भारती
2030 तक 30 स्मार्ट शहरों को क्रियान्वित करने के लिए ये सात कदम उठाए सरकार

2014 के चुनावों में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘100 स्मार्ट शहरों’ के विचार को लोकप्रिय बनाया गया था। इसके पाँच वर्षों बाद इस विचार पर जो ध्यान दिया जा रहा ता, वह कहीं खो गया है।

हालिया समाचार रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित 5,151 परियोजनाओं में से 3,629 पर काम किया गया। इनमें से केवल 917 परियोजनाएँ पूरी हुईं हैं जबकि 1,911 परियोजनाओं का काम अभी जारी है और शेष 801 परियोजनाओं के लिए निविदाएँ जारी की गईं हैं।

कोष के संदर्भ में बात करें तो 2015 और 2019 के बीच 48,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी। हालाँकि, इस राशि का केवल आधा हिस्सा आवंटित किया गया है, और आवंटित किए गए कोष का केवल 75 प्रतिशत ही जारी किया गया है। जारी किए गए 17,000 करोड़ रुपये में से केवल 6,160 करोड़ रुपये का उपयोग हुआ है।

कहीं न कहीं यह भी हुआ कि जो पैसा स्मार्ट सिटी के लिए प्रयोग में लाया जाना था, उसका उपयोग वर्तमान में अत्यधिक जनसंख्या तथा क्षीण व्यवस्थाओं वाले शहरों के रख-रखाव एवं सुधार में किया जाने लगा है।

28 शहरों में एक ने भी स्मार्ट शहर परियोजना पूरी नहीं हुई है जबकि 14 शहरों में एक-एक परियोजना का कार्य पूरा हुआ है।

यह कहना अतिशयोक्ति होगी कि स्मार्ट शहर परियोजना मृत हो चुकी है। हालाँकि, यह अवश्य है कि परियोजना धीमी गति से आगे बढ़ रही है। अभी तक, किसी परियोजना का पूरा होना या एक पूर्ण रूप से तैयार स्मार्ट शहर कहीं भी दिखाई नहीं देता।

तो आगे क्या?

हालाँकि सरकार ने स्मार्ट शहरों के लिए ‘सभी पर लागू करने वाली एक ही नीति’ नहीं अपनाई है, लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भले ही स्मार्ट शहरों की परिभाषा में विभिन्नता रहे परंतु, स्मार्ट शहर की परिभाषा में कुछ सामान्य सुविधाएँ सम्मिलित होनी चाहिए।

इसलिए आगे बढ़ते हुए मोदी सरकार को इन विशेषताओं की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, और पूरी तरह से कार्य करने वाले 30 स्मार्ट शहरों के लिए नए दशक के अंत तक का लक्ष्य बनाना चाहिए।

सरकार को सबसे पहले सरलता से प्राप्य लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और इसलिए उनका कार्यान्वयन शहर-विशिष्ट समाधानों पर जाने से पहले किया जाना चाहिए।

सबसे पहले, ऊर्जा को बढ़ावा देना। इन शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहनों का विकल्प चुनने वाले निवासियों को कर छूट और कम रोड टैक्स से बढ़ावा दिया जा सकता है।

इलेक्ट्रिक वाहन

साथ ही, सौर ऊर्जा को निजी उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जो कि समाजों से शुरू होती है। 2029 के अंत तक 50 प्रतिशत निवासियों को सौर ऊर्जा की ओर ले जाने का उद्देश्य होना चाहिए।

भारत को वर्ष के अधिकांश भाग में सूर्य की रोशनी मिलती है जिसके कारण सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना नोएडा, गुरुग्राम, पुणे, और बेंगलुरु जैसे नगरों में वायु प्रदूषण से लड़ने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

दूसरा, अगर सीएए विरोध प्रदर्शन ने हमें कुछ भी सिखाया है, तो वह है कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अद्यतन उपकरणों के साथ लैस करने का महत्व। स्मार्ट पुलिसिंग समाधान एक स्मार्ट शहर के लिए ज़रूरी हैं। भारत की एजेंसियों को न्यूयॉर्क शहर पुलिस विभाग (एनवाईपीडी) या स्कॉटलैंड यार्ड (अब मेट्रोपॉलिटन पुलिस सर्विस) की तर्ज पर बनाया जा सकता है।

तीसरा, नोकिया एवं इरिकसन (कृपा करके हुआवे नहीं) जैसी कंपनियों के सहयोग से 5जी समाधान का उपयोग यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन समाधान को सक्षम बनाने में किया जाना चाहिए।

सड़क की बत्तियाँ, ट्रैफ़िक सेंसर, और अन्य 5जी सक्षम आईओटी समाधान जो डाटा उत्पन्न करेंगे उससे शहरी नियोजन और प्रबंधन में मदद मिल सकती है। स्थानीय प्रशासन को तकनीकि इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस करना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए आवश्यक है।

चौथा, सार्वजनिक परिवहन समाधान। अधिकांश शहरों में मेट्रो आर्थिक रूप से संभव नहीं है, इसलिए मध्यम-क्षमता वाली रेल प्रणालियों और इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कम लागत वाली रेल सेवा- मेट्रोलाइट

इसके अलावा, इलेक्ट्रिक ऑटो और रिक्शा को सब्सिडी देकर या मुद्रा ऋण कार्यक्रम के तहत बढ़ावा देकर उनकी सहायता से परिवहन प्रणालियों की अंतिम मील की पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

पाँचवा, जन धन-आधार-मोबाइल (जेएएम) प्रणाली को इन शहरों में सभी सार्वजनिक सेवाओं के वितरण तक विस्तारित करना होगा ताकि बिचौलियों की आवश्यकता न रहे। आसपास के क्षेत्रों में आबादी की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए आयुष्मान भारत के तहत पर्याप्त अस्पतालों को भी खोला जाना चाहिए।

छठा, स्वच्छ भारत अभियान। सरकार के शाद ही किसी कार्यक्रम ने स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) जितनी लोकप्रियता बटोरी है।

इस प्रकार, 2030 तक 30 स्मार्ट शहर एसबीएम के लिए आदर्श अध्ययन क्षेत्र होने चाहिए। इन शहरों के लिए एसबीएम को 100 प्रतिशत सीवेज उपचार, 100 प्रतिशत खुले में शौच मुक्त स्थिति, और कचरा संग्रहण एवं निपटान तक विस्तार करना होगा। केवल साफ-सुथरे पार्क या सड़कें ही इसके लिए पर्याप्त नहीं होनी चाहिए।

सातवाँ, जल संरक्षण समाधान। 2030 तक राष्ट्रीय जल आपूर्ति बढ़कर 744 (अरब क्यूबिक मीटर) बीसीएम हो जाएगी, जबकि मांग में सौ प्रतिशत की वृद्धि होगी और यह लगभग 1,500 बीसीएम होगी। इस कारण से इन स्मार्ट शहरों को चेन्नई जैसे सूखे से बचने के लिए कुशल भूजल प्रबंधन और संरक्षण समाधान के साथ आना चाहिए।

विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड), स्मार्ट समाधानों और प्रभावी व्यापार नियमों के साथ इन शहरों को भारत के अगले बड़े व्यापार और वाणिज्य केंद्र के रूप में पोषित किया जाना चाहिए क्योंकि व्यापार सुलभता रैंकिंग हमेशा केवल दिल्ली और मुंबई तक ही सीमित नहीं होगी।

इसके अलावा, ये ऐसे शहर अगले 100 या अधिक शहरों के लिए मार्ग प्रशस्त करेंगे। ये स्मार्ट शहरों के लिए एक नियम पुस्तिका के रूप में कार्य कर सकते हैं।

इस दिशा में काम करके सरकार उन आलोचनाओं को भी जवाब दे पाएगी जो सरकार पर स्मार्ट शहरों के लिए अपने वादों को पूरा न कर पाने का आरोप लगाते हैं।

शहरों की ओर प्रवासन बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2014 से 2050 तक भारत की शहरी आबादी दोगुनी हो जाएगी और यह संख्या विश्व में सबसे बड़ी बढ़त है। 100 स्मार्ट शहरों को क्रियान्वित करने में समय लगेगा, तब तक हम इन 30 शहरों से एक अच्छी शुरुआत कर सकते हैं।

संस्कृति और वाणिज्य के बीच संतुलन बनाकर ये 30 शहर 2030 के अंत तक राष्ट्र की विरासत और भविष्य दोनों के रूप में कार्य कर सकते हैं जो 2029 के अंत तक 6 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

तुषार गुप्ता स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे  @tushjain15 के माध्यम से ट्वीट करते हैं।