रक्षा
भारतीय वायुसेना को क्यों और सु-30एमकेआई खरीदने चाहिए

 


प्रसंग :
  • कमजोर बेड़े के आकार और लडाकों के लिए नए सौदे की अनिश्चितता के साथ, भारतीय वायुसेना सु-30एमकेआई को खरीदने का आदेश नहीं देना सहन नहीं कर सकती।

पिछले कुछ महीनों में आई रिपोर्टों के अनुसार भारतीय वायुसेना अपने बेड़े में और ज़्यादा सुखोई सु-30एमकेआई शामिल नहीं करना चाहता जितने उसने 272 से ज़्यादा अनुबंधित किए थे, यह सभी 2020 तक उपलब्ध करा दिये जाएंगे।

यह रिपोर्ट तब आई है जब भारतीय वायुसेना के बेड़े में 42 के मुक़ाबले 31 दस्ते हैं, जिसके एक बड़े हिस्से में पुराने मिग-21 और 27 शामिल हैं। यह सब सु-30एमकेआई की खरीद के खिलाफ न्यायसंगत  बने हुए हैं, जिसमे कहा गया है कि इस विमान की हवाई प्रभुत्व भूमिका है और यह कई तरह के लड़ाके के कार्य नहीं कर सकता, और इसके हवाई जहाज, सुरक्षा सुइट, इंजिन और रेडार- सभी को अपग्रेड किया जा सकता है- जो भविष्य में काम नहीं आने वाले।

जहां यह सभी वायुसेना की वैध चिंताएँ हैं, कई तर्क कम होते हुए बेड़े में दो और तीन लड़ाके स्कूयाड्रोन को शामिल करने के पक्ष में किए जा सकते हैं। यह बिन्दु दिमाग में आते हैं:

पहला: सु-30एमकेआई बेड़े का एक हिस्सा, जिसमे करीब 40 हैं, को संशोधित करके उसे ब्रह्मोस क्रुज़ मिसाइल के हवाई लॉन्च संसकरण, जिसे ब्रह्मोस-ए कहते हैं, को ले जाने में सक्षम बनाना है। मिसाइल को लड़ाके से परीक्षण किया गया है, और ब्रह्मोस फिलहाल कम वजन वाली मिसाइल, ब्रह्मोस एनजी, को तैयार कर रहा है, जिसमे से तीन सु-30एमकेआई ले जाएगा। 2017 में लिवेफिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायसेना द्वारा संचालित दूसरे मंचों को भी एक या दो मिसाइल भरने वाली विन्यास की हथियार प्रणालियाँ मिल सकतीं हैं।

हिंदुस्तान ऐरोनौटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के द्वारा लड़ाकों पर संचनात्मक अभ्यास में पता चला कि, “जो संशोधन इनमें मिसाइल को ले जाने के लिए किए जाने हैं, वह तकनीकी तरीके से खतरनाक और आर्थिक रूप से अस्वीकार्य हैं”। सु-30एमकेआई को संशोधित करके उसे ब्रह्मोस के लायक बनाने के लिए विमान के नीचे का हिस्सा मजबूत करना होगा और एक अत्यधिक टिकाऊ स्टेशन को लगाना होगा। इसलिए, मौजूदा बेड़े के लड़ाके जो टूट-फूट गए हैं और जिंदगी का एक हिस्सा बिता चुके हैं, को संशोधित करने से अच्छा है कि संशोधनों वाले नए लड़ाकों को खरीदा जाए जो मिसाइल के हवाई संस्करण को ले जाने सक्षम हों।

एचएएल के प्रबंध निदेशक टी सुवर्णा राजू ने भी इन शब्दों में तर्क दिया है:

दूसरा, भारतीय वायुसेना के नए प्रयास में जिसमे नए लड़ाके खरीदे जाने हैं, के लिए इस साल अप्रैल में टेंडर निकले गए थे, जिनका 2019 के लोक सभा चुनावों की राजनीतिक रूप से प्रभावित हवा में आगे बढ़ना मुश्किल है। यह जब भी होगा, तब प्रस्तावित खरीद के घटक पर मूल्य निर्धारण और ‘मेक इन इंडिया’ के ऊपर बातचीत सालों का समय ले सकते हैं। यहाँ तक कि सबसे आशावादी खातों से भी, अगर टेंडर से डील हो जाती है, तब भी 2024 से पहले वितरण शुरू नहीं हो पाएगा।

तीसरा, एचएएल तेजस विमान जल्दी नहीं बना रहा है। अगस्त 2017 तक एचएएल ने 20 मार्क 1 फ़ाईटर्स में से सिर्फ तीन तेजस लड़ाके भारतीय वायुसेना को भेजे थे, जो 2013 में ऑर्डर हुए थे। इन लड़ाको को 2016 तक भेजा जाना था। इसके अलावा, 83 मार्क 1 ए फ़ाईटर्स जिसके लिए भारतीय वायुसेना ने अनुबंध किया था, उसका उत्पादन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है और शायद 2020 से पहले होगा भी नहीं। यह तो तब है जब एचएएल समयानुसार चले। तेजस का मार्क II संस्कारण, जो अभी रेखांकित हे हो रहा है और जिसमे भारतीय वायुसेना की जरूरत के अनुसार क्षमताएँ होंगी, वह 2025 के बाद ही मिल पाएगा।

एचएएल का उत्पादन कार्यक्रम इस प्रकार है:

     साल  तैयार किया गया नंबर   बेड़े का कुल आकार        विन्यास
31 मार्च 2017 तक  3 तेजस मार्क 1  3 तेजस मार्क 1 प्रारंभिक परिचालन निकासी (आईओसी)
2017-2018  8 तेजस मार्क 1 11 तेजस मार्क 1 आईओसी
2018-2019 10 तेजस मार्क 1 20 तेजस मार्क 1 आईओसी में 5 एकल-  सीट लड़ाके, आईओसी में 4 दोहरे-सीट लड़ाके और एक खाली
2019-2020 16 तेजस मार्क 1 ए 20 तेजस मार्क 1

16 तेजस मार्क 1 ए

2020-2024 67 तेजस 20 तेजस मार्क 1

83 तेजस मार्क 1 ए

2024-25 से तेजस मार्क II

डेटा स्त्रोत: अजय शुक्ला/बोर्डस्वोर्ड

एचएएल ने यह अनुमान लगाया था कि वह 2018-19 में 10 लड़ाके और 2018-19 से हर साल 16 तेजस मार्क 1 ए बना लेगा। इस दर से, भारतीय वायुसेना में 2024 तक मार्क 1 और मार्क 1 ए विन्यास के करीब 100 विमान हो सकते हैं, जो पीएसयू के प्रदर्शन से बड़ा हो सकता। भारतीय वायुसेना में मिग-21एस और मिग 27एस के पुराने हो चुके बेड़े, जो करीब 10 साल पहले हटा देने चाहिए थे,  को बदलने के लिए यह सब काफी नहीं है। भारतीय वायुसेना के कुछ बेड़ों में करीब 130 मिग 21एस और 27एस सेवा में हैं। हालांकि, अगर भारतीय वायुसेना सेवामुक्त होने वाले मिगों को तेजस लड़ाकों से बदलने का प्रतिबंधन भी करें, जो 2024 तक मिल पाएंगे, तो भी इस अदलाबदली के साथ भी लड़ाकों की  संख्या नहीं बढ़ेगी।

फिर, इसके लिए एचएएल को अपने उत्पादन कार्यक्रम का पालन करना पड़ेगा। एचएएल के इस योगदान में कमी होने से भारतीय वायुसेना का पतन और तेजी से 2020 से शुरू हो जाएगा।

इस परिदृश्य में, 2020 तक सु-30एमकेआई के दो शेष लड़ाकों को शामिल करने से 31 की संख्या में बस एक जोड़ा जाएगा और उड़ने की स्थिति में 2022 तक राफेल फ़ाईटर्स के दो लड़ाकों को लाया जाएगा। इन चार लड़ाकों के मिल जाने से इसके संख्या 35 तक हो जाएगी।

अगर भारतीय वायुसेना इस समय अतिरिक्त सु-30एमकेआई को बनाने का ऑर्डर देता है तो बेड़े में 2 या 3 और लड़ाके शामिल हो जाएंगे (यह ऑर्डर देने वाली संख्या पर निर्भर करेगा), जिससे इसकी संख्या 2023-24 तक 37 या 38 हो जाएगी। एचएएल पहले से ऑर्डर किए गए 272 में से बचे हुए 25 के  2020 तक वितरण के लिए तैयार है। अगर यह एक साल में 12 सु-30एमकेआई उत्पादित करता है तो 2020 के बाद तीन साल के छोटे से समय में यह 40 का निर्माण कर सकता है।

जैसा कि तेजस के वितरण में और बहू-भूमिका के लड़ाकों के नए सौदे को अनिश्चितताएँ घेरे हुए हैं, सु-30एमकेआई के अतिरिक्त ऑर्डर करने से, उत्पादन सेट उप की उपलब्धता को देखते हुए यह फायदेमंद रहेगा।

प्रखर गुप्ता स्वराज्य के वरिष्ठ उप-संपादक हैं। आप इन्हें @prakhar4991 पर फॉलो कर सकते हैं