रक्षा
लद्दाख में चीन सीमा पर भारत बना रहा है “महत्त्वपूर्ण सड़क”- सरकार ने संसद को बताया

लद्दाख में चीन से लगी सीमा पर भारत एक “महत्त्वपूर्ण सड़क” बना रहा है, इस बात की जानकारी नरेंद्र मोदी सरकार ने गृह मंत्रालय की संसदीय समिति को दी जिसने 15 मार्च को राज्यसभा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समिति की रिपोर्ट के अनुसार यह सड़क एक “स्वतंत्र” परियोजना के तहत बनाई जा रही है।

हालाँकि, सड़क की सटीक भौगोलिक स्थिति या किन बिंदुओं को यह जोड़ती है, यह उजागर नहीं किया गया है। इस रिपोर्ट को लोकसभा में भी प्रस्तुत किया गया जिसमें लिखा है- भारत-चीन सीमा पर “चल रही और नई अनेक परियोजनाओं” में से एक है “लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर एक स्वतंत्र परियोजना के तहत एक सड़क निर्माण”।

रिपोर्ट में उजागर किया गया है कि पिछले वर्ष के नवंबर तक भारत-चीन सीमा पर लगभग 538.5 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण करवाया जा चुका है। इसके अलावा जानकारी दी गई है कि भारत-चीन सीमा सड़क (आईसीबीआर) परियोजना के पहले चरण में आने वाली 25 सड़कों पर भारत काम कर रहा है।

चीम सीमा पर दूसरे चरण की 32 आईसीबीआर सड़कों के निर्माण, 32 हेलिपैड का निर्माण या उन्नत किए जाने, अरुणाचल प्रदेश में 18 पैदल मार्ग, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की 47 नई सीमा चौकियों और 12 मंचन शिविरों पर भी काम जारी है।

“… वित्तीय वर्ष 2020-21 में भारती-चीन सीमा सड़क के दूसरे चरण के कार्यक्रम को अनुमति मिली। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कई सड़कें, पैदल मार्ग और चीमा चौकियाँ आती हैं।”, रिपोर्ट में कहा गया। संसदीय समिति ने सरकार से लद्दाख के सभी गाँवों का विद्युतीकरण करके संचार सुविधाओं को बेहतर करने के लिए कहा है।

दिसंबर 2020 में लद्दाख के एक गाँव को मिली बिजली

इसमें “चुनार और देमचुक जैसे शून्य-सीमा पर स्थिति गाँवों” पर ज़ोर दिया गया है ताकि इन क्षेत्रों से लोगों के प्रवासन को रोका जा सके क्योंकि सीमा क्षेत्रों में स्थानीय लोग सुरक्षा बलों की ‘आँख और कान’ होते हैं। समिति का कहना है कि इससे “इन दूरस्थ लेकिन रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की विकास आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।”

“… सीमा जनसंख्या सुरक्षा की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है… वे सुरक्षा बलों की ‘आँख और कान’ की तरह काम करते हैं। इसके अलावा देश के छोरों पर रहने के कारण सीमा जनसंख्या क्षेत्रों पर दावा करने में और अंतर्राष्ट्रीय सीमा को परिभाषित करने तथा बनाए रखने में भी सहायता करती है।”, समिति का कहना है।

“समिति कहती है कि रहने योग्य 236 गाँवों में से 172 गाँवों में दूरसंचार इंफ्रास्ट्रक्चर है तथा क्रमशः मात्र 24 और 78 गाँवों में 3जी एवं 4जी इंटरनेट कनेक्टिविटी है जो कि काफी कम है।”, रिपोर्ट में दावा किया गया। समिति ने गृह मंत्रालय को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से लद्दाख के लेह तक रेलवे लाइन पर विचार करने को भी कहा है।

समिति का सुझाव है कि गृह मंत्रालय चर्चा को उठाए तथा रेल एवं रक्षा मंत्रालय परियोजना पर “अंतिम निर्णय” लें। रिपोर्ट के अनुसार समिति को गृह मंत्रालय ने बताया था कि “बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) से लेह के बीच रेलवे लाइन का निर्माण क्षेत्र में तैनात सैनिकों के लिए रणनीतिक रूप से लाभकारी होगा।”

चेनाब नदी पर निर्माणाधीन विश्व का सबसे ऊँचा रेलवे पुल

रिपोर्ट में कहा गया, “समिति सुझाव देती है कि गृह मंत्रालय रेल मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय से इस बात पर चर्चा करे ताकि परियोजना पर अंतिम निर्णय लिया जा सके।” पैंगोंग सो झील के दक्षिणी तथा उत्तरी तटों से भारतीय और चीनी सेनाओं द्वारा पीछे हटने की घोषणा के कुछ सप्ताह बाद यह रिपोर्ट आई है।

नौ महीनों से अधिक समय के लिए भारत और चीन इन क्षेत्रों में एक-दूसरे के आमने-सामने बने हुए थे। देपसांग मैदान समेत तनाव के अन्य क्षेत्रों में अभी भी सुरक्षा बल तैनात हैं। साथ ही इस तनाव को कम करने के लिए दोनों पक्षा लगातार बातचीत भी कर रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में आईसीबीआर परियोजना के तहत सीमा सड़कों के निर्माण को गति मिली है जबकि इससे पहले दशक भर से लंबे समय तक धीमी गति से ही इस परियोजना पर काम हो रहा था। 2020 में भारत की सीमाओं पर सड़क निर्माण के लिए ज़िम्मेदार एजेंसी- सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने अपने प्रदर्शन में काफी सुधार किया।

पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनातनी और विश्व भर में फैली कोविड महामारी के बीच भी वर्ष 2020 में सीमा सड़कों पर काफी काम हुआ। रक्षा मंत्रालय की वर्षांत समीक्षा में बताया गया कि बीआरओ ने 1,993 किलोमीटर सड़क के लिए कटाई-भराई का काम और 2,431 किलोमीटर लंबी सड़क 2020 में बिछाई।

2,683 मीटर लंबे पुल बनाए गए, 2,508 किलोमीटर लंबी सड़कों की मरम्मत के साथ कुल 1,819 करोड़ रुपये स्थाई निर्माण कार्य पर खर्च किए गए। इससे पहले, पिछले वर्ष, 2019 में 1,123 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए कटाई-भराई का काम, 2,099 किलोमीटर सड़क बिछाने, 2,557 मीटर लंबे पुल का निर्माण और 2,339 किलोमीटर लंबी सड़कों की मरम्मत के साथ स्थाई निर्माण पर 1,601 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

प्रखर स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @prakharkgupta के माध्यम से ट्वीट करते हैं।