रक्षा
मुधोल- पहली बार भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने वाले कर्नाटक के देसी कुत्ते
हर्षा भट - 26th February 2021

भारतीय वायुसेना के आगरा एयरबेस पर 14 फरवरी को चार नए विशेष सदस्य शामिल किए गए। पहली बार कर्नाटक से भारतीय प्रजाति मुधोल के शिकारी कुत्तों को वायुसेना में सम्मिलित किया गया है जो पक्षियों के टकराने के खतरे को कम करेंगे और रनवे से पशु-पक्षियों को भगाएँगे।

इनमें दो नर और डेढ़ महीने के दो मादा पिल्लों को कर्नाटक के मुधोल में स्थित कैनाइन रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सेंटर (क्रिक) से लाया गया, इसी स्थान के नाम से इस प्रजाति को नाम मिला है। पक्षियों को रनवे से हटाने का प्रशिक्षण इन्हें दिया जाएगा क्योंकि कहा जाता है कि कई एयरबेसों पर पक्षियों के टकराने की समस्या काफी बड़ी है।

कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री गोविंद एम कारजोल ने क्रिक के पक्ष से पिल्लों को भारतीय वायुसेना को सौंपा। इससे पहले इस प्रजाति के कुत्ते भारतीय सेना में सम्मिलित हो चुके हैं।

उनकी शारीरिक क्षमता, स्फूर्ति और बुद्धिमता उन्हें कई कार्यों के लिए उपयुक्त बनाती है एवं सैन्य बलों द्वारा उन्हें कई कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, क्रिक के प्रमुख महेश अकाशी ने उनकी उपयोगित के विषय में समझाते हुए स्वराज्य को बताया।

पहली बार 2016 में छह पिल्लों को भारतीय सेना के मेरठ स्थित इंडियन आर्मी रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स में सम्मिलित किया गया था जहाँ उन्हें एक वर्ष का प्रशिक्षण देने के बाद जम्मू और कश्मीर में तैनात कर दिया गया।

“हमारे वर्तमान उप-मुख्यमंत्री गोविंद कारजोल और तत्कालीन केंद्रीय पशुपालन विभाग आयुक्त डॉ सुरेश एस होन्नप्पगोल जो इसी क्षेत्र से आते हैं तथा हमारे केंद्र के प्रमुख महेश एस दोड्डामने ने हमारे सैन्य बलों में देसी प्रजाति के प्रवेश पर ज़ोर दिया जहाँ अब तक सिर्फ पश्चिमी प्रजातियाँ ही सेवारत थीं।”, अकाशी ने बताया।

भारतीय वायुसेना को मुधोल सौंपते कारजोल

इसके बाद यह पूरा क्षेत्र इस देसी दुबले कुत्ते की प्रजाति की ‘प्रजनन भूमि’ (ब्रीडिंग ग्राउंड) बन गया और इस क्षेत्र के कई लोगों की जीविका का मुख्य स्रोत भी क्योंकि प्रति वर्ष सैकड़ों मुधोल कुत्ते बिकने लगे।

हाल में इसे और बल तब मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी समकक्षों के तुल्य इन आक्रामक और बुद्धिमान खोजी कुत्तों का उल्लेख सितंबर 2020 में अपने ‘मन की बात’ में किया।

“शुरुआत में बलों में सम्मिलित किए गए कुत्तों के परिणाम देखने के बाद हमने इन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल, सशस्त्र सीमा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल जैसे अर्ध सैन्य बलों को भी दिया। जब से मैंने प्रभार लिया है, तबसे हमने बीएसएफ को चार पिल्ले और इस माह की 12 तारीख को पहली बार भारतीय वायुसेना को यह प्रजाति सौंपी है।”, अकाशी ने बताया।

हमने पूछा कि ऐसा क्या है इन देसी शिकारी कुत्तों में जो उन्हें विशेष बनाता है।

“जहाँ हमारे लोग नहीं पहुँच सकते, वहाँ हमारे मुधोल पहुँच सकते हैं। वे बहुत पतले हैं, वजन बहुत कम है और इसलिए उनके दौड़ने की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। मुख्य रूप से वे शिकारी कुत्ते हैं और एक बार उन्हें प्रशिक्षित कर दिया जाए तो वे बम खोजने, अपराध का पता लगाने का कार्य कर सकते हैं। उनके सूंघने की शक्ति बहुत तेज़ है।”, वे समझाते हैं।

क्रिक, तिम्मापुर

साथ ही, सामान्य रूप से डॉबरमैन, जर्मन शेफर्ड और लैब्राडोर जैसी पश्चिमी प्रजातियों का उपयोग ही हमारे पुलिस और सैन्य बल करते हैं लेकिन “हमारे प्रधानमंत्री देसी नस्लों में काफी रुचि रखते हैं और आत्मनिर्भर भारत के उनके विचार के अनुसार, वे चाहते हैं कि हमारे सभी बलों, अर्ध सैन्य बलों तथा केंद्र व राज्य के स्तर पर सभी पुलिस विभागों में देसी प्रजातियों को सम्मिलित किया जाए।”

अकाशी बताते हैं कि माँग काफी बढ़ी है और केंद्र को बहरीन जैसे देशों से भी इसके लिए कॉल आ रहा है। विजयपुरा, बेलगावी और बागलकोट के सभी निकटवर्ती क्षेत्र में प्रजनकों (ब्रीडर) की संख्या बढ़ रही है और मूल्य भी शिखर पर पहुँच रहा है।

2010 में जिनका मूल्य लगभग 10,000 रुपये होता था, वह अब नर पिल्लों के लिए 14,000 रुपये और मादा पिल्लों के लिए 13,000 रुपये हो गया है तथा जोड़े में इन्हें 25,000 रुपये के मूल्य पर खरीदा जा सकता है।

लेकिन ये सरकारी दरें हैं, बाज़ार में मूल्य इससे काफी अधिक है। केंद्र पर यह प्रजाति सात मानक रंगों में मिलती है लेकिन निजी प्रजनकों के पास 10 रंगों का विकल्प उपलब्ध है।

इस प्रजाति की वंशावली 500 वर्षों से भी अधिक पुरानी है जब “राजाओं ने अमेरिका के ग्रेहाउंड, पूर्वी एशिया के सालुकी और मध्य एशिया की स्लूगी प्रजाति के कुत्तों का प्रजनन मुधोल क्षेत्र के स्थानीय कुत्तों से किया था। क्योंकि प्रजनन इस क्षेत्र में किया गया था इसलिए इन्हें मुधोल नाम मिला। राजा मालोजी राव घोरपड़े ने इस कुत्ते का प्रजनन किया और एक जोड़ी इंगलैंड के किंग जॉर्ज 5 को दी।”

हर्षा स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @bhatinmaai द्वारा ट्वीट करती हैं।