रक्षा
मॉरिशस के अगलेगा द्वीप पर बन रहा भारत का गोपनीय सैन्य बेस कैसे ले रहा है आकार

2015 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉरिशस दौरे पर गए थे तो भारत ने भारतीय महासागर में दूरस्थ इस द्वीप राष्ट्र से “इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना और उन्नतीकरण” का समझौता किया था, यानी देश के अगालेगा द्वीपसमूह पर भारत को एक सैन्य बेस बनाना था।

योजना थी कि द्वीप के बीच में एक रनवे बनाया जाए जो बी737-900 और एयरबस 321 श्रेणी के विमानों के परिचालन में सहायता कर सके। इसके अलावा वर्तमान में बनी हुई जेट्टी के निकट एक बंदरगाह, संचार माध्यमों तथा मित्र और शत्रु जहाज़ों में भेद करने वाली ट्रन्सपॉन्डर प्रणाली जैसे खुफिया अधिष्ठापनों के लिए एक संरचना की भी योजना थी।

2005 में पहली बार विवाद का विषय बनी यह परियोजना मॉरिशस की घरेलू राजनीति में संदेह का मुद्दा बन गई थी जिसके कारण समझौता होने के कुछ वर्ष बाद भी थोड़ा ही काम हो सका। लेकिन 2018 में नरेंद्र मोदी सरकार ने द्वीप पर रनवे तथा पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए भारत की एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को परियोजना सौंप दी और 2019 में कार्य शुरू हो गया।

भारत और मॉरिशस के बीच समझौता होने के छह वर्षों बाद गुप्त रूप से यह बेस अगलेगा के दो द्वीपों में से उत्तरी द्वीप पर आकार ले रहा है। यह मॉरिशस के मुख्य द्वीप से 1,100 किलोमीटर दूर उत्तर की दिशा में स्थित है।

भौगोलिक स्थिति

दक्षिणी-पश्चिम भारतीय महासागर के मध्य में पड़ने वाले इस द्वीप के उत्तर में सेयचिलिस, पूर्व में माल्दीव्स तथा डिएगो गारशिया में स्थित यूएस सैन्य बेस और पश्चिम में मैडागास्कर व अफ्रीका का पूर्वी तट स्थित है। हाल में जारी एक सैटेलाइट चित्र में उत्तरी अगलेगा द्वीप पर विकासशील बेस में महत्त्वपूर्ण प्रगति देखी जा सकती है।

यह चित्र ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के नेशनल सेक्यॉरिटी कॉलेज के शोध अधिकारी सैम्युअल बैशफील्ड ने सिडनी-आधारित लोवि संस्थान द्वारा चलाए जाने वाले ब्लॉग द इंटरप्रेटर में एक लेख के साथ साझा किया है। दिसंबर 2020 में लिया गया यह चित्र दर्शाता है कि 3,000 मीटर लंबा रनवे द्वीप के मध्य भाग में बन चुका है।

इस रनवे के बगल में एक छोटी हवाई पट्टी है जो कि 1980 के दशक के मध्य से ही वहाँ स्थित है। यह हवाई पट्टी इतनी खराब थी कि भारत से खरीदा गया डॉर्नियर 228 विमान जिसे मॉरिशस कोस्ट गार्ड चलाता है, द्वीप से उड़ान भरने और लैंडिंग के समय कई बार क्षतिग्रस्त हो गया।

चित्र में विमानों के लिए ऐप्रन क्षेत्र को भी देखा जा सकता है जो नए और पुराने रनवे के बीच स्थित है। नए रनवे के उत्तरी छोर पर कुछ नई संरचनाएँ भी बनी हैं। काफी बड़े क्षेत्र में स्थित ये संरचनाएँ भविष्य में द्वीप पर सैनिकों के रहने जैसी सुविधाओं के साथ संभवतः सैन्य उपयोग के लिए होंगी।

द्वीप के उत्तरी भाग में, पहले से बनी हुई एक छोटी जेट्टी के निकट परियोजना का भाग रहने वाली बंदरगाह सुविधाएँ उभर रही हैं। नए रनवे के उत्तर-पश्चिम में स्थित वर्तमान जेट्टी के निकट सैटेलाइट चित्र में काफी निर्माण गतिविधियों को देखा जा सकता है।

सैकड़ों भारतीय निर्माण कर्मचारियों के रहने के लिए दो अलग-अलग बस्तियों में कई भवन भी बन गए हैं। इनमें से कुछ भवन अस्थाई होंगे जबकि कुछ को भावी उपयोग के लिए रखा जाएगा। द्वीप पर बनी संरचनाओं के अलावा दिसंबर 2020 के सैटेलाइट चित्र में दो नई जेट्टी को भी देखा जा सकता है।

पहले से द्वीप पर बनी जेट्टी की तुलना में ये दोनों जेट्टियाँँ काफी लंबी हैं और गहरे पानी तक जाती हैं। विवरणात्मक परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुसार जेट्टी इंफ्रास्ट्रक्चर 149 मीटर लंबे और 9 मीटर गहरे जहाज़ों की उपयोगिता के अनुसार बनाया जाना था।

