रक्षा
भारतीय नौसेना मिग-29की तैनाती से हिंद महासागर तक चीन को कैसे आड़े हाथ ले रही है

वार्ता के बावजूद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने पीछे हटना शुरू नहीं किया है और इसी बीच भारतीय नौसेना देश के उत्तरी भागों में भारतीय वायुसेना के प्रमुख बेसों पर फाइटर जेट मिग-29के की तैनाती कर रही है।

भारतीय नौसेना के पास कुल 40 मिग-29के लड़ाकू जेट हैं जिनमें से 18 आईएनएस विक्रमादित्य पर तैनात हैं। बाकी जेट गोवा के नौसैनिक बेस में आईएनएस हंसा पर हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि भारतीय नौसेना के पी-8आई समुद्री पैट्रोलिंग और निगरानी विमान पहले से ही लदाख क्षेत्र में चीन की आक्रामकता पर नज़र रखे हुए हैं। पी-8आई एयरक्राफ्ट यूएस से आयातित हैं और अब क्षेत्र में भारतीय सेना को सशक्त कर रहे हैं।

मिग-29के की तैनाती भी तीनों सेनाओं के सहयोग और समन्वय की दिशा में एक बड़ा संकेत है। पिछले दिसंबर को चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ (सीडीएस) का पद भी इसलिए ही बनाया गया था और जनरल बिपिन रावत देश के पहले सीडीएस बने।

रावत ने पहले ही इस बात का संकेत दे दिया था कि समुद्री कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को वायुसेना की सहायता के लिए उत्तरी या पश्चिमी सीमा पर तैनात किया जा सकता है। भारतीय नौसेना ने दशक भर पहले मिग-29के लड़ाकू जेट रूस से खरीदे थे।

इससे पहले 2017 में भी भारतीय नौसेना डोकलाम स्टैंडॉफ के समय एलएसी पर निगरानी करने का काम कर चुकी है और अब लदाख में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

एलएसी पर सक्रिय होने के अलावा नौसेना मलक्का स्ट्रेट्स में भी नियमित अभ्यास कर रही है, इसी स्थान से चीनी नौसेना हिंद महासागर में प्रवेश कर सकती है। समुद्र में भी चीन की आक्रामकता के कारण समुद्री क्षेत्र में निगरानी रखना आवश्यक हो गया है।

चीनी नौसेना अपने युद्धपोतों के साथ हिंद महासागर में कई बार आती है और भारतीय नौसेना उनकी गतिविधियों पर दृष्टि रखती है। आईएनएस विक्रमादित्य तो तैयार ही है यूएसएस निमित्ज़ के साथ अभ्यास करके भारत ने चीन को रणनीतिक संदेश भी भेज दिया है।