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कुतुब मीनार में हिंदू देवताओं की बहाली की मांग वाली याचिका पर एएसआई का विरोध

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने मंगलवार को दिल्ली की एक न्यायालय में उस याचिका का विरोध किया, जिसमें कुतुब मीनार परिसर के भीतर हिंदू और जैन देवताओं की बहाली की मांग की गई थी। उसने कहा कि स्मारक में पूजा स्थल नहीं है और इसकी वर्तमान स्थिति को परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।

एएसआई ने यह भी कहा कि भूमि की वर्तमान स्थिति के उल्लंघन में आवेदक के मौलिक अधिकार का लाभ नहीं उठाया जा सकता है।

अतिरिक्त जिला न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने एएसआई के निवेदन कि कुतुब मीनार पूजा का स्थान नहीं है और स्मारक की वर्तमान स्थिति को बदला नहीं जा सकता है, को ध्यान में रखते हुए 9 जून के लिए याचिका पर निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

न्यायालय ने जैन देवता तीर्थंकर भगवान् ऋषभ देव की ओर से वकील हरि शंकर जैन द्वारा दायर एक मामले पर आदेश सुरक्षित रखा, जिसमें दावा किया गया था कि मोहम्मद गौरी की सेना के कमांडर कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा 27 मंदिरों को ध्वस्त करवा दिया गया था और कुव्वत-उल-इस्लाम को परिसर के अंदर खड़ा करवा दिया गया था।

जैन ने कहा कि प्राचीन काल से परिसर में स्थित भगवान् गणेश की दो मूर्तियाँ थीं और उन्हें आशंका थी कि एएसआई उन्हें केवल कलाकृतियों के रूप में राष्ट्रीय संग्रहालयों में से एक में हटा देगा।