समाचार
न्यायालय ने दिल्ली दंगे के आरोपी को नहीं दी जमानत, “यह पूर्व नियोजित षड्यंत्र था”

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2020 में उत्तरी-पूर्वी दिल्ली दंगे से संबंधित मामले में मंगलवार (28 सितंबर) को कहा कि देश की राजधानी में कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने का पूर्व नियोजित षड्यंत्र था। न्यायालय ने इससे संबंधित मामले में एक आरोपी को जमानत देने से भी मना कर दिया।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायाधीश सुब्रमण्यम प्रसाद ने दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या से संबंधित मामले में आरोपी मोहम्मद इब्राहिम द्वारा दायर जमानत याचिका पर विचार कर कहा, “घटनास्थल के आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी कैमरों को योजनाबद्ध तरीके से नष्ट किया गया था।”

न्यायालय ने कहा, “दिल्ली दंगे पलभर में नहीं हुए थे। यह सरकार के कामकाज को अस्त-व्यस्त करने के साथ शहर में लोगों के सामान्य जीवन को बाधित करने के लिए सोचा-समझा प्रयास था। सीसीटीवी कैमरों को व्यवस्थित रूप से नष्ट करना कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र की पुष्टि करता है।”

आरोपी इब्राहिम की जमानत याचिका खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा, “वीडियो फुटेज देखकर पता चलता है कि याचिकाकर्ता की पहचान तलवार लेकर और भीड़ को भड़काने के लिए की गई। यह महत्वपूर्ण साक्ष्य है, जो आरोपी को लंबे कारावास में रहने के लिए विवश करता है। आरोपी द्वारा पकड़ा गया हथियार प्रथम दृष्टया खतरनाक है।”

आगे कहा गया कि याचिकाकर्ता को अपराध के दृश्य में नहीं देखा जा सकता है लेकिन वह भीड़ का हिस्सा था। याचिकाकर्ता ने जानबूझकर अपने पड़ोस से 1.6 किमी दूर एक तलवार के साथ यात्रा की थी, जिसका उपयोग हिंसा और भड़काने के लिए किया जा सकता था।