रक्षा
आतंकियों की स्टील गोलियों से सेना परेशान, बुलेट प्रूफ जैकेट में सुधार आवश्यक

जम्मू-कश्मीर में हाल ही में आतंकियों के स्टील की गोलियों के उपयोग के बाद सेना के जवानों के लिए खतरा बढ़ गया है। इससे निपटने के लिए सुरक्षा बल तत्काल और दीर्घकालिक उपाय कर रहा है।

हिंदुस्तान टाइम्स  की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बल ने कहा, “आतंकवादियों के हाल ही में स्टील की गोलियों के उपयोग की बात सामने आई है। तत्काल उपायों में काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन के दौरान उपयोग किए जाने वाले बुलेटप्रूफ जैकेट को और मजबूत बनाना होगा।” एक वरिष्ठ सुरक्षा बल अधिकारी ने कहा, “दीर्घकालिक उपायों में बुलेट प्रूफ उपकरणों में सुधार शामिल होंगे, जिनमें जवानों के हेलमेट और जैकेट भी हैं।”

12 जून को अनंतनाग में सुरक्षाबलों पर हमले में आतंकियों की राइफल से स्टील बुलेट निकली थी। इसकी आंतरिक जाँच के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और राज्य पुलिस के बीच एक चेतावनी जारी की गई थी। जाँच के निष्कर्षों से पता चलता है कि जैश-ए-मोहम्मद एक ऐसा फिदायीन आतंकवादी था, जो स्टील की गोलियों का इस्तेमाल करता था।

सूत्रों की मानें तो मारे गए आतंकवादी की राइफल मैग्जीन में 18 जिंदा स्टील की गोलियाँ मिली थीं। उन्होंने सीआरपीएफ के जवानों और राज्य पुलिस के अधिकारी अरशद खान को निशाना बनाने के लिए उनमें से कुछ का इस्तेमाल किया था।

सीआरपीएफ की जाँच में यह भी पता चला है कि जम्मू-कश्मीर के आतंकियों ने 2017 में स्टील की गोलियों का इस्तेमाल किया था लेकिन पिछले साल के हमलों के दौरान नहीं। एक अन्य सूत्र के हवाले से पता चला है कि सुरक्षा बलों द्वारा बुलेटप्रूफ जैकेट में अधिक सुरक्षात्मक परतें लगाई जा रही हैं। भविष्य में उपचारात्मक उपाय इस बात पर निर्भर करेगा कि वर्तमान बुलेट प्रूफ उपकरण को कितनी जल्दी चरणबद्ध किया गया है।