रक्षा
टाटा समूह जर्मनी के सहयोग से भारत में करेगा सैन्य विमान का विकास और निर्माण

टाटा समूह ने भारत में स्वदेशी सैन्य विमान के विकास और निर्माण के लिए जर्मन मूल के मंच की बौद्धिक संपदा का अधिकार प्राप्त किया है।

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, समूह की योजना देशी सेंसर व पेलोड को मर्ज करने और इसे एक खुफिया परिसंपत्ति में बदलने की है। दो इंजन, उच्च ऊँचाई वाले विमान कई प्रकार की भूमिकाओं को निभा सकते हैं। इसे सिग्नल इंटेलिजेंस के साथ सीमा पार निगरानी के लिए तैनात किया जा सकता है। वर्तमान में यह जर्मनी में परीक्षण के अपने अंतिम चरण में है।

इसके आगे का एकीकरण करीब तीन महीनों में भारत में आने पर होगा। अब तक पूर्ण सैन्य श्रेणी के विमान के निर्माण का स्वामित्व एयरोस्पेस और रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (एचएएल) के दायरे में था। हालाँकि, यह पहली बार है जब कोई निजी भारतीय इकाई इस क्षेत्र में जा रही है। ग्रोब जी 180 एसपीएन एक जर्मन जेट है, जो वित्तीय जटिलताओं के कारण क्रमिक उत्पादन तक पहुँचने में विफल रहा था।

यह 41,000 फीट की ऊँचाई पर उड़ भर सकता है और अधिकतम 45,000 फीट तक जा सकता है। विमान में 1800 नॉटिकल मील की रेंज होने की संभावना है। यह 1000 किलोग्राम से अधिक की पेलोड क्षमता के साथ 6 से 7 घंटे उड़ान भर सकता है। साथ ही यह इतने भार के साथ बजरी और घास पर उतर सकता है।

टीएएसएल के एमडी सुकर्ण सिंह ने कहा, “अब हम विशेष पेलोड को फिट करने के लिए विमान को संशोधित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि यह निगरानी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सके। भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ देशभर में कई पर्वत शृंखलाओं के साथ फैली हैं इसलिए इस तरह की जरूरतों को पूरा करने वाले विमानों के लिए भारत को अभी विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता है।”

सिंह ने आगे कहा, “टीएएसएल इस विमान तकनीक को लाने के साथ ही भारत में अत्याधुनिक एयर-बॉर्न निगरानी मंच भी बनाएगा, जिससे सॉफ्टवेयर, नियंत्रण और साथ ही रखरखाव देश के भीतर ही हो सकेगा।” जल्द ही टाटा समूह द्वारा एक संयंत्र जो इन नए डिजाइन किए गए विमानों के निर्माण को पूरा करेगा, उसे स्थापित किया जाएगा।