बेस के लिए समुद्री और हवाई ट्रैफिक नियंत्रण भवन जैसे सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर, विमान घर, द्वीप के रनवे के लिए यात्री टर्मिनल, अलवणीकरण संयंत्र, बिजली, पानी तथा सिवरेज (नलजल निस्तारण प्रणाली) जैसी सुविधाओं को अगले कुछ महीनों में बनाया जाएगा।

यह परियोजना पूर्णतः गोपनीय है और भारत तथा मॉरिशस, दोनों ही देशों ने बेस पर हुए समझौते को गोपनीय ही रखा है। 2018 में मॉरिशस की उप-प्रधानमंत्री फज़िला जीवा दौरेवू ने देश की राष्ट्रीय सभा में कहा था कि भारत के साथ किया गया समझौता “गोपनीय है जिसे आंशिक या पूर्ण रूप से उजागर नहीं किया जा सकता है।”

2017 में जब राष्ट्रीय सभा में नेता प्रतिपक्ष ने प्रश्न किया था कि क्या अगलेगा में भारत अपने सैनिकों को भी तैनात करेगा तो प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ ने कहा था कि इसके लिए भारत को “मॉरिशियाई प्राधिकारियों से अनुमति की आवश्यकता होगी।”

अगलेगा में बन रहा इंफ्रास्ट्रक्चर अफ्रीका के दक्षिणी-पूर्वी तट के निकट जल क्षेत्र समेत पश्चिमी भारतीय महासागर में भारत की हवाई और सतही समुद्री परिसंपत्तियों की सहायता करेगा। रणनीतिक दृष्टि से यह एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है जहाँ भारतीय नौसेना की गतिविधियाँ तुलनात्मक रूप से अभी तक सीमित ही रही हैं।

भारतीय नौसेना के लंबी दूरी तक निगरानी रखने वाले समुद्री विमान पी-8आई इस द्वीप पर बने 3,000 मीटर लंबे रनवे से उड़ान भर सकेंगे। हाल ही में भारत ने भारतीय महासागर के इस क्षेत्र में एक पी-8आई को तैनात किया था ताकि मॉरिशियस के निकट स्थिति रीयूनियन द्वीप पर फ्रांस के साथ संयुक्त गश्त लगाई जा सके।

रसद विनिमय समझौता (लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज ऐग्रीमेन्ट) जो भारत ने जापान, फ्रांस और यूनाइटेड स्टेट्स के साथ किया है, उससे इसकी पहुँच उन देशों की सैन्य सुविधाओं तक है तथा इन तीनों ही देशों का बेस पश्चिमी भारतीय महासागर में है।

भारतीय नौसेना मॉरीशस और सेयचिलिस में मिशन आधारित तैनातियों के तहत पश्चिमी भारतीय महासागर में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है, ऐसे में अगलेगा में बनने वाली ये सुविधाएँ इस क्षेत्र में तैनात भारतीय युद्दपोतों का सहयोग करेगी।

2015 में भारत ने समुद्री सुरक्षा रणनीति जारी की थी। भारतीय महासागर का दक्षिणी-पश्चिमी भाग जिसमें मोज़ौम्बिक चैनल (संचार के लिए समुद्री लाइन जिसका उपयोग केप ऑफ गुड होप के शिपिंग परिवहन के लिए होता है) और अफ्रीका का पूर्वी तट भी आता है, उसे रुचि के प्रमुख क्षेत्रों की सूची में डाला गया है। इस क्षेत्र में चीन भी भारी निवेश कर रहा है।

इस बेस का उपयोग मानवीय सहयोग और आपदा राहत ऑपरेशन्स के लिए मंच की तरह भी हो सकता है जो कि भारतीय कूटनीति की एक पहचान बन गई है। इसी प्रयास के तहत आईएनएस जलाश्व सूखे से राहत पहुँचाने के लिए मैडागास्कर गया है जो कि मॉरिशस से अधिक दूर नहीं है।

द्वीप पर नया संचार और खुफिया इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा जो भारतीय महासागर के इस क्षेत्र की परिस्थितियों के प्रति भारत की जागरूकता बढ़ाएगा। जिबौती में एक बेस के साथ चीन की यहाँ बढ़ती उपस्थिति से इस जागरूकता का महत्त्व समझा जा सकता है। भारत की समुद्री क्षेत्र जागरूकता परियोजना का मॉरिशस पहले से ही एक भाग है और इस द्वीप समूह के हर तरफ कई तटीय निगरानी स्टेशन क्रियाशील हैं।

एक तरफ जहाँ दक्षिणी-पश्चिमी भारतीय महासागर में स्थित सेयचिलिस के अज़म्पशन द्वीप पर भारत का सैन्य और रसद इंफ्रास्ट्रक्चर आगे नहीं बढ़ पा रहा है, वहीं इसे देखते हुए इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना की उपस्थिति और गतिविधि बढ़ाने के लिए अगलेगा में बन रहे बेस का महत्त्व और बढ़ जाता है।

प्रखर स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @prakharkgupta के माध्यम से ट्वीट करते हैं।