारी बीएल यशवंत चवाण से बात की तो उन्होंने कहा कि यह अकेले बीएमआरसीएल द्वारा तैयार नहीं की गई है, बल्कि डल्ट का भी इसमें योगदान है। अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा, “हम भी परिवहन से जुड़े लोग हैं इसलिए इसपर काम कर सकते हैं।”

वहीं एनआईटी सूरत में सहयोगी प्राध्यापक चेतन पटेल ने स्वराज्य  को बताया कि उन्हें इस योजना में मुख्य रूप से तीन चीज़ों की कमी लगी है- अंतिम मील संयोजकता का अभाव, मालवाहकों के लिए विस्तृत योजना न होना और सड़कों के प्रतिशत में कम वृद्धि।

इस रिपोर्ट को पटेल अधिक प्रभावी नहीं मानते हैं क्योंकि किसी भी आवागमन योजना का लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन का प्रोत्साहन होना चाहिए जिसके प्रयासों का उल्लेख रिपोर्ट में नहीं है। इस रिपोर्ट में परिवहन माध्यम पदानुक्रमों का भी ध्यान नहीं रखा गया है, वे कहते हैं।

रिपोर्ट भविष्य का अनुमान लगाते हुए भी कार की संख्या में सार्वजनिक परिवहन की से अधिक वृद्धि की बात करती है। इसपर पटेल का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा न मिलने से निजी वाहनों की समस्या हमारे सामने जस की तस रहेगी।

बेंगलुरु की बिगड़ती ट्रैफिक स्थिति को नई मेट्रो लाइनों की आवश्यकता है लेकिन किसी योजना के न होने से इसे केंद्र से स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। माना जा रहा है कि सीएमपी के सहारे बीएमआरसीएल मेट्रो लाइनों का प्रस्ताव कर स्वीकृति प्राप्त करना चाहती है।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।