रक्षा
लड़ाकू विमानों की कमी को पूरा करने के लिए जल्द ही रूस से भारत आएँगे मिग 29

लड़ाकू विमानों की कमी का सामना करते हुए भारतीय वायु सेना मिग 29 लड़ाकू जेट की तत्काल खरीद के लिए रूस के साथ अग्रिम बातचीत की है जिसे जल्द से जल्द वितरित किया जा सकता है, इकोनॉमिक टाइम्स  ने बताया।

रिपोर्ट के अनुसार पिछले महीने भारतीय वायु सेना ने एक नए मिग 29 स्क्वाड्रन बनाने के लिए 21 अतिरिक्त विमानों के अधिग्रहण की योजना पर विस्तृत चर्चा की थी। 1980 के दशक में सबसे पहले मिग 29 लड़ाकू विमान खरीदे गए थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रूसी लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण से भारतीय खजाने की कीमत लगभग 6,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। प्रत्येक मिग 29 के साथ हथियार प्रणाली, प्रशिक्षण और आवश्यक अन्य सहायक उपकरण शामिल होंगे। सरकार से सरकार के समझौते के तहत रूस के साथ बातचीत की जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार इन जेट वाहनों का उपयोग नहीं किया जा रहा है लेकिन उन्हें फिर से उपयोग करने के लिए अच्छी स्थिति में रखा गया है। योजना को उन्नत स्तर तक पहुँचाने के लिए नए हथियारों के साथसाथ एयरटूग्राउंड क्षमताओं, विस्तारित रेंज और एक एविएक्स पैकेज भी शामिल किया गया है।

एक बहुत ही उचित मूल्य साझा किया गया है और हम इस प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं और इसका मूल्यांकन कर रहे हैं। पिछले महीने एक द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई थी,” रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था।

भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन की स्वीकृत संख्या 42 से 31 तक घटने के मद्देनजर यह वार्ता हुई है। 36 राफेल जेट विमानों के वितरण से भी  स्क्वाड्रनों की संख्या में महत्वपूर्ण बदलाव की कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि काफी सारे मिग 21 और 27 के स्क्वाड्रनों को हटा दिया जाएगा।