रक्षा
लद्दाख में नहीं कम हुई भारतीय सैनिकों की तैनाती, चीन स्थिति मज़बूत करने में लगा

भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे ने भले ही यह नहीं कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएएसी) पर वर्तमान में जो स्थिति है, वही अब सामान्य रूप से रहने वाली है लेकिन उन्होंने इसका संकेत तो दे ही दिया है कि चीन के साथ तनाव शीघ्र समाप्त नहीं होने वाला और सैनिकों को दीर्घ अवधि की तैनाती के लिए तैयार रहना चाहिए।

सेना प्रमुख ने बताया कि लद्दाख में तैनात सैनिकों की वर्तमान संख्या उतनी ही है जितनी चीन के विरुद्ध संघर्ष के उच्चतम शिखर के समय थी। “उतने ही सैनिक तैनात हैं जितने संघर्ष के शिखर के समय थे।”, लद्दाख में 50-60,000 सैनिकों की तैनाती के विषय में जनरल नरवाणे ने कहा।

उन्होंने बताया कि सैनिकों की यह संख्या लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक एलएएसी पर तब तक रहेगी जब तक भारत और चीन तनाव कम करने के लिए सहमत नहीं हो जाते हैं। उनके अनुसार सैनिक पीछे हटे हैं लेकिन तनाव अभी भी कम नहीं हुआ है।

“इसी कारण उत्तरी मोर्चे के पूरे क्षेत्र में इतनी भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती है। जब मैं उत्तरी मोर्चा कह रहा हूँ तो इसमें सिर्फ पूर्वी लद्दाख नहीं आता है, बल्कि लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक पूरा मोर्चा। यह तैनाती तब तक रहेगी जब तक वार्ता जारी है और तनाव कम नहीं हो जाता।”, सेना प्रमुख ने कहा।

“दीर्घ अवधि की तैनाती के लिए भी हमें तैयार रहना होगा।”, उन्होंने आगे कहा। विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के कारण हो सकता है कि एलएएसी पर भारत और चीन अधिक सैन्य व्यवस्था करें। जब सेना प्रमुख से पूछा गया कि पिछले क्षेत्रों में चीन अपनी स्थिति मज़बूत कर रहा है, तो उन्होंने बताया भारत ने भी ऐसा किया है।

“इंफ्रास्ट्रक्चर विकास एक सतत प्रक्रिया है। चीन अपनी सुविधाएँ, इंफ्रास्ट्रक्चर और भंडारण दुरुस्त कर रहा है तथा ऐसा ही हम भी कर रहे हैं।”, जनरल नरवाणे ने कहा। “हम इस घटनाक्रम पर दृष्टि बनाए हुए हैं और मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में किसी भी तरह से हम पीछे नहीं हैं।”, उन्होंने आगे कहा।

ध्यान देने योग्य बात है कि रक्षा मंत्रालय ने शिन्कु ला दर्रे के अंदर 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग के निर्माण की अनुमति दे दी है जिसके माध्यम से लद्दाख को देश से जोड़ने वाली निर्माणाधीन तीसरी सड़क, जो 297 किलोमीटर लंबी है, गुज़रेगी।

निम्मू-पादुम-दरचा सड़क निमो से शुरू होगी जो लेह-श्रीनगर राजमार्ग पर लेह से 35 किलोमीटर पहले पड़ता है। पादुम तक यह सड़क ज़न्सकार नदी के साथ-साथ चलेगी जिसके बाद यह पुर्ने गाँव तक लुन्गनाक नदी की मार्गरेखा के साथ हो लेगी।

हिमाचल और लद्दाख की सीमा पर स्थित शिन्कु ला दर्रे तक यह कुरगियाख नदी के साथ चलेगी। लाहौल और स्पीति जिले में स्थित एक गाँव- दरचा में सड़क मनाली-लेह राजमार्ग से जा मिलेगी। दरचा और शिन्कु ला के बीच की सड़क बनाई जा चुकी है, शेष भागों पर निर्माण कार्य जारी है।

इस सड़क की महत्त्वपूर्ण कड़ी, जो कि शिन्कु ला पर एक सुरंग है, पर अभीतक काम शुरू नहीं हो पाया था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के हिम एवं हिमस्खलन अध्ययन केंद्र अधिष्ठान ने इस क्षेत्र और भूविज्ञान अध्ययन के बाद सुरंग की मार्गरेखा के तीन विकल्प प्रस्तावित किए थे।

इनमें से पहला विकल्प था 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग जो दरचा (मनाली-लेह राजमार्ग से 99 किलोमीटर दूर) से 36.5 किलोमीटर दूर है। दूसरा विकल्प 7 किलोमीटर और तीसरा विकल्प 13.81 किलोमीटर लंबी सुरंग का था।

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग वाले विकल्प के साथ आगे बढ़ने को कहा, वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास निगम तीसरे विकल्प के पक्ष में था जिसमें 13.81 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने की बात है।

बीआरओ ने तर्क दिया कि 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग के विकल्प में सर्वश्रेष्ठ ढलान, न्यूनतम भार और न्यूनतम सहायता की आवश्यकता होगी जिसके बाद स्वीकृति मिल गई। यह सड़क सिर्फ इसलिए महत्त्वपूर्ण नहीं है कि यह अन्य दो मार्गों से अधिक सुरक्षित है, बल्कि यह लद्दाख को देश से जोड़ने वाली पहली हर-मौसम की सड़क होगी।

वहीं, दूसरी ओर इस माह की शुरुआत के उपग्रह चित्र दर्शाते हैं कि ज़िनजियांग-तिब्बत (जी219) राजमार्ग पर तिब्बत के रुतोग काउंटी में चीन अपनी स्थिति मज़बूत कर रहा है। यह क्षेत्र पैंगोन्ग झील के पूर्वी तट पर स्थित है और एलएसी से अधिक दूर नहीं है।

इस क्षेत्र में आवास की कई प्रीफैब्रिकेटेड संरचनाएँ देखी जा सकती हैं जो दर्शाती हैं कि वहाँ बड़ी संख्या में चीनी सैनिक रह रहे हैं। उनके पास कई तरह के वाहन भी हैं जिनमें सहयोग और आक्रामक इकाई द्वारा उपयोग किए जाने वाले वाहन भी हैं।

अन्य बातों के साथ कैमोफ्लाज स्थानों की संख्या भी काफी अधिक है जिसमें संभवतः हथियार रखे हों। पहले यह समाचार आया था कि चीन ने अक्साई चिन के उत्तर में स्थित जी219 राजमार्ग पर कांग्सिवार और रुतोंग के बीच संरचनाएँ बनाई थीं।

खुफिया एजेंसी का अनुमान है कि कांग्सिवार और रुतोंग में तैनात 10,000 स्थाई चीनी सैनिकों के सहयोग के लिए पीएलए 10,000 अतिरिक्त सैन्यबल लेकर आया है। यह सब उस समय हो रहा है जब गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स से पिछले दौर की वार्ता में चीन ने पीछे हटने से मना कर दिया था जिसके कारण तनाव जारी है।