रक्षा
नियंत्रण रेखा पर पिछले कुछ दिनों की घटनाओं का ब्यौरा, भारत की प्रतिक्रिया का कारण

पिछले शुक्रवार (10 अप्रैल) को सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो आए जिसमें भारतीय सेना की तोपें नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी सेना के स्थलों पर निशाना लगाती नज़र आ रही हैं। यह घटना उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर की है।

शुक्रवार दोपहर को भारतीय सेना ने केरन सेक्टर से पाकिस्तानी सेना पर हमला किया था। नीलम घाटी के उत्तरी भागों से केरन सेक्टर द्वारा आतंकवादी भारत में घुसपैठ करते हैं। ऐसी घटनाएँ इतनी अधिक हैं कि अब इसे “घुसपैठिया राजमार्ग” कहा जाने लगा है।

विभिन्न समीक्षकों के अनुसार पिछले दो सप्ताहों यह रावलपिंडी के उकसावे पर एक सोचा-समझा जवाब था। इस उकसावे में आतंकवादियों की घुसपैठ में सहायता करने के लिए आतंक लॉन्च पैडों से युद्धविराम का उल्लंघन करना सम्मिलित है। समीक्षकों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में सेना की ओर से जो बयान आए हैं, उनसे यह स्पष्ट होता है।

पाकिस्तान ने इस प्रयास में मुँह की खाने के बाद रविवार को दुस्साहस किया जहाँ उसने युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए केरन सेक्टर के ही रिहायशी इलाकों पर गोलीबारी की और बम के गोले दागे। इस दुर्घटना में एक नबालिग सहित तीन नागरिकों की मौत हो गई।

शाम 5 बजे पाकिस्तान ने आवासीय क्षेत्रों पर निशाना साधना शुरू किया था। ऐसा ही दुस्साहस पुंछ जिले में भी किया गया। इसके प्रतिकार में भारतीय सेना ने भी मुँहतोड़ जवाब दिया और साथ ही राहत और बचाव कार्य भी शुरू किया।

“पीर पंजाल के दक्षिण में गर्मी बढ़ी है और ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत के साथ बर्फ पिघलना शुरू हो गई है। नियंत्रण रेखा के उत्तरी भाग में भी गर्मी बढ़ेगी। इसके शुरुआती लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं।”, एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने 5 अप्रैल को कहा था। सेना कहा मानना है कि ये सारे संकेत इस वर्ष कश्मीर में अधिक गर्मी पड़ने की ओर इशारा करते हैं।

किन घटनाओं के कारण भारतीय सेना की रही ऐसी प्रतिक्रिया

24-30 मार्च- नियंत्रण रेखा के कई सेक्टरों में युद्धविराम उल्लंघन की कई घटनाएँ और शेलिंग यानी गोलीबारी से आतंकवादियों को घुसाने के प्रयास रिपोर्ट किए गए थे। भारत ने भी जवाबी कार्रवाई की थी।

1 अप्रैल- ड्रोन चित्रों में भारतीय सेना को घुसपैठियों की गतिविधियाँ दिखीं जिनकी बाद में हिम पर पड़े पदचिह्नों से पुष्टि की जा सकी। घुसपैठिए शम्साबारी पर्वत श्रृंखला से घुसे थे और गुज्जर धोक (बंजारों के अस्थाई घर) में छुपे थे।

भारतीय सेना ने रणडोरी बेहक नामक ऑपरेशन चलाया। 8 जाट रेजीमेंट की तलाशी टुकड़ियों को घुसपैठियों को ढूंढने के लिए लगाया गया। कुछ समय तो इन टोलियों ने आतंकवादियों को घेरे रखा लेकिन वे भागने में सफल हुए।

2 अप्रैल- इस अभियान से 41 और 57 राष्ट्रीय राइफल्स भी जुड़ गए। इस दिन दिन के 4.30 बजे भारी गोलीबारी से सैनिकों ने घुसपैठियों को उलझाए रखा लेकिन वे भाग निकले।

वहीं, इसी दिन एक दूसरी घटना में पुंछ जिले के बालाकोट क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के पार से पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में दो सैनिक घायल हो गए।

3 अप्रैल- सैन्य टोलियों ने आतंकवादियों का फिर सामना किया। युद्धविराम उल्लंघन और मोर्टार गोलाबारी की घटनाएँ राजौरी के नौशेरा सेक्टर से रिपोर्ट की गईं।

4 अप्रैल- दुर्गम भूगोल और इससे संबंधित चुनौतियों के कारण सेना ने विशेष बलों को बुलाया। कम से कम दो स्क्वाड जिसमें छह-छह सैनिक थे, 4 पैरा (विशेष बल) से सेना में आतंकवादियों की खोज और खात्मे के लिए सम्मिलित किए गए। ध्रुव हेलिकॉप्टर के माध्यम से कमांडो को कमर तक बिखरी बर्फ में उतारा गया।

4 अप्रैल को दिन के 12.45 बजे खींची गई निम्न तस्वीर में एक जवान को कमर तक बर्फ में खड़े देखा जा सकता है और अन्य जवान हेलिकॉप्टर से उतर रहे हैं।

5 अप्रैल- मध्य दोपहरी में दो स्क्वाडों में से एक जो पदचिह्नों के आधार पर आतंकवादियों का पीछा कर रहा था, चलते चलते पहाड़ के एक कोने में पहुँच गया जो बर्फ के कारण बना हुआ था। भार पड़ने पर वह टूट गया और वे गिर गए। वे जहाँ गिरे वहाँ से कुछ मीटर की दूरी पर ही आतंकवादी छुपे हुए थे।

इसके बाद हुई मुठभेड़ में कमांडो ने चार आतंकियों को मार गिराया। पाँच आतंकवादियों में से एक आतंकी जो घटनास्थल से भागने में सफल हुआ था, उसे 8 जाट रेजीमेंट के सैनिकों ने नयंत्रण रेखा के निकट मार गिराया।

घटना की जानकारी रखने वाले के अनुसार पाँच आतंकवादियों में से तीन जम्मू-कश्मीर से थे, जबकि अन्य दो का प्रशिक्षण जैश-ए-मोहम्मद के साथ हुआ था। हालाँकि उनकी पहचान के लिए और प्रयास जारी हैं।

छह कमांडो में से पाँच वीरगति को प्राप्त हुए, तीन मुठभेड़ स्थल पर ही और दो एयरलिफ्ट कर श्रीनगर लाए जाने के बाद। कमांडो के शव आतंकवादियों के शव के निकट ही पाए गए, कुछ रिपोर्टों के अनुसार मात्र 2 मीटर की दूरी पर। यह दर्शाता है कि दोनों के बीच मुठभेड़ काफी नज़दीक से हुई थी।

6-8 अप्रैल- युद्धविराम उल्लंघन की घटनाएँ जारी रहीं। एक सैन्य अधिकारी के अनुसार युद्धविराम उल्लंघन का सीधा संपर्क घुसपैठ के प्रयास से है।

9 अप्रैल- पाकिस्तानी सेना की प्रोपगैंडा इकाई अंतर-सेवा जनसंपर्क (आईएसपीआर) का दावा है कि भारत के क्वाडकॉप्टर ने उनके देश की हवाई सीमा का उल्लंघन किया और इस कारण से उसे नियंत्रण रेखा के सांख सेक्टर में गिरा दिया गया। आईएसपीआर की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार क्वाडकॉप्टर पाकिस्तानी सीमा के 600 मीटर भीतर तक घुसा था।

आईएसपीआर द्वारा डाला गया क्वाडकॉप्टर का चित्र

10 अप्रैल- भारतीय सेना ने तोपों से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंक लॉन्च पैड, बंदूक क्षेत्र और हथियार स्थलों पर निशाना साधा। रिपोर्टों के अनुसार इस गोलाबारी में 105 एमएम फील्ड गन और 155 एमएम बोफोर्स एफएच77 फील्ड होइट्ज़र (छोटी बंदूक) का उपयोग किया गया था। “सटीक निशानों” के कारण “पाकिस्तानी पक्ष का भारी नुकसान हुआ”, सेना ने बताया।

समीक्षकों के अनुसार तोपों का उपयोग बढ़ती तनाव की स्थिति दर्शाता है और सेना द्वारा भारी हथियारों का चयन इसलिए किया गया था ताकी पाकिस्तान को यह संदेश दिया जा सके कि उन्हें पीछे धकेलने के लिए “जो आवश्यकता होगी, हम वो करेंगे।”

यह पहली बार नहीं है जब शांति काल में भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पर बढ़े तनाव के बीच होइट्ज़र का उपयोग किया है।

आखिरी बार अक्टूबर 2019 में ऐसा हुआ था जब पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर में दो भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे और एक नागरिक की मौत हुई थी। इसके प्रतिकार में भी भारतीय सेना ने बोफोर्स तोप का उपयोग कर सटीक निशाने साधे थे।