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भारत के लिए अब भी चिंता का विषय बना हुआ है कोविड-19 का डेल्टा स्वरूप- इन्साकॉग

इंडियन सार्स-कोवी-2 जिनोमिक्स कंसोर्टियम (इन्साकॉग) ने कहा कि डेल्टा स्वरूप चिंता पैदा करने वाला कोविड-19 का मुख्य स्वरूप बना हुआ है और अन्य स्वरूप भारत से अनुक्रमण डाटा में अब नगण्य हो गए हैं।

न्यूज़-18 की रिपोर्ट के अनुसार, इन्साकॉग ने एक बुलेटिन में कहा कि वैश्विक परिदृश्य में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

बी.1.6.17.2 (एवाई) और एवाई.एक्स सहित डेल्टा स्वरूप वैश्विक रूप से चिंता का मुख्य विषय है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटासेट में या डब्ल्यूएचओ को प्राप्त आँकड़ों के अनुसार सार्स-कोवी-2 के अन्य स्वरूप के घटने की प्रवृत्ति दिख रही है।

आगे कहा गया कि गौर करने वाला कोविड का कोई नया स्वरूप या चिंता उत्पन्न करने वाला कोई अन्य स्वरूप नहीं पाया गया है। कोविड-19 के डेल्टा स्वरूप का सबसे पहले गत वर्ष अक्टूबर में भारत में पता चला था। इसने देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान सबसे अधिक परेशान किया था, जो अप्रैल और मई में सबसे अधिक था।

बता दें कि इन्साकॉग 28 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का एक समूह है, जिसे सार्स-कोवी-2 में संरचना के अंतर की निगरानी के लिए गठित किया गया था। यह एक अखिल भारतीय नेटवर्क है, जो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत कार्य करता है।

हाल ही में महाराष्ट्र में कोविड मृत्यु समिति के इंचार्ज डॉ. अविनाश सूपे ने कहा था कि यदि प्रतिबंध हटने के बाद भी दिसंबर तक महामारी के मामलों में तेज़ी नहीं आती है तो इसका अर्थ होगा कि कोरोना स्थानिक में परिवर्तित हो चुका है।