रक्षा
भारत के पास उपलब्ध विकल्पों में से एयर स्ट्राइक का चयन सर्वश्रेष्ठ क्यों

आशुचित्र- तीन कारण कि क्यों पाकिस्तान में घुसकर हवाई हमला करना भारत के पास उपलब्ध विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ चयन था।

भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक को दोहराया है लेकिन इस बार अलग ढंग से। नियंत्रण रेखा के निकट छिछले स्तर के हमले की बजाय इसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को पारकर पाकिस्तान के खैबर-पख्तून्ख्वा में घुसकर हवाई हमला किया।

रिपोर्ट के अनुसार 12 मिराज 2000 विमानों ने मात्र 17 मिनट की उड़ान भरी और बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के चिह्नित ठिकानों- प्रशिक्षण शिविर और सुविधा प्रदाता केंद्र, पर 1000 किलो के बम गिराए। क्षति का आँकलन अभी हो रहा है। इसकी पुष्टि अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा ही की जी सकती है जो इस आँकलन के लिए सैटेलाइट इमेजरी का प्रयोग करेंगे। इस हमले का सटीक समय 3.30 बजे था और पीओके का मार्ग अपनाने ने रास्ते को छोटा बना दिया।

पाकिस्तान के अंतर-सुविधा जनसंपर्क के महानिदेशक ने ट्वीट कर कहा कि पाकिस्तानी वायुसेना ने तुरंत प्रतिक्रिया दिखाई और भारतीय वायुसेना को जल्दबाज़ी में लौटना पड़ा जिससे उनके बम निशाने पर नहीं गिरे व हमें ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ। पाकिस्तान के जनसंपर्क से ऐसी प्रतिक्रिया अपेक्षित थी क्योंकि उनका काम ही पाकिस्तान का मनोवैज्ञानिक अभियान चलाना है।

हालाँकि, कुछ सूत्रों का दावा है कि यह स्ट्राइक बहुत ही प्रभावशाली रही। 12 भारतीय वायुसेना के विमान पाकिस्तानी रडार को मात देकर इसके भूभाग के भीतर घुस गए, यह अपने आप में ही न सिर्फ पाकिस्तानी नेतृत्व को, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भी एक मज़बूत रणनैतिक संदेश भेजता है- भारत की क्षमता और राजनीतिक चाह से भरा संदेश।

मेरा यह क्यों मानना है कि इस विकल्प को चुनना सर्वेश्रेष्ठ था?

पहला, इस विकल्प में मात्र आतंक इन्फ्रास्ट्रक्चर को ही निशाना बनाया गया और किसी चीज़ हो हानि नहीं पहुँची जो नीतिगत रूप से भारत की मर्यादा को बनाए रखता है। इसका अर्थ यह है कि इसके कारण राजनयिक प्रयासों को नुकसान नहीं पहुँचेगा। राजनयिक ढंग से संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अन्य जगहों पर बहुत कुछ हासिल किया गया है और भारत के किसी प्रयास को क्षति पहुँचाए बिना यह अभियान जारी रखा जा सकता था। उदाहरण के लिए, सुषमा स्वराज बिना ठिठके अभी भी 1-2 मार्च को अबू धाबी में होने वाले इस्लामिक कोपरेशन संघ के सम्मेलन में जा सकती हैं। यदि पाकिस्तानी सेना को किसी प्रकार से नुकसान पहुँचाया जाता तो मुझे नहीं लगता है कि हम इस लाभांश को एकत्रित कर पाते।

दूसरी बात, इसे बहुत ही उचित रूप सेपूर्व-रिक्तिपूर्व गैर-सैन्य स्ट्राइकके रूप में करार करते हुए, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए संदेश पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह स्मार्ट सोच है और विदेश सचिव के संबोधन को मीडिया में संक्षिप्त और गुप्त रखने से और भी अधिक प्रभाव पड़ता है।

तीसरी बात, यह पाकिस्तान को दुविधा में डालता है। अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी से मिल रहे रणनीतिक लाभ को यह भुनाने में असफल है और इसलिए यह निम्न राजनयिक स्तर पर आ चुका है। प्रधानमंत्री इमरान खान के अपरिपक्व संदेश, कि ऐसा नहीं है कि भारत  के हमले पर पाकिस्तान सैन्य प्रतिक्रिया के बारे में नहीं सोचेगा, अपितु वास्तव में दृढ़ता से जवाब देगा, के कारण इमरान खान चर्चा का केंद्र बन गए हैं उनके मंत्रियों ने उनके संदेश को और अधिक भावुक रूप से प्रतिध्वनित करके इसे बदतर बना दिया।

पाकिस्तान के लिए विकल्प सीमित हैं। भारत में कोई आतंकी ढाँचा नहीं है जिसे वह प्रतिक्रिया में निशाना बना सके और बदला ले सके। यदि यह भारतीय सैन्य सुविधाओं या नागरिक बुनियादी ढाँचे को लक्षित करने का विकल्प चुनता है तो नैतिक तौर पर यह उसके खिलाफ हो जाएगा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी छवि पूरी तरह धूमिल हो जाएगी। यह पिछले दिनों की तरह हमारे गश्त में नियंत्रण रेखा पर हमला करने और इससे अपेक्षाकृत कम लाभ प्राप्त करने का विकल्प चुन सकता है। पाकिस्तान सरकार और सेना इसके बाद गहन दबाव में रहने वाले हैं जब तक कि उचित जवाब नहीं दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी उसका साथ नहीं देगा। यह तथ्य है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था क्षीण है और इस वजह से उसके पास सैन्य क्षेत्र में और भी कम विकल्प बचते हैं।

फिर भी यह उत्सव का समय नहीं है। एक अकेली एयर स्ट्राइक हालाँकि सामरिक संदेश के लिए प्रभावशाली है लेकिन निवारक के उद्देश्य के लिए प्रभावी नहीं है। यह पाकिस्तान को खुद के रास्ते से दूर करने वाला नहीं है।

भारत को इस उपलब्धि के बाद उन्मादी  होकर समझदार होना होगा। यह विकल्प उचित मापांकन का चयन कर उचित देखभाल के साथ प्राप्त एक ठीक तरह से की गई कार्रवाई है। सरकार को यह ध्यान रखना चाहिए कि खेल का अंत नहीं हुआ है। जबकि अभी और भी बहुत कुछ होना बाकि है, विशेष रूप से समाज को विभाजित करने और भारत के सामाजिक सामंजस्य को लक्षित करने के प्रयास और हमें इसके लिए हर तरीके से तैयार रहकर हमें इसका सामना करना होगा।