भारती
भोजन में संयम से निरोगी काया, आत्म-सम्मान से यश तक की राह बताते कुरल- भाग 21

निम्नलिखित दोहों में अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन में संयम की बात कही गई है। आधुनिक विज्ञान ने इस महत्त्व की पुष्टि की है।

1. हम तब ही खाएँ जब जो पहले खाया है, वह पच चुका है। ऐसे किसी दवाई की आवश्यकता नहीं होगी।

2. पहले खाए हुए भोजन के पचने के बाद तब तक प्रतीक्षा करें जब तक आपको सच में भूख न लगे। उसके बाद वहीं खाएँ जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो।

कुछ अच्छी चीज़ें सभी के लिए अच्छी नहीं होतीं। वैसे ही अच्छी चीज़ भी यदि अत्यधिक खाई जाए तो लाभकारी नहीं होती। इस प्रकार व्यक्ति को अनुभव से समझना चाहिए कि क्या खाना उसके अनुकूल है और जो प्रतिकूल हो, वह नहीं खाना चाहिए। उपरोक्त कुरल कहता है कि मात्र किसी वस्तु को खाने की चाह यह नहीं दर्शाती कि आपका पेट उसके लिए तैयार है। आपको तीव्र भूख की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

3. सही मात्रा में ही भोजन ग्रहण किया जाना चाहिए। खाने में संयम दीर्घ आयु की पूंजी है।

4. जो व्यक्ति पेट भरने से थोड़ी देर पहले ही खाना बंद कर दे, वही भोजन के स्वाद का आनंद ले पाता है। वहीं दूसरी ओर अधिक खाने वाले रोगों को आमंत्रित करता है।

5. आप कई पीड़ाओं से बच सकते हैं यदि आप यह समझ जाएँ कि आपकी सेहत के लिए क्या लाभदायक है और संयम बरत पाएँ।

6. जो व्यक्ति अपनी पेट की अग्नि यानी कि पाचन क्षमता को भूलकर खाता है, उसे रोगों को झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।

7. रोग के तीन ही कारण हो सकते हैं- भोजन की अधिकता या अल्पता या काम में असंतुलन।

आत्म-सम्मान

8. जब आपके पास धन हो तो विनम्र बनें, जब आपके साधन अल्प हैं तो अपना सर न झुकने दें।

तिरुवल्लुवर ऐसा करने की सलाह इसलिए दे रहे हैं ताकि जब आपका जीवन तंगी में बीत रहा हो तब ऐसा आचरण करके आप अपना महत्त्व और अपने कर्मों पर गौरव निर्धनता से प्रभावित हुए बिना दूसरों को दर्शा सकें।

9. सिर पर स्थित बाल सुंदरता होते हैं लेकिन वहाँ से हटने के बाद वे मात्र कूड़ा। ऐसा ही उन लोगों के साथ होता है जो अपने गरिमामयी आचरण से हटकर स्वयं का मूल्य घटाते हैं।

कुरल के कई दोहे किसी धनी पर आश्रित जीवन की दीनता बताते हैं क्योंकि इससे आत्म-सम्मान का ह्रास होता है।

10. जो आपको अपने समतुल्य नहीं समझते हैं और केवल आपको हीन समझकर आपकी सहायता करते हैं, उनके टुकड़ों पर पलने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने से बेहतर है भूख से मर जाना।

11. संसार उनके यश की सराहना और पूजा करता है जो जीवन त्यागने को अपमान से बेहतर समझते हैं।

अगले अंक में जारी…

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