भारती
मध्य प्रदेश कृषि सुधार- क्यों चौहान के ये प्रयास अपेक्षा से अधिक प्रभावी सिद्ध होंगे

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में राज्य की कृषि उत्पाद बाज़ार समिति (एपीएमसी) की संरचना में बड़े सुधार की घोषणा की है।

एपीएमसी की स्थापना छोटे और सीमांत किसानों तक बाज़ार की पहुँच बढ़ाने के लिए की गई थी। लेकिन वास्तव में वे व्यापारियों की मनमानी का साधन बन गए थे जहाँ ग्राहकों के लिए उपलब्ध अतिरिक्त अनाज उनकी झोली में जा रहा था। किसानों को अधिक पैसा नहीं मिल रहा था और खुदरा खाद्य मूल्य भी उच्चतर ही बनी रही है।

कोरोनावायरस वैश्विक महामारी के कारण हुई आर्थिक मंदी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों से मौलिक सुधार करने को कहा है। वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि सुधारों को प्राथमिक आवश्यकता समझा जा रहा है पर राज्य इन परिवर्तनों को करने से कतरारते हैं क्योंकि इन्हें करना राजनीतिक दृष्टि से रुचिकर नहीं होता है।

अपने पिछले कार्यकालों में मध्य प्रदेश में एक बलशाली कृषि अर्थव्यवस्था खड़ी करने वाले चौहान ने एक स्वागत योग्य कदम उठाया है। किसान अब अपनी फसल किसी भी खरीदने की चाह रखने वाले व्यक्ति या इकाईको बेच सकेंगे और उन्हें मंडी तक नहीं जाना होगा।

व्यापारी और थोक क्रेता किसानों से सीधे मोल-भाव कर सकेंगे। साथ ही किसानों को मंडी में भी अनाज बेचने की अनुमति रहेगी जहाँ वे सरकार द्वारा स्वीकृत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपना उत्पाद बेच पाएँगे।

लेकिन नई प्रणाली उन किसानों के लिए अच्छी होगी जिनकी फसल उच्च गुणवत्ता की है लेकिन फिर भी अनिवार्य रूप से उन्हें एमएसपी पर ही मंडी में ही अपनी फसल बेचनी पड़ रही थी।

साथ ही राज्य ने निजी मंडियों के निर्माण की भी अनुमति दे दी है जिसकी परिभाषा काफी विस्तृत है। निजी मंडियों में व्यापार सुविधाएँ, निजी यार्ड और शीतल भंडारण शृंखलाएँ भी होंगी।

साइलो

राज्य के माध्यम से संचालित होने के लिए उन्हें मात्र एक लाइसेंस की आवश्यकता होगी। खरीददार और विक्रेता एक ही स्थान पर रहें, इसकी भी आवश्यकता नहीं रहेगी।

ऐसी मंडियाँ एक लेन-देन के लिए एक ही शुल्क वसूलेंगी और गैर-बेस स्थान से हुई खरीद के लिए कोई कमिशन नहीं देना होगा। एक लाइसेंस का प्रावधान किसानों और व्यापारियों पर भी लागू होगा। यह कदम मध्य प्रदेश को अकेला कृषि बाज़ार बनाएगा।

राज्य में खरीददारों और क्रेताओं की बेहतर खोज के लिए सभी मंडियों में चल रहे भावों को किसानों के समक्ष सार्वजनिक किया जाएगा। यह उपाय खरीददारों की अधिकता का सीधा लाभ उत्पादक को दिलाएगा। अब तक यह लाभांश आपूर्ति शृंखला में कोई और ले लेता था।

हालाँकि वर्तमान मंडी कर दरों को परिवर्तित नहीं किया गया है। ऐसे में किसानों को बिक्री पर कुछ लागत तो लगेगी लेकिन नए प्रावधान किसान उत्पाद संघ (एफपीओ) की स्थापना को भी प्रोत्साहित करते हैं। 2020-21 के केंद्रीय बजट में राशि आवंटित होने के साथ एफपीओ बड़े पैमाने पर प्रक्षेपित किए गए हैं।

मध्य प्रदेश में एक इलेक्ट्रॉनिक खुदरा सुविधा भी शुरू होगी जो किसानों की राज्य के बाहर भी उत्पाद बेचने में सहायता करेगी। यह प्रणाली 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ई-राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (ई-नाम) से मेल खाती है। मध्य प्रदेश के किसानों को अब देश भर में भी अपनी फसल के लिए सर्वश्रेष्ठ बाज़ार खोजने की छूट होगी।

2017 में नीति आयोग ने आदर्श कृषि उत्पाद और पशुधन बाज़ार (प्रोत्साहन व सहूलियत) अधिनियम लिखा था। इस आदर्श एपीएलएम अधिनियम को सभी राज्यों को उपलब्ध करवाया गया था और अपेक्षा थी कि राज्या इसके प्रमुख बिंदुओं को अपनाएँगे।

इस आदर्श अधिनियम की मुख्य बातों में से मध्य प्रदेश ने अधिकांश को लागू किया है।

चिह्नित बाज़ार क्षेत्र बँटवारे सिद्धांत का उन्मूलन- मध्य प्रदेश अब एकल बाज़ार है।

खाद्य आपूर्ति शृंखला में से बिचौलियों को हटाना- मध्य प्रदेश के किसान अब सीधे ग्राहकों, थोक खरीददारों, खुदरा क्रेताओं और खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों से सौदा कर सकते हैं।

निजी बाज़ार यार्ड स्थापित करने का वातावरण बनाना- मध्य प्रदेश में लाए गए परिवर्तनों का केंद्रीय बिंदु यही प्रावधान है।

गोदामों, शीतल भंडारणों और साइलो को बाज़ार उप-यार्ड की तरह वर्गीकृत करना- मध्य प्रदेश ने इस प्रवाधान को किसी भी मध्यस्थ को मंडी का दर्जा देकर अनुमति दे दी है।

अपने पसंद के स्थान और समय पर किसानों को उत्पाद बेचने की स्वतंत्रता- इस परिवर्तन को नई संरचना में पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा जहाँ स्थानीय मंडियाँ किसानों के भाग्य को नियंत्रित नहीं करेंगी।

ई-व्यापार को प्रोत्साहन- मध्य प्रदेश में राज्य के भीतर और बाहर पूर्ण रूप से ई-व्यापार की अनुमति होगी।

एकीकृत लाइसेंसीकरण और मंडी शुल्क की एक बिंदु पर कटौती- इस प्रावधान को पूर्ण रूप से स्वीकार किया गया है।

राष्ट्रीय बाज़ार और अंतर-राज्यीय व्यापार को प्रोत्साहन- घोषणा इस संभावना को पूर्ण स्वतंत्रता देती है और मुखर रूप से ऐसे व्यापार को प्रोत्साहित करती है।

वर्तमान मंडियों के सामने निजी खिलाड़ियों को समान मंच देना- यह प्रावधान विभिन्न प्रकार की मंडियों में भेद किए बिना पूर्ण रूप से लागू होगा।

आदर्श एपीएलएम अधिनियम के दो क्षेत्र हैं जिनपर कार्य करने की आवश्यकता है। पहला, व्यापार प्रक्रिया में विभिन्न पार्टियों द्वारा दिए जाने वाले शुल्क को उपयुक्त बनाना। दूसरा, राज्य स्तर पर मंडियों के प्रशासन और विनियमन को सरल बनाना।

हालाँकि ये दोनों क्षेत्र नए व्यापार क्रम की तत्काल प्रगति में बाधा नहीं डालेंगे।

इन परिवर्तनों से बड़े किसान बेहतर सौदेबाज़ी कर पाएँगे, तुलनात्मक रूप से छोटे स्तर के लेकिन कुशल किसान एफपीओ के माध्यम से साथ आकर सामूहिक मोल-भाव कर सकते हैं और छोटे व सीमांत किसान अपने कार्य मॉडल पर पुनर्विचार के लिए प्रोत्साहित होंगे एवं स्तर या गुणवत्ता प्राप्त करने का प्रयास करेंगे अगर दोनों न कर सकें तो।

चौथी बार मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के बाद चौहान ने जल्दी ही एक बड़ा कदम उठा लिया है जिसका अनुसरण अन्य राज्यों को भी करना चाहिए। इसके अलावा चौहान ने श्रम कानून में भी बड़े सुधारों की घोषणा की है जो नई फैक्ट्रियों को ‘इंस्पेक्टर राज’ से छूट दिलाएगा।

गुरुवार ( 7 मई) को घोषित श्रम कानून सुधारों में उद्योगों को विभागीय निरीक्षण में राहत, रजिस्टर रखने में छूट और उत्पादन बढ़ाने के लिए शिफ्ट समय निश्चित करने का अधिकार होगा। कहा जा रहा है कि इन सुधारों को राज्य में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए किया गया है।

इन सुधारों को लागू करने के लिए फैक्ट्री अधिनियम, मध्य प्रदेश औद्योगिक संबंध अधिनियम और औद्योगिक विवाद अधिनियम के कई प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित हैं। नई फैक्ट्रियों को श्रम कानून से 1,000 दिनों की छूट मिलेगी